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फारवार्ड प्रेस पत्रिका को शीघ्र ही बंद किया जाना चाहिए।

फारवार्ड प्रेस पत्रिका को शीघ्र ही बंद किया जाना चाहिए। भारत में ये लोग दलित विमर्श के आवरण में इसाई मिशनरी के लिए काम कर रहे हैं। आप इस पत्रिका के प्रधान सम्पादक आयवन कोस्का या उसकी बीवी सिल्वा के बारे में जानिये। हिन्दू विरोधी गतिविधियों में शामिल ये लोग विदेशी पैसे पर भारत में इसाइयत को बढ़ावा दे रहे हैं, न कि ये पत्रकारिता कर रहे हैं। फारवार्ड प्रेस के अगस्त २०११ के अपने अंक में एक इसाई मिशनरी से जुड़े एक नाम को भारत का जनक भी बता चुकी है ये पत्रिका। आज अगर ये दलित विमर्श के नाम पर हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान कर रहे हैं तो इसका एक मात्र उद्देश्य बाहरी विवाद खड़ाकर हिन्दू धर्म के खिलाफ हवा बनाई जाय और फिर धर्म-परिवर्तन को अंजाम दिया जाय। कांग्रेस के दौर में इन्हें दिल्ली के पॉश इलाके में जगह भी मिल जाती है और बिना अठन्नी विज्ञापन के ये पत्रिका भी चलती है। वैसे भी इसाइयत को लेकर सोनिया गांधी को भी संदेह से परे नही रखा जा सकता है। लिहाजा मामला दस जनपथ तक हो सकता है। इस पत्रिका में जुड़ा एक एक नाम की पड़ताल करिए तो कहीं न कहीं से इसाइयत के तारतम्य जुड़ते नजर आयेंगे। चाहें वो कोस्का हो या सिल्वा अथवा विशाल मंगलवादी हो। भाई! इमोशनल न होइए यहाँ पत्रकारिता सेफ है, पत्रकारिता को कुछ नही हुआ है। पत्रकारिता के नाम पर गलत विमर्श खड़ाकर सौदेबाजी करने का मामला है। पत्रिका से सम्बंधित लोगों की गिरफ्तारी जायज है। सोचना ये है कि ये काम कांग्रेस क्यों नही कर पाती और ये सारे फंडखोर देशद्रोही उसी के राज में महफूज क्यों होते हैं ?


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