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बिना सेलरी और बिना नौकरी वाले ये लखनऊ के पत्रकार कहां से गाड़ियां, कोठियां, स्कॉच हासिल कर लेते हैं!

Zafar Irshad : मुख्यमंत्री जी को घेरे है चाटुकार पत्रकारों की टीम..प्रदेश में कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश रखने वाले युवा मुख्य्मंत्री अखिलेश जी भी चाटुकार पत्रकारों के चक्कर में पड़ गए लगते है..उनके इर्द गिर्द वही पत्रकार चक्कर लगा रहे है,जो इससे पहले वाली सरकारों के दरबार में दण्डवत हाज़िरी लगाते थे..यकीन न हो इनका रिकॉर्ड देख लें की यह महानुभाव बड़का पत्रकार 4 साल पहले और उससे पहले कहाँ हाज़िरी लगाते थे..
मेरी एक बात समझ में नहीं आती है की यह पत्रकार कहीं नौकरी भी नहीं करते है न ही इन्हे सैलरी मिलती है, इसके बावजूद इनकी लखनऊ में बड़ी बड़ी कोठिया बंगले है, लम्बी लम्बी महंगी गाड़ियों में घुमते है, शाम को शानदार स्कॉच पीते है ..इनको यह फर्क नहीं पड़ता है किसकी सरकार है इनका जुगाड़ पानी चलता रहता है..आखिर कैसे?
मैं 20 साल से एक अच्छी नौकरी में हूँ लेकिन आज तक एक दो कमरे का घर नहीं बनवा पाया मोटर साइकिल से चलता हूँ..आखिर यह पत्रकार कहाँ से लाखों करोड़ों में खेलते है? पहले भी खेलते थे और आज भी खेलते है... मैंने सोचा था यह युवा मुख्यमंत्री ऐसे धन्धेबाज़ पत्रकारों से दूर रहेंगे, लेकिन अफ़सोस यह धन्धेबाज़ आज भी सत्ता के करीब है... कल कोई और सरकार आ गयी तो उसके भी करीब आ जाएंगे... मुख्यमंत्री जी, दूर रहें ऐसे धंधेबाजों से,  एक छोटे पत्रकार की सलाह है आपको, मानें या न मानें.. (प्लीज नोट :- मुझे कुछ भी आपसे नहीं चाहिए CM साहिब, मैं अपनी सैलरी से अपना और परिवार का पेट पाल लेता हूँ बस )...
पीटीआई कानपुर के वरिष्ठ पत्रकार जफर इरशाद के फेसबुक वॉल से. इस स्टेटस पर आए कुछ प्रमुख कमेंट्स इस प्रकार हैं.

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