नवोदय टाइम्स : मेहनत करे पत्रकार, हक खाए दलाल

दूसरों को नियम कानून और नैतिकता का उपदेश देने वाले मीडिया संस्थान इन्ही उपदेशों का किस तरह नंगा नाच करते हैं यह किसी से छुपा नहीं है। एक ऐसी ही शिकायत है नवोदय टाइम्स के कर्मचारियों की जहां कर्मचारियों से मशीन की तरह काम लिया जाता है, लेकिन उसके बदले मालिक और संपादक की नजर कर्मचरियों के वेतन काटने में रहती है। किसी को मेडिकल कार्ड नहीं, अवकाश कार्ड नहीं, पीएफ का पैसा कहा जाता है, पता नहीं लेकिन मुंह खोले तो निकालने की धमकी पहले दी जाती है। यहां साप्ताहिक अवकाश या अवकाश के बारे में सोचो ही मत। जान पर आफत हो तो क्या,  दवाई खाकर आओ और काम करो। जान से ज्यादा यहां काम कीमती है।


पूछ हिलाने वाला चहिए... कुछ मीडिया संस्थान चापलूसी के गढ़ बना दिए गए हैं। यहां काम करने वालों की कीमत नहीं है। ऐसे लोगों की जरूरत है जो सही हो या गलत, बस पूंछ हिलाते घूमे। संपादक या मालिक कुछ भी बोले तो ये वाह-वाह बोलें... ''वाह सर, आपने सौ टके सच बात कही'' टाइप जुमले फेंकते रहे। यह सब सुन कर शोषणकर्ताओं का सीना फूलकर ऐसे चौड़ा होता है मानो वही धर्मराज हैं। दूसरे की कमाई पर ऐश करने वालों को शोषण कानूनी लगता है। हालांकि पूंछ हिलाने वालों की भी कीमत तभी तक है जब तक वे काम के हैं। जो व्यक्ति सही को सही और गलत को गलत कहने की हिम्मत नहीं कर सकता वह दूसरों के साथ क्या न्याय करेगा। जबकि कीमत उसके काम की ही मिलती है। सिर्फ अंतर यह होता है कि एक बिस्कुट अतिरिक्त मिलने के साथ थोड़ा सहला दो।

कर्मचारी तो बंधुआ मजदूर हैं... कर्मचारियों का शोषण बंधुआ मजदूर के समान किया जाता है। लेकिन सरकार और श्रम विभाग के आंख में पट्टी बंधी रहती है। श्रम विभाग के लोगों का हाल तो ये है कि कि श्रमिकों को न्याय दिलाने के नाम पर टैक्सपेयर के पैसे से वेतन तो ले लेते हैं लेकिन काम शोषणकर्ताओं के बचाव का करते हैं। यहां कुछ सीनियर्स संपादक की चमचागिरी करते हैं। जूनियरों के साथ बेहद बदतमीजी के साथ बात किया जाता है। ऐसा लगता है जैसे यहां पत्रकार नहीं किसी जेल का कैदी काम करता हो। संपादक महोदय की चमचागिरी करने वाले सीनियर्स की यहां चांदी है। काम कम भौकाल ज्यादा। यहां कर्मचारियों को जो संस्थान ने कार्ड दिया है वो नवोदय वेबसाइट का दिया गया है, जबकि यहां लोग काम करते हैं अखबार में। ये कैसा फर्जीवाड़ा है। मजीठिया से बचने के लिए संपादक अखबार मालिक से मिलकर इस षडय़ंत्र में मुख्य रूप ये शामिल हैं। जो कार्ड अभी है कर्मचारियों के पास, उसका भी अगस्त में टाइम खत्म हो चुका है। प्रबंधन नहीं चेता तो जल्द ही यहां कर्मचारी अपने हक के लिए कोई बड़ा घटनाक्रम अंजाम दे सकते हैं। 
एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित
Sabhar- Bhadas4media.com
नवोदय टाइम्स : मेहनत करे पत्रकार, हक खाए दलाल नवोदय टाइम्स : मेहनत करे पत्रकार, हक खाए दलाल Reviewed by Sushil Gangwar on March 21, 2017 Rating: 5

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