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बड़ी कंपनियों से वसूली के आरोप में गिरफ्तार हुए संपादक और उप संपादक

समाचार4मीडिया ब्यूरो
चीन में ऐसे पत्रकारों का भांडाफोड़ हुआ है, जो कंपनियों को डरा धमकाकर वसूली का काम करते हैं। खबरों के मुताबिक वसूली करने वाले आठ पत्रकारों को शंघाई पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। हिरासत में लिए गए पत्रकारों में मशहूर अखबार बिजनेस हेरॉल्ड की वेबसाइट के संपादक और उपसंपादक भी शामिल हैं।
चीनी पुलिस इसे जबरन वसूली का बड़ा रैकेट बता रही है। शिन्हुआ समाचार एजेंसी के मुताबिक हिरासत में लिए गए पत्रकारों में ‘ट्वेंटिफर्स्ट सेंचुरी बिजनेस हेरॉल्ड’ वेबसाइट के संपादक और उप संपादक भी शामिल हैं। यह वेबसाइट नानफांग मीडिया ग्रुप चलाता है। इस ग्रुप को गुआनडोंग प्रांत की सरकार ही चलाती है।  कारोबार जगत से जुड़ी खबरों को जनता तक पहुंचाने के लिए ही सरकार ने  इस अखबार को 2001 में शुरू किया था। बताया जा रहा है कि हिरासत में लिए जाने वालों में शंघाई की एक पब्लिक रिलेशन कंपनी, शेन्जेन और सिन्हुआ समाचार एजेंसी के कर्मचारी भी शामिल हैं। 
पुलिस के मुताबिक पिछले साल नवंबर के बाद दर्जनों कंपनियों जबरन पैसे वसूली का आरोप लगया है पुलिस ने कहा वेबसाइट के कर्मचारी बड़ी कंपनियों से पैसा वसूला करते थे पैसा देने वाली कंपनियों के बारे में अच्छी खबरें छापी जाती थीं और न देने वालों के खिलाफ नकारात्मक रिपोर्टिंग की जाती थी संदिग्धों पर यह भी आरोप है कि वे विज्ञापन पाने और कॉरपोरेशन एंग्रीमेंट करने के लिए भारी दबाव डालते थे इनके बदले भी भारी रकम मांगते थे।
गौरतलब है कि चीन में मीडिया की छवि बहुत अच्छी नहीं है मीडिया संस्थानों पर रिपोर्ट छापने या न छापने के लिए पैसा वसूलने के आरोप पहले से ही लगते रहे हैं इस साल सरकार ने इस पर काबू करने का एलान किया जुलाई में प्रशासन ने चीन की सरकारी प्रसारण सेवा चाइना सेंट्रल टेलिविजन के मशहूर एंकरों को हिरासत में लिया उन पर कवरेज का समय बढ़ाने के लिए पैसा लेने के आरोप लगे
हाल ही में अलीबाबा नामकी इंटरनेट शॉपिंग कंपनी ने भी आईटी टाइम्स पत्रिका पर बदनाम करने के लिए खराब रिपोर्ट छापने का आरोप लगाया। अलीबाबा के मुताबिक पैसा देने से इनकार करने पर कंपनी के खिलाफ खराब रिपोर्ट छापी गईं। इस बीच जांच कर रही पुलिस ने अखबारों, टीवी चैनलों और पत्रिकाओं के अहम रिकॉर्ड जमा कर लिए हैं। शंघाई की दो जनसंपर्क कंपनियां भी जांच के दायरे में हैं।
मीडिया संस्थानों का गैरकानूनी हथकंडे अपनाना नई बात नहीं। दो साल पहले भारत में भी कारोबारी सांसद ने एक निजी टीवी चैनल के संपादक पर वसूली के आरोप लगाए थे। ब्रिटेन में भी पुलिस को रिश्वत देकर एक अखबार ने मशहूर लोगों के फोन हैक किए।
Sabhar- samachar4media.com

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