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Sunday, 10 January 2016

मध्य प्रदेश दूरदर्शन का समाचार एकांश : जात ही पूछो साधू की...

मध्य प्रदेश दूरदर्शन के समाचार एकांश में जात और अर्थ (धन) को लेकर उठापटक मची हुई है. पुराने लोगों से काम लेना बन्द कर पैसा लेकर नये लोगों से काम लेना शुरु कर दिया गया है. वही जात के आधार पर लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है. डेस्क पर काम करने वाले 5 लोगो को तो बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है. गौरतलब है कि सत्ता सम्भलने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने दूरदर्शन को सशक्त करने की पहल शुरु की थी. अपने विदेश दौर के समय वे सिर्फ दूरदर्शन की टीम को ही साथ लेकर गये थे. इतना ही उन्होनें अपने सरकार के साथियों और अधिकारियों को निर्देश भी दिया था कि कोई भी योजना या खबर पहले दूरदर्शन को दे उसके बाद निजी चेनल को.
इसके पीछे मंशा थी कि लम्बे समय से एक पुराने ढर्रे में चल रहे दूरदर्शन की छवि सुधरे. कुछ प्रदेशों में इसका असर भी दिखा. जिसमें मध्यप्रदेश भी एक था. समाचार एकांश में ऐसे अनुभवी अधिकारियों को भेज गया जिन्होनें रुटिन से हटकर काम किया और ग्राफ में इजाफा किया. लेकिन अधिकारी के बदलते ही जिनके हाथों में शाक्ति आई उन्होनें नया खेल करना शुरु कर दिया. 100 से ज्यादा स्ट्रींगरों में से कुछ को छोडकर अधिकांश पर जात के नाम पर काम लेना बन्द कर दिया गया. वही दूर दराज के स्ट्रींगरों को साफ शब्दों में खबर ना भेजने और अपनी सेवाएं समाप्त माने की दो टूक बात कहाकर उन्हें दरकिनार कर दिया गया.
समाचार एकांश में एक अधिकारी जिनकी नौकरी का समय कुछ माह ही बचे है उन्होनें तो पुराने स्ट्रींगरों के खिलाफ मोर्चा ही खोल दिया है. जो भी स्ट्रींगर उनसे मिलने गया उसे दुत्कार कर भाग दिया और साफ हिदायत दे दी कि आइन्दा यहाँ ना आये. उन्होनें तो प्रदेश में अपने लोगों को समाचार भेजने का आदेश दे कर उन्हें विश्वस्त कर दिया है कि नये इम्पैनल मेंट में आपको ले लिया जायेगा. उज्जैन में तो किसी मनोज पौराणिक का नाम समाने आया है.
वहीं इन्दौर, झाबुआ, धार, जबलपुर, ग्वालियर आदि स्थानों पर भी लोगों को खडा कर दिया गया है. सूत्रों का तो कहना है कि बकायदा एक निश्चित रकम भी नये लोगों से ली जा रही है. वही हाल में ही जूनियर अधिकारी से पदोन्नत होकर डिप्टी डायरेक्टर हुए अधिकारी नये खेल कर रहे है. उन्होनें तो दिल्ली एक पत्र भेजकर अपनी जात और लिंग का हवाला देते हुए फ्री हेन्ड देने की बात कही है.इन अधिकारी का मानना है कि अभी तक जो स्ट्रींगर है उनमें सवर्ण का वर्चस्व है. इसलिए अब उन्हें बाहर कर अपनी जात के लोगों को शामिल करेंगे.
जात और धन के इस खेल में सारे नियमों को ताक में रख दिया गया है. भोपाल की डेक्स में काम करने वाले पांच लोगों को जो सवर्ण वर्ग से उन्हें हटा दिया गया है. वही समाचार बनाने की जिम्मेदारी जिस व्यक्ति पर है उसे भी हटाने की कोशिश की जा रही है. अधिकारियों के इस खेल में समाचार एकांश में समाचार नदारद हो गया है. स्थिति यहाँ है कि बुलेटिन ड्राय चल रही है.
भोपाल से एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.
Sabhar- Bhadas4media.com

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