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Saturday, 11 January 2014

फिल्म रिव्यू : डेड़ इश्किया


        फिल्म रिव्यू डेड़ इश्किया
**** चार स्टार
इश्किया के बाद अभिषेक चौबे से उम्मीदें बनना तो लाजमी था ही लेकिन इस बार अभिषेक ने डेड़ नही बल्कि उससे कई गुना ज्यादा अच्छी फिल्म दी है। डेड़ इश्किया एक ऐसा सिनेमा है जो जितना क्लासिक है उतना ही मनोरंजक भी और यही वजह है कि इसका टारगेट ऑडियंस सिर्फ एक तरह का दर्शक नहीं है।
   पूरी फिल्म एक गजल की तरह लगती है जो अपने हर शेर से मजा दूगुना करती रहती है हांलाकि फिल्म का दूसरा हिस्सा पहले के मुकाबले थोड़ा कमजोर है लेकिन आज के दौर में जहाँ स्टारडम और सौ दौ-सौ करोड़ के क्लब में शामिल हो जाने वाली फिल्में बनती हों वहाँ एक अलग और ईमानदार फिल्म का ये पांइट इग्नोर किया जा सकता है। फिल्म के दूसरे हिस्से में फिल्म का जौनर भले ही थोड़ा बदल जाता हो लेकिन फिल्म अपनी पकड़ दर्शकों पर बनाए रखती है।

  फिल्म की कहानी खालू (नसीरउद्दीन शाह ) और बब्बन ( अरशद वारसी) के इर्द गिर्द घूमती है जो अपनी चोरियों और भागने के सिलसिले को लेकर मेहमूदाबाद पहुँचते हैं जहाँ उनकी मुलाकाल बेगम पारा ( माधुरी दीक्षित) और मुनिया (हूमा कुरैशी) से होती है बाकी की कहानी मोहब्बत, धोखे, अपहरण और छल से होते हुए अपने अंजाम तक पहुँचती है।
माधुरी दीक्षित की कमबैक फिल्म होने के कारण माधुरी इसकी यू एस पी रही हैं और वाकई जब जब माधुरी पर्दे पर आई हैं तब तब उन्होनें अपनी ऐक्टिंग से सीन को और भी जानदार बना दिया है।
फिल्म में शायरी, संगीत एक्शन, छल का बेहतरीन कॉक्टेल है जिसका हेंगऑवर काफी समय तक रहता है। बशीर बद्र और गुलजार की शायरी इसकी रूमानियत और भी बढ़ा देती है।

अभिषेक चौबे ओमकारा और कमीने जैसी फिल्मों के राईटर रह चुके हैं और मकबूल जैसी फिल्मों में विशाल भारद्वाज को असिस्ट कर चुके है यही कारण है कि उनकी फिल्मों में विशाल की फिल्मो के फ्लेवर की खुशबू आती है। विशाल भारद्वाज का संगीत और गुलजार की शायरी  फिल्म के फ्लेवर के अनुसार कहानी की डेप्त को और भी बढ़ाते हैं।
फिल्म उत्तर प्रदेश के मेहमूदाबाद में शूट की गई है और यही वजह है कि फिल्म में दिखाई गई लोकेशन्स और कहानी की मांग लिए बिल्कुल सटीक साबित होती है।
फिल्म की सिनेमाटोग्राफी को भी खूबसूरती से किया गया है....हिंदी सिनेमा में ज्यादातर फिल्म तेज लाईट में शूट की जाती हैं लेकिन इसकी मद्दम रोशनी,फिल्म की चमक को और भी बढ़ा देती है....

बेगम पारा के रूप में माधुरी और मुनिया के रुप में हूमा की ऐक्टिंग बेहद सराहनीय है, वही बब्बन के किरदार में अरशद ने जान फूंकने वाला अभिनय किया है,नसीर ने भी अपना काम बखूबी निभाया। फिल्म में मोहब्बत के सभी पड़ावों को बेहद खूबसूरती व सलीके के फिल्माया गया है जिसका सफर दिलकशी से जुनून तक यादगार रहता है।
इंटेलीजेंस ऐन्टरटेनमेंट की एक बेहतरीन मिसाल के तौर पर डेड़ इश्किया को देख जा सकता है। अगर मसालेदार फिल्मों से हटकर एक क्लासिक और मनोरंजक सिनेमा देखना चाहें तो डेड़ इश्किया जरूर देखें।

Sabhar-
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