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Thursday, 11 December 2014

अजीत अंजुम ने सही लिखा है कि उदय शंकर यारों के यार हैं – विनोद कापड़ी



विनोद कापड़ी
एक बहुत बड़ी मीटिंग !!
कौन कौन नहीं था उसमें।
सेल्स हेड, मार्केटिंग हेड,Distribution हेड और ना जाने कौन कौन और कितने हेड।
इसके अलावा शाजी , Milind Khandekar, Venkat Rao, मैं और एक दो और सहयोगी। वो एक बड़ी बैठक थी। उदयशंकर ने बैठक बुलाई थी। कोलकाता से भी मैनेजमेंट के लोग आए थे।
मुद्दे गंभीर थे। बात आगे बढ़ी।Rao साहब एक लंबे अनुभव वाले संपादक थे। कई अख़बारों के संपादक रह चुके थे। उन्हे कुछ बातें पसंद नहीं आई। उन्होंने विरोध किया। बात बढ़ी और बिगड़ गई। इतनी बिगड़ गई कि BV Rao भरी बैठक में अपने हाथ मे रखे काग़ज़ फेंकते हुए चले गए कि मुझे इस आदमी के साथ काम नहीं करना , ये रहा मेरा इस्तीफ़ा। पूरी बैठक में सन्नाटा पसर गया था। सब सन्न। फिर उस ख़ामोशी को तोड़ा उदयशंकर की आवाज़ ने – तो हम क्या बात कर रहे थे !!
बैठक जारी रही पर सब तनाव में थे कि जो हुआ, वो ठीक नहीं हुआ पर उदय और उनके ग़ुस्से को भी सब जानते थे। बैठक चलती रही उसी तनाव मे।
फिर ठीक उसी दौरान बैठक मे एक कुर्सी पीछे हुई। कुछ हिली। उदय पर नज़र गई। उदय की नजर भी कुर्सी पर गई। कुर्सी और पीछे हुई। कुर्सी पर बैठे शख़्स को समझ मे आ गया कि उदय चाहते हैं कि कुर्सी और पीछे जाए। कुर्सी और पीछे हुई। वो मेरी कुर्सी थी। मैं समझ गया था कि उदय चाहते हैं कि मैं बेहद नाराज़ होकर निकले BV Rao को वापस लेकर आऊँ। बाहर निकल कर जब मैं BV Rao को वापस चलने के लिए समझाने लगा तो वो बोले कि विनोद मैं भूखा मरने को तैयार हूँ पर इस पागल आदमी के साथ काम नहीं करूँगा। मैंने उनसे तुरंत कहा कि हाँ सर वो आदमी सच में पागल है , इसीलिए भरी बैठक में बतौर CEO अपमान सहने के बाद भी वो चाहता है कि आप बैठक मे वापस आएँ। सुनकर कुछ हैरान हुए। बोले तुमको उदय ने भेजा है बुलाने के लिए। मैंने झूठ कहा- हाँ सर। राव साहब का ग़ुस्सा कुछ ठंडा हुआ। कुछ और मनाया गया। गुड़गाँव जाने के लिए जो बैग उन्होंने कंधे पर टाँग लिया था, उसे उन्होंने उतारा और चल पड़े। हम दोनो बेहद सहज तरीके से अंदर दाख़िल हुए और अपनी अपनी जगह जा कर बैठ गए। उदय ने सिर्फ़ एक पल के लिए हमारी Entry को recognise किया और बैठक चलती रही। कोई कुछ नहीं बोला। एक घंटे बाद लंच का वक़्त हुआ और देखा क्या कि उदय राव साहब को गले लगकर सॉरी बोल रहे है!! राव उदय को सॉरी बोल रहे हैं और उदय राव को।
अजीत अंजुम की एक पोस्ट ने मुझे आज उदय के बारे में लिखने को मजबूर किया है। और इस घटना का ज़िक्र सिर्फ़ ये बताने के लिए कि वो आदमी सच मे ही पागल रहा। ख़बरों के लिए भी और इंसानी रिश्तों के लिए भी। ना जाने कितनी बार यही स्थिति मेरे साथ भी हुई , इस्तीफ़ा दिया और चले गए। 15-20 मिनट मे ही फ़ोन आ जाता था – अबे कहाँ हो। चुपचाप काम करते रहो। दोबारा नहीं बोलूँगा।
