एंकर प्रवीण तिवारी की ‘सत्य की खोज’



डॉ.प्रवीण तिवारी
डॉ.प्रवीण तिवारी
लाइव इंडिया के सीनियर एंकर और लाइव इंडिया पत्रिका और अखबार के संपादक डॉ.प्रवीण तिवारी ने हाल ही में ‘सत्य की खोज’ नाम से एक किताब लिखी है. डॉ. प्रवीण तिवारी विगत 16 वर्षों से टीवी और प्रिंट पत्रकारिता से जुड़े हुए हैं। वे स्वयं एक सत्यान्वेषी है और आध्यात्मिक विषयों पर सतत लेखन कर रहे हैं। कई अखबारों और पत्रिकाओं में उनके कॉलम सतत प्रकाशित होते हैं। वे नाद ब्रह्म योग धाम संस्थान के साथ जुड़े हुए हैं और देश भर में नाद ब्रह्म की ध्यान विधि पर जागरूकता फैलाने का कार्य भी कर रहे हैं। सेवादीप फाउंडेशन के जरिए वे देश के युवाओं और बच्चों को प्रेरित करने के लिए भी सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। सत्य की खोज पुस्तक के जरिए वे जीवन जीने का नया दृष्टिकोण समझा रहे हैं.
डॉ.प्रवीण तिवारी किताब के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहते हैं – “सत्य की खोज इसलिए आवश्यक है क्यूंकि सत्य ही जीवन है। आप सत्य की खोज की आवश्यक्ता महसूस नहीं करते तो आप जीवन से ही विमुख हैं। मानव जीवन बहुमूल्य है क्योंकि उसमें विवेक का प्रकाश है। मानव और पशु में भोग के विषय में तो समानता दिखाई देती है लेकिन ज्ञान के विषय में वह पशु से बेहतर है। जो मनुष्य सिर्फ भोग का जीवन जी रहा है वह इस अंतर को समझ नहीं पाया है। जो विवेक की शक्ति को समझ गया है वो सत्य की खोज में है और सत्य उसे अवश्य मिलेगा।”
सत्य की खोज का प्रकाशन प्रभात प्रकाशन ने किया है और इसमें 200 पन्ने हैं. किताब की भाषा हिंदी है. अधिक जानकारी के लिए आप सीधे लेखक से इस मेल के जरिए भी संपर्क कर सकते हैं – drpsawakening@gmail.com
पुस्तक का उद्देश्य     (विस्तार से पढ़ें satya ki khoj )
एंकर प्रवीण तिवारी की 'सत्य की खोज'
एंकर प्रवीण तिवारी की ‘सत्य की खोज’
इन शब्दों को पढ़ते हुए जरा शब्दों की बनावट पर गौर करिए। अपने इर्दगिर्द के माहौल के प्रति सतर्क हो जाइए। अपनी श्वांस की गति पर जरा नजर दौड़ाइये। जरा अपने विचारों को देखने का प्रयास कीजिए। कुछ देर के लिए वर्तमान के प्रति सजग हो जाइए। विचारों को देखिए। कोई विवेचना नहीं। कुछ देर रुकिए और वर्तमान को महसूस कीजिए।……….
जैसे ही आप वर्तमान के प्रति सजग होते हैं एक नवीन और बेहतर दुनिया आपके सामने होती है। आज के वक्त की सबसे बड़ी दिक्कत है मनुष्य का एक काल्पनिक दुनिया में जीना। वो जहां है उस पल को छोड़कर अपने विचारों से पूरी दुनिया का भ्रमण कर रहा है। वर्तमान के प्रति सजगता ही उसे सत्य जीवन के दर्शन करा सकती है। व्यव्हारिक जीवन में वह कई चुनौतियों को अपने समक्ष पाता है। इनमें चिंताएं,praveen-2praveen-3प्रतियोगितावादी संसार की भागदौड़, रिश्तों में कड़वाहट, और अधिक पाने की दौड़, अप्राप्त परिस्थिति का चिंतन प्रमुख हैं। इस पुस्तक में इन सभी विषयों पर प्रकाश डाल कर इनके कारण और निवारण पर विचार किया गया है। दुनिया में जितने भी सत्य को प्राप्त हुए लोग या संत दिखते हैं उनकी सत्य की खोज की विधियों में कोई अंतर नहीं था। सत्य की खोज का तरीका और सभी तरीकों में समानता पर भी इस पुस्तक में रौशनी डाली गई है। भारत में दुनिया के सबसे ज्यादा युवा निवास करते हैं। युवा ऊर्जा को सकारात्मक रूप से पल्लवित किया जाएगा तो हमें एक सुखद भविष्य मिलेगा। स्वामी विवेकानंद का स्वप्न था कि भारत विश्व गुरू बने। वे इस बात पर भी जोर देते थे कि आध्यात्म हमारी जड़ों में है और हमें इसे नहीं छोड़ना चाहिए। व्यव्हारिक जगत में आध्यात्मिक सोच के साथ कैसे बढ़ा जाए, इस विषय पर भी ये पुस्तक एक समाधान प्रस्तुत करती है। आज आध्यात्म को अंधविश्वास की दुकान बनाया जा रहा है। बड़ी तादाद में लोग अनैतिक बाबाओं के दरवाजों पर जा रहे हैं। इसकी बड़ी वजह है उनकी आध्यात्म के प्रति श्रद्धा और बेहतर विकल्प का सामने नहीं होना। इसी देश ने विवेकानंद, शरणानंद और जे कृष्णमूर्ती जैसे वैज्ञानिक सोच रखने वाले क्रांतिकारी संत दिए हैं। सही मायनों में गीता का ज्ञान, योग या सत्य क्या है, इस पर भी इस पुस्तक में विचार किया गया है। काम, क्रोध, लोभ, अनासक्ति ये सारी बातें हम सुनते तो हैं, इनके शाब्दिक अर्थ भी जानते हैं, लेकिन जीवन में इनके व्यव्हारिक इस्तेमाल से हम अनभिज्ञ ही हैं। सरल भाषा और वर्तमान परिस्थितियों में इन विषयों पर प्रकाश डालने का भी प्रयास इस पुस्तक के माध्यम से किया गया है। भाग्य को लेकर कई मान्यताएं हैं आखिर भाग्य क्या होता है और सत्य की खोज में इसका क्या योगदान है इस विषय पर भी सारगर्भित जानकारी इस पुस्तक के माध्यम से दी गई है। अंत में निर्विचारता को प्राप्त कर वर्तमान में ही जीने की विभिन्न विधियों का विवेचन भी किया गया है। मन को काबू करना किसी मदमस्त हाथी को काबू करने से भी मुश्किल है एक बार उसे काबू कर लिया तो वर्तमान और आपके विचार आपकी मुठ्ठी में होते हैं। विचारो को काबू करने की असरदार विधियों पर भी इस पुस्तक में चर्चा की गई है।

Sabhar- Mediakhabar.com
एंकर प्रवीण तिवारी की ‘सत्य की खोज’ एंकर प्रवीण तिवारी की ‘सत्य की खोज’ Reviewed by Sushil Gangwar on April 07, 2015 Rating: 5

No comments