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Tuesday, 9 June 2015

पत्रकार जगेंद्र की मौत के बाद मंत्री के खिलाफ आक्रोश की लहर

सोशल मीडिया पर बेबाक और निष्पक्ष खबरें लिखने वाले जुझारू पत्रकार जागेन्द्र सिंह का पिछले कुछ दिनों से सत्ताधारी नेताओ द्वारा लगातार उत्पीड़न किया जा रहा था, जिसकी शिकायत जागेन्द्र सिंह ने स्थानीय थाने में की थी लेकिन पुलिस उल्टे जागेंद्र को ही गिरफ्तार करने पहुँच गई। जगेंद्र सिंह की मौत के बाद मंत्री राममूर्ति वर्मा के खिलाफ पूरे प्रदेश के पत्रकारों में रोष फैल गया है। सोशल मीडिया पर तो आक्रोश की लहर सी आ गई है।
पत्रकार जगेंद्र सिंह का उत्पीड़न कराने वाला मंत्री राममूर्ति वर्मा और उसका चहेता कोतवाली प्रभारी, जिसके षडयंत्र से गजेंद्र जिंदा जले
घटना के दिन एक जून को लिया गया गजेंद्र सिंह का चित्र
मंत्री और पुलिस के खिलाफ शाहजहांपुर के पत्रकारों में रोष की लहर, मोटरसाइकिल रैली निकालते हुए।
मूलतः खुटार (शाहजहांपुर) के मोहल्ला कोट निवासी जगेंद्र सिंह ने करीब 15 साल पहले पत्रकारिता जगत में पदार्पण किया था। उन्होंने अमर उजाला, हिंदुस्तान, स्वतन्त्र भारत में काम किया। अखबारों के साथ ही जगेंद्र सिंह फेसबुक पर निष्पक्ष और निर्भीक होकर खबरें पोस्ट करने लगे। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से पहले ही खबरों को जनता के बीच पहुंचाया। अपनी इसी छवि के चलते जगेंद्र सिंह का विवादों से नाता भी गहराता चला गया। 
पिछले कुछ माह से जगेंद्र सिंह द्वारा सूबे के पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री राममूर्ती सिंह वर्मा के खिलाफ खूब खबरें लिखीं गई। यह खबरें उन्होंने सपा नेता और पूर्व विधायक देवेन्द्र पाल सिंह के द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर लिखी थीं। मंत्री के खिलाफ खबरें छापने को लेकर उनके ऊपर 28 अप्रैल को देर शाम कार्यालय से घर जाते समय जानलेवा हमला किया गया, जिसमें वह बाल बाल बच गए, मगर उनके पैर में फैक्चर हो गया था। इस घटना की उन्होंने रिपोर्ट भी दर्ज करवाई थी, लेकिन हमले के पीछे मंत्रीके गुर्गो का हाथ होने के शक में पुलिस ने हमलावरों को नहीं पकड़ा। इस बीच एक युवक द्वारा जगेंद्र सिंह के ऊपर झूठी 307 की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई। इस मामले के पीछे भी मंत्री का नाम चर्चा में आया। इसके बाद तो पुलिस जगेंद्र सिंह के पीछे ऐसी पड़ी कि जैसे किसी चम्बल के डाकू को पकड़ना हो। 
पहली जून को तत्कालीन शहर कोतवाल श्रीप्रकाश राय ने उनके घर दबिश दी। इस बीच गिरफ़्तारी में नाकाम कोतवाल ने जगेंद्र सिंह के ऊपर पेट्रोल डालकर उन्हें आग लगा दी। यह बात जगेंद्र सिंह ने अपने बयानों में कही थी। करीब 65 प्रतिशत जले जगेंद्र सिंह को जिला अस्पताल से लखनऊ रेफर किया गया, जहां आठवें दिन उन्होंने दम तोड़ दिया।
जगेंद्र को मंत्री से भिड़ने की कीमत जान देकर चुकानी पड़ी। यदि वह मंत्री के खिलाफ खबरे न डालते या फिर आर्थिक समझौता कर लेते तो आज उनको यह दिन नही देखना पड़ता। अगर जगेंद्र सिंह की मौत की निष्पक्ष जाँच हुई तो मंत्री राममूर्ति सिंह वर्मा भी कानून के शिकंजे में होंगे। हलाकि मरने से पहले जगेंद्र सिंह जो बयान मजिस्ट्रेट को दर्ज करवाये थे उसमे तत्कालीन कोतवाल श्रीप्रकाश समेत अन्य की गर्दन फंसना तय है। अब देखना यह होगा कि जगेंद्र सिंह को असली इंसाफ मिलेगा या नहीं। 