बस उनका इतना बोलना होता था और सारा ग़ुस्सा , सारा अहंकार ग़ायब। हम उनसे अकसर पूछते थे कि आप हम जैसे लोगों को , हमारे attitude को बर्दाश्त कर सकते हैं तो उदय का अकसर एक ही जवाब होता था कि “विनोद जो लोग छोटा सोचते हैं और छोटा काम करते हैं , वो हमेशा छोटे ही रहते हैं। मुझे क्या मिल जाएगा अपनी ego को satisfy करके। मुझे पता है कि तुम मेरी इज़्ज़त करते हो और मैं तुम्हें प्यार करता हूँ,बाक़ी सब तो temporary है। ” और सच मे यही होता रहा। सालोसाल यही चलता रहा। जो आज भी जारी है।
1996. Zee TV के दिन जब पहली बार साथ मे काम किया उदय के। आज मै ये सब इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि 1996 से 2014 तक उदय ने ही रिश्तों को निभाया है। उदय ने निभाया इसलिए बोल रहा हूँ क्योकि उन्होंने हमेशा चिंता की या Sms करके पूछ लिया -और भई !! क्या चल रहा है ?? या कोई sms करो तो तुरंत जवाब !! हर कोई जानता है कि star india का CEO क्या होता है , कितना फँसा रहता होगा पर मजाल है कि call या sms का जवाब ना आए। इसलिए मैंने लिखा-रिश्ता तो उदय ने निभाया वरना कितने हैं जो किसी sms का कभी जवाब ही नहीं देते !! यही फ़र्क़ है शायद क्योकि उदय छोटा नहीं सोचते। और इसीलिए 7 साल से देश के सबसे बड़े नेटवर्क के CEO बने हुए हैं और मुझे सच मे कोई ताज्जुब नहीं होगा अगर वो एक दिन दुनिया के सबसे बड़े TV नेटवर्क के CEO बने क्योकि मै फिर कहूँगा वो छोटी सच नहीं रखते। उनके बारे में ये भविष्यवाणी बिना ज्योतिषी हुए मैं लंबे समय से कर रहा हूँ और आज फिर कर रहा हूँ।
मेरी यादों के पिटारे मे बहुत कुछ है और अजीत,मुझे और मिलिंद खांडेकर को लेकर वो इतना ख़ास और व्यक्तिगत है कि मैं उसे साझा नहीं करना चाहता है। पर जो भी है वो बहुत सुंदर है , दिव्य है और बेहद ही खट्टा-मीठा है। बाकी तो अजीत ने लिख ही दिया है।
अजीत ने सही लिखा है कि उदय यारों के यार हैं। सैकड़ों सैकड़ों लोगों को मैं जानता हूँ जिनकी उदय ने मदद की है। जिन लोगों ने उदय को उखाड़ने की कोशिश की , उनकी भी मदद की।
Anurag Batra और उनकी मैगज़ीन Impact ने तो अभी उन्हे दशक का सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्व घोषित किया है पर सैकड़ों लोगों की ज़िंदगी में उदय कई साल से Impact बनाए हुए है।
All the best SIR !!
(लेखक ज़ी न्यूज़,स्टार न्यूज़,इंडिया टीवी,न्यूज़ एक्सप्रेस में बड़े पदों पर काम कर चुके हैं. वर्तमान में ‘मिस टनकपुर हाजिर हो’ फिल्म के माध्यम से निर्देशन में हाथ आजमा रहे हैं)
(स्रोत-एफबी)

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