Top Ad 728x90

  • Sakshatkar.com - Sakshatkar.org तक अगर Film TV or Media की कोई सूचना, जानकारी पहुंचाना चाहते हैं तो आपका स्वागत है. आप मेल के जरिए कोई जानकारी भेजने के लिए mediapr75@gmail.com का सहारा ले सकते हैं.

Thursday, 2 January 2014

जो ईमानदारी के साथ है वह सब आम आदमी है,


अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी की परिभाषा देते हुए कहा कि जो ईमानदारी के साथ है वह सब आम आदमी है, चाहे वह झुग्गी में रहता हो या ग्रेटर कैलाश में.

सर जी, टाटा-बिरला-अम्बानी सहित सारे कारपोरेट और उनके लाबी संगठन-फिक्की/सी.आई.आई/एसोचैम ईमानदारी की कसमें खाते हैं. अपने सम्मेलनों में भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रस्ताव पारित करते हैं. लेकिन आप की नई परिभाषा के मुताबिक, वे सब कहीं आम आदमी तो नहीं हो गए? नहीं, सिर्फ पूछ रहा हूँ? आखिर वे सब आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर रहे हैं.

लेकिन एक बात पूछूं, क्या बेईमान सिर्फ घूस मांगनेवाला ही है या घूस देनेवाले की भी कुछ जिम्मेदारी है? क्या घूसखोरी के दो पक्ष नहीं हैं- एक मांग पक्ष और दूसरा आपूर्ति पक्ष?

सर जी, सच यह है कि कार्पोरेट्स इस देश में भ्रष्टाचार के मुख्य स्रोत हैं. वे अपने मुनाफे की भूख में सही-गलत काम के लिए नेताओं/अफसरों को पैसा खिलाते हैं. दबव बनाते हैं. अपनी मर्जी के अफसर और मंत्री बनवाते हैं. फिर अपने मुताबिक, नीतियों और फैसलों को बदलवाते हैं.

क्या यह सही नहीं है कि सिर्फ प्रत्यक्ष घूस लेना-देना ही भ्रष्टाचार नहीं है बल्कि अमीरों/कार्पोरेट्स के हित में नीतियों को बनाना कहीं बड़ा भ्रष्टाचार है? आखिर हर साल बजट में कार्पोरेट्स/अमीरों को साढ़े पांच लाख करोड़ रूपये की टैक्स छूट/रियायतें भ्रष्टाचार क्यों नहीं है? रिलायंस को के.जी बेसिन की गैस की कीमतों में दोगुने की बढ़ोत्तरी की इजाजत भ्रष्टाचार क्यों नहीं है? और उदाहरण दूँ?

फिर ये आम आदमी कैसे हो गए सर जी? जी, बस जी घबरा रहा था, इसलिए पूछ लिया

0 comments:

Post a Comment

Top Ad 728x90