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स्टिंग ऑपरेशन’ कर आजतक ने यूपी सरकार की उड़ाई नींद


उत्तर प्रदेश लोकसेवा आयोग (यूपी पीसीएस) में राज्‍य सेवा के लिए होने वाली भर्ती परीक्षाओं में जमकर धांधली होने की खबर सामने आई है। यह खुलासा टीवी न्‍यूज चैनल ‘आजतक’ द्वारा किए गए एक स्टिंग ‘ऑपरेशन सरकार’ में किया गया है।
आजतक ने अपने स्टिंग ऑपरेशन में दावा किया है कि यूपी पीएससी में एक जाति विशेष के अभ्‍यर्थियों को इंटरव्यू और लिखित परीक्षा में दिल खोलकर नंबर दिए गए और उन्‍हें पास किया गया है।
उल्‍लेखनीय है कि यूपी में समाजवादी पार्टी की सरकार है और पीसीएस की मेरिट लिस्‍ट में भी यादव उपनाम के अभ्‍यर्थियों को वरीयता दी गई है। वहीं सामान्‍य जाति के अ‍भ्‍यर्थियों को लिस्‍ट में काफी नीचे रखा गया है।
आजतक ने स्टिंग के जरिए बताया कि सबसे ज्यादा बुरी स्थिति अनुसूचित जाति (एससी) के अभ्‍यर्थियों की रही, जिनमें बहुत से उम्मीदवार 100 का आंकड़ा भी नहीं छू पाए। न्‍यूज चैनल ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि साल 2011 की यूपी पीसीएस परीक्षा का इंटरव्यू पिछले साल संपन्न हुआ, जिसमें यादव उम्मीदवारों को सबसे ज्यादा अंक मिले।
पीसीएस का रिजल्‍ट काफी हैरानी भरा रहा क्योंकि इसमे पिछड़े वर्ग के 86 उम्मीदवारों को चुना गया, जिसमें से 50 यादव थे। इस घोटाले में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में हिंदी के विभागाध्यक्ष मुश्ताक अली का नाम भी लिया जा रहा है, जिन्‍हें यूपी लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं का इंटरव्यू लिया था। मुश्ताक ने चैनल के खुफिया कैमरे पर कबूल किया कि भले ही सरकार इंटरव्यू बोर्ड को जितना भी गोपनीय रखे, फिर भी कहीं ना कहीं सिफारिश अपना काम कर जाती है।
वहीं यूपी पीसीएस के सचिव अनिल कुमार यादव ने चैनल से कहा कि आयोग की कार्य प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी है। उम्मीदवारों को योग्यता के हिसाब से अंक मिले हैं। इसे जाति या धर्म के चश्मे से देखना गलत है। वैसे भी चयन प्रक्रिया में आयोग के अध्यक्ष या सचिव का कोई दखल नहीं होता। इंटरव्यू बोर्ड को तो छात्र का रोल नंबर भी मालूम नहीं होता। रही बात स्केलिंग की तो उसका फॉर्मूला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बना है। इसमें तो डाटा फीड करने पर अंक अपने आप आ जाते हैं। इस तरह के आरोपों का तो कोई आधार ही नहीं है।

Sabhar- samachar4media.com

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