यूनाइटेड पत्रकार एसोसिएशन के आजमी रिजवी ने विरोध जताते हुए कहा है कि मृतक के परिजनों को न्याय दिलाने तक आंदोलन जारी रहेगा। पत्रकार परिषद गुजरात की टिप्पणी है कि जगेंद्र की मंत्री राममूर्ति वर्मा ने हत्या करवा दी है। पत्रकारों से अपीलें की जा रही हैं कि वे माफिया और भ्रष्ट तत्वों की खबरें न लिखें। जगेंद्र की मौत के लिये जिम्मेदार हर शख्स को सजा जरूर मिलनी चाहिए। साथ ही पत्रकारों की सुरक्षा के लिए सरकार को ठोस कानून बनाना चाहिए। देश की सरकारे अपने मंत्रियों को सुरक्षा मुहैया कराती है तो देश के चौथे सतम्भ पत्रकारों को क्यों नहीं मिलनी चाहिए। 
शाहजहांपुर में जगेंद्र सिंह की मौत से पत्रकारों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उन्होंने जगेंद्र सिंह के आश्रितों को न्याय दिलवाने की ठान ली है। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन ने जिलाध्यक्ष राजीव शर्मा के नेतृत्व में बाइक रैली निकाली। राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन एडीएम वित्त प्रमोद श्रीवास्तव को सौंपा। ज्ञापन में पत्रकार जगेंद्र सिंह के प्रकरण की सीबीसीआईडी से जाँच करवाने, उनके परिजनों को सुरक्षा उपलब्ध करवाने, परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से धनराशि उपलब्ध करवाने की मांग की गई है। पत्रकार रमेशशंकर पाण्डेय ने कहा कि जगेंद्र सिंह एक निर्भीक पत्रकार थे। इस मौके पर शैलेन्द्र बाजपाई, हामिद फरीदी, विजय भारती, इमरान सागर, रोहित यादव, अभिनव मिश्रा, अनिल मिश्रा, अभिनय गुप्ता, धर्मपाल सिंह, सिद्दीक अहमद, वसीम, फिरदोश, नरेंद्र शर्मा, कमल रावत, विजय प्रताप सिंह, शकील अहमद, राजू मिश्रा, हृदेश गुप्ता, डा. रेहान, सुबोध कुमार, अशोक, जेपी वर्मा, गोविन्द अवस्थी, मनोज मिश्रा, नरेंद्र सिंह, महेश गुप्ता, उदित नारायण शर्मा, रामरहीस पाल, रूप सिंह, राजन मिश्रा, संजीव अग्निहोत्री, अबनीश यादव समेत अन्य पत्रकार मौजूद थे।
भारतीय कृषक दल के छात्र प्रकोष्ठ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष आनंद यादव ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि शाहजहाँपुर जनपद में लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ सुरक्षित नहीं रह गया है। अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वह अपने खिलाफ खबरें छपने से नाराज होकर पत्रकारों पर ही जानलेवा हमला कर रहे हैं। कुछ माह पूर्व ही दैनिक जागरण के पत्रकार नरेंद्र यादव पर हुए हमले की गुत्थी सुलझ भी नहीं पायी थी कि 23 अप्रैल की शाम जगेंद्र सिंह पर बाइक सवारों ने जानलेवा हमला कर दिया। मंत्री राममूर्ति वर्मा पर आरोप है कि उन्होंने पिछड़ा वर्ग कल्याण के नाम पर लाखों-करोड़ों की कोठी अपने लिए बना ली। वित्तीय अनियमितताओं के साथ मंत्री पर बलात्कार का भी आरोप है। जगेंद्र सिंह ने फेसबुक पर मंत्री के खिलाफ आवाज उठाई तो पहले मंत्री के गुर्गों ने पत्रकार को धमकी दी। उनके पास मंत्री के खिलाफ पुख्ता सबूत थे, जिससे उनकी जान ले ली गई। लखनऊ के सिविल अस्पताल में मौत से जूझ रहे जगेंद्र से आईजी अमिताभ ठाकुर मिलने पहुंचे और जगेंद्र की लड़ाई को जिंदा रखने का आश्वासन दिया। यही नहीं अमिताभ ठाकुर ने कटघरे में आए मंत्री के खिलाफ भी जांच की मांग की है।
Sabhar- Bhadas4media.com

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