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Monday, 18 August 2014

तड़पकर मर गए पत्रकार शिवशंकर, देखने तक नहीं गया 'हिन्दुस्तान' प्रबंधन का कोई अधिकारी

Vinayak Vijeta : दिल्ली में आज दम तोड़ दिया बिहार के गया जिले के पत्रकार शिवशंकर ने... भले ही मशहूर अखबारों में काम करने से कोई पत्रकार अपने को गौरवान्वित महसूस करे पर अखबार में काम करने के वक्त उनके साथ होने वाली परेशानी में कोई अखबार मालिक खड़ा नहीं होता। इन पत्रकारों को असहाय छोड़ कर उन्हें कुत्ते की मौत मरने दिया जाता है। इसके उदाहरण हैं गया के सीनियर रिपोर्टर शिवशंकर, जिन्होंने आज दिल्ली के एक अस्पताल में अपनी एड़ियां रगड़-रगड़ अपनी मौत को स्वीकार कर लिया।
शिवशंकरशिवशंकर
शिवशंकर अल्प दिनों के लिए हिन्दुस्तान अखबार के गया जिले के प्रभारी थे और वह अभी वहां वरीय संवाददाता के पद पर अपराध और अन्य विभाग की खबरों को देख रहे थे। किसी भी व्यसन से दूर  रहने वाले शिवशंकर की बीते दिनों तबीयत खराब हो गई। उन्हें पहले पटना और बाद में दिल्ली ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। शिवशंकर हिन्दी दैनिक हिन्दुस्तान को कई सालों से सेवा देते आ रहे हैं पर गंभीर स्थिति में उनके दिल्ली के अस्पताल में दाखिले की खबर के बाबजूद हिन्दुस्तान प्रबंधन द्वारा किसी तरह की आर्थिक मदद की बात तो दूर, कोई उन्हें देखने तक नहीं गया। आज भाई शिवशंकर की तड़प-तड़प कर मौत हो गई। यही है हम पत्रकारों के जीवन की वह तल्ख सच्चाई जहां हम जीते हैं दूसरों के लिए पर वक्त आने पर कोई हमारे साथ नहीं होता। भाई शिवशंकर अब कभी मानव जीवन में जन्म नहीं लेना, लेना भी तो भूलकर पत्रकार नहीं बनना! आपको मेरी श्रद्धाजंलि! अफसोस की आपके जीते जी कभी आपसे सशरीर मुलाकात नहीं हुई फोन पर जब भी बाते हुर्इं आपने सर कहकर पुकारा और मेरे द्वारा मांगी गई हर सूचना को आपने मुझे अपना बड़ा भाई समझ उपलब्ध कराया।
पटना के पत्रकार विनायक विजेता के फेसबुक वॉल से.

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