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'सन टीवी को गृह मंत्रालय से नहीं मिला कोई भी नोटिस'

गृह मंत्रालय द्वारा चैनलों के लाइसेंस का नवीकरण करने से इनकार करने से सन टीवी को नुकसान हो चुका है। दैनिक अखबार बिजनेस स्टैंडर्ड के टीई नरसिम्हन और गिरीश बाबू के साथ बातचीत में समूह के सीएफओ एस एल नारायणन ने कहा कि इस मुद्दे से कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित नहीं हुआ है। ये इंटरव्यू आप यहां पढ़ सकते हैं:
इस मामले पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
मेरा मानना है कि कंपनी के जरिये प्रवर्तकों को निशाना बनाने की कोशिश करना गलत बात है। अगर हम मान लें कि सन डायरेक्ट एस्ट्रो मामले में मारन की गतिविधियां आपत्तिजनक हैं तो इसकी वजह से सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड को कारोबार करने का लाइसेंस दिए जाने से क्यों इनकार होना चाहिए, जबकि इस कंपनी का उस मामले से कोई लेना-देना नहीं था? मूल कानूनी सिद्धांत कहता है 'आरोपी साबित किए जाने तक निर्दोष' और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं करने का मतलब प्राकृतिक न्याय का गंभीर उल्लंघन होगा।
यह पूरा मामला सन डायरेक्ट से जुड़ा है। क्या आप बता सकते हैं कि यह सौदा कैसे हुआ था?
मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि एस्ट्रो को बिल्कुल सही कीमत पर शेयर जारी किए गए थे। सार्वजनिक तौर पर मूल्यांकन के लिए दो बेंचमार्क उपलब्ध थे, जिससे स्पष्टï है कि सन डायरेक्ट का रकम पूर्व मूल्यांकन तुलनात्मक था। अप्रैल 2007 में सूचीबद्घ हुई डिश टीवी और नवंबर 2006 में टाटा स्काई-टेमासेक सौदा हमारे दावे को सही साबित करेगा। सबसे अहम बात है कि एस्ट्रो से जो भी इक्विटी डाली गई उसे पूरी तरह डीटीएच परियोजना पर ही खर्च किया गया है और इस सबूत पर ध्यान दिया जाना चाहिए। अधिक प्रीमियम पर शेयर बेचने का आरोप बिल्कुल गलत है और इस रकम का इस्तेमाल अवैध कार्यों के लिए करने का आरोप बेबुनियाद है।
क्या यह राजनीति से प्रेरित है?
मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है और मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा।
क्या आपने मंत्रालय के समक्ष अपना पक्ष रखा है?
हमें किसी भी मंत्रालय से अभी तक कोई आदेश या नोटिस नहीं मिला है- न लिखित में और न मौखिक में। हमें जो भी जानकारी मिलती है वह अखबारों से ही मिलती है।
इसका कारोबार पर क्या असर होता है?
हमारा कारोबार सामान्य रूप से चल रहा है और हम पहले से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्घ हैं। हम कंपनी, कर्मचारियों, ग्राहकों और शेयरधारकों के हित में फैसले लेते रहेंगे।
इन खबरों का सन टीवी के शेयर पर क्या असर पड़ा है?
सन टीवी नेटवर्क के 33 चैनलों को लाइसेंस नहीं दिए जाने की खबर के बाद शेयरों पर 6,000 करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है और इसमें से 4,500 करोड़ रुपये का नुकसान सिर्फ मारन को हुआ है। टीई नरसिम्हन और गिरीश बाबू के साथ बातचीत में समूह के सीएफओ एस एल नारायणन ने कहा कि इस मुद्दे से कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित नहीं हुआ है
इस मामले पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
मेरा मानना है कि कंपनी के जरिये प्रवर्तकों को निशाना बनाने की कोशिश करना गलत बात है। अगर हम मान लें कि सन डायरेक्ट एस्ट्रो मामले में मारन की गतिविधियां आपत्तिजनक हैं तो इसकी वजह से सन टीवी नेटवर्क लिमिटेड को कारोबार करने का लाइसेंस दिए जाने से क्यों इनकार होना चाहिए, जबकि इस कंपनी का उस मामले से कोई लेना-देना नहीं था? मूल कानूनी सिद्घांत कहता है 'आरोपी साबित किए जाने तक निर्दोष' और इसका सम्मान किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं करने का मतलब प्राकृतिक न्याय का गंभीर उल्लंघन होगा।
यह पूरा मामला सन डायरेक्ट से जुड़ा है। क्या आप बता सकते हैं कि यह सौदा कैसे हुआ था?
मैं पूरे विश्वास के साथ कह सकता हूं कि एस्ट्रो को बिल्कुल सही कीमत पर शेयर जारी किए गए थे। सार्वजनिक तौर पर मूल्यांकन के लिए दो बेंचमार्क उपलब्ध थे, जिससे स्पष्टï है कि सन डायरेक्ट का रकम पूर्व मूल्यांकन तुलनात्मक था। अप्रैल 2007 में सूचीबद्घ हुई डिश टीवी और नवंबर 2006 में टाटा स्काई-टेमासेक सौदा हमारे दावे को सही साबित करेगा। सबसे अहम बात है कि एस्ट्रो से जो भी इक्विटी डाली गई उसे पूरी तरह डीटीएच परियोजना पर ही खर्च किया गया है और इस सबूत पर ध्यान दिया जाना चाहिए। अधिक प्रीमियम पर शेयर बेचने का आरोप बिल्कुल गलत है और इस रकम का इस्तेमाल अवैध कार्यों के लिए करने का आरोप बेबुनियाद है।
क्या यह राजनीति से प्रेरित है?
मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है और मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा।
क्या आपने मंत्रालय के समक्ष अपना पक्ष रखा है?
हमें किसी भी मंत्रालय से अभी तक कोई आदेश या नोटिस नहीं मिला है- न लिखित में और न मौखिक में। हमें जो भी जानकारी मिलती है वह अखबारों से ही मिलती है।
इसका कारोबार पर क्या असर होता है?
हमारा कारोबार सामान्य रूप से चल रहा है और हम पहले से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रतिबद्घ हैं। हम कंपनी, कर्मचारियों, ग्राहकों और शेयरधारकों के हित में फैसले लेते रहेंगे।
इन खबरों का सन टीवी के शेयर पर क्या असर पड़ा है?
सन टीवी नेटवर्क के 33 चैनलों को लाइसेंस नहीं दिए जाने की खबर के बाद शेयरों पर 6,000 करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है और इसमें से 4,500 करोड़ रुपये का नुकसान सिर्फ मारन को हुआ है।
(साभार: बिजनेस स्टैंडर्ड)

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