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Friday, 5 December 2014

पत्रकारों के बारे में ऊलजुलूल बकने वाले बहुत मिल जाएंगे

पत्रकारों के बारे में ऊलजुलूल बकने वाले बहुत मिल जाएंगे पर आज तक किसी ने पूछा कि पत्रकारों की जिंदगी के दुख कितने हैं। एकाध दलाल पत्रकारों को छोड़ दें तो बाकी के पत्रकार वैसे ही सरल और सीधे मिलेंगे जैसे कि कोई भी आम शहरी। उनसे हर जोखिम वाला काम कराया जाता है और चौबीसों घंटे कोल्हू के बैल की तरह जोता जाता है। पर न तो फेसबुक पर न ही किसी तथाकथित पत्रकार हितैषी वेबसाइट ने कभी भी पत्रकारों के दुख को जाहिर किया। पत्रकार ऑन ड्यूटी मर जाता है पर उसका मीडिया हाउस चुप साध लेता है। स्टाफर को तो फिर भी याद कर लिया जाता है पर अंशकालिक संवाददाताओं या स्ट्रिंगरों के बारे में कोई कुछ नहीं बोलता। स्वतंत्र पत्रकार को तो पारिश्रमिक तक नहीं मिलता। पर बेचारे शर्म के कारण मुंह तक नहीं खोल पाते। क्या कहें कि हम फ्री में झख मराते रहे। एक न्यूज चैनल है न्यूज एक्सप्रेस, बड़े-बड़े नामी-गिरामी पत्रकार सुना है वहां लाखों रुपये महीने पर काम करते हैं और करते थे। पर क्या यह आश्चर्यजनक नहीं कि वहां पर डिबेट में बुलाए जाने वाले पत्रकारों को धेला नहीं दिया गया। खुद मुझे ही वहां के गेस्ट कोआर्डिनेटर ने सैकड़ों दफे बुलवाया इस भरोसे के साथ कि पारिश्रमिक मिलेगा पर एक साल से कुछ नहीं मिला। तीन-तीन सीईओ और एडिटर इन चीफ बदल गए पर मिला कुछ नहीं अलबत्ता आश्वासन जरूर मिले। और तो और पी-7 और जी बिजनेस से भी कुछ नहीं मिला। पैसा मांगो तो गेस्ट कोआर्डिनेटर फोन काट देता है। क्या स्वतंत्र पत्रकारों की दिल्ली में कोई सुनवाई नहीं होती। न्यूज नेशन, इंडिया न्यूज ने भी पारिश्रमिक नहीं भेजा। अब तो मैने हिसाब रखना ही बंद कर दिया है। सिर्फ एनडीटीवी, आजतक, आईबीएन-7, लोकसभा, राज्यसभा टीवी, ईटीवी, लाइव इंडिया तथा टोटल व श्री न्यूज के सिवाय बाकी से तो धेला नहीं मिला। अकेले न्यूज एक्सप्रेस में लगभग ढाई सौ घंटे के प्रोग्राम दे चुका हूं और उनके दो हजार रुपये घंटे के हिसाब से पांच लाख रुपये का पारिश्रमिक बनता है लेकिन मिला बाबा जी का ठुल्लू। ऐसा ही हाल कुछ अखबारों का है। सवाल यह उठता है कि संपादक अगर अपने गेस्ट को पैसा नहीं दिला पाता तो वह संपादकी छोड़कर कुछ और सम्मानजनक धंधा कर ले। मैं जनसत्ता और अमर उजाला में संपादक रहा और कहीं भी कोई फ्री लांस या स्ट्रिंगर ऐसा नहीं था जिसे मैने पारिश्रमिक नहीं दिलाया हो।


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