पत्रकारों को भीख मांगते देख मुझे तो शर्म आने लगी

रोहतक । रोहतक के सो काल्ड पत्रकारों का शर्मनाक चेहरा एक बार फिर सामने आ गया। सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने थोड़ा सा क्या पुचकारा, बस फिर क्या था मिमयाने लगे। एक के बाद एक डिमांड सामने आने लगी। कोई प्लाटों में आरक्षण मांग रहा था तो कोई कुछ और। डिमांड अपने लिए नहीं बल्कि पूरी पत्रकार बिरादरी के नाम पर की जा रही थी। यह ड्रामा पूरे 15 मिनट तक चला। इस सारे ड्रामे का गवाह मैं खुद बना और यह सारा ड्रामा वीडियो कैमरे पर भी कैद करवाया ताकि भविष्य में कभी कोई क्रांतिकारी बनने का दम न भर सके।
 
 
मौका था रोहतक के कैनाल विश्राम गृह में प्रेस कांफ्रेंस का, लेकिन कांफ्रेंस में सीएम से सवाल कम और डिमांड ज्यादा की गई। 15 मिनट में ही कई बार भिखारी जैसी हालत कई पत्रकारों की रही। रह-रह कर फिर डिमांड रख देते। ऐसा नहीं है यह हरकत पहली बार की हो, कई बार पहले भी ऐसी ही हरकत यह सो काल्ड पत्रकार कर चुके हैं। आज तक कभी अपने मालिकान से तो कभी कुछ मांगने की हिम्मत नहीं हुई इनकी। वहां तो कभी डिमांड चार्टर किसी ने नहीं रखा पर राजा साहब जब भी प्यार से मिलते हैं तो लंबा-चैड़ा मांग पत्र रख देते हैं। 
 
हुड्डा का भी मूड आज ठीक था, सो वह भी मजाकिया अंदाज में ही जवाब देते रहे। नहीं तो मजाल है जो कोई डिमांड करे और वे सीधे-सीधे जवाब दे दें। राजा साहब आज बढ़िया मूड में थे। तभी तो वे पत्रकारों के एक भी सवाल पर नाराज नहीं हुए। चाहे वह सवाल आईएएस अशोक खेमका के बारे में ही क्यों न पूछा गया हो। 
 
हरियाणा के सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा रोहतक से हैं। ऐसे में रोहतक से उनका विशेष लगाव है। आज वे अपने हलके सांपला में थे। इसी हलके से वे एमएलए हैं। सो आज सांपला को उपमंडल बनाने की घोषणा भी कर डाली। आठ-दस शिलान्यास किए। इसलिए एकाएक ही तीन-सवा तीन बजे डीपीआरओ के जरिए रोहतक के पत्रकारों को सूचना भिजवाई गई कि सीएम साहब साढ़े तीन बजे कैनाल विश्राम गृह में रूबरू होंगे। बस फिर क्या था 15 मिनट में ही विश्राम गृह में पत्रकारों का जमघट लग गया। इंतजार राजा साहब का होने लगा। वे आए तो साथ में युवराज दीपेंद्र हुड्डा भी थे। पहले युवराज बोले और हलके में की गई घोषणाओं के लिए सीएम का धन्यवाद कर डाला। फिर पारी राजा साहब यानि सीएम की आई तो पहले घोषणाओं की जानकारी दी और फिर बोले कि पूछा आज क्या पूछना है। फिर न कहना कि कुछ मन में रह गया। सीएम का मूड कुछ सोकाल्ड पत्रकार भांप गए व देखते ही देखते प्लाटों में आरक्षण समेत कई डिमांड कर डाली और इस डिमांड चार्टर में बाकी पत्रकारों को भी लपेट लिया। एक आध ने तो दस नवंबर की गोहाना रैली की सफलता का श्रेय देते हुए गीत गाना ही शुरू कर दिया। एक बार तो हालत ऐसी हो गई कि शर्म आने लगी। कोई नहीं आज मौका नहीं मिला, फिर किसी दिन मिला तो मौके पर ही सबकी पोल खोलूंगा। आज मूड मेरा भी ठीक ही था। पर याद रखना हर दिन ठीक नहीं रहता। बहुत हो चुका अब बंद करो मांगना। जहां मांगना चाहिए, वहां मांगते नहीं और सरकार के सामने भिखमंगे बने रहते हैं। पहले अपने अंदर की गंदगी साफ करो, फिर बाकी की बात करो। अंदर गंद भरा पड़ा है और मोहल्ले की सफाई का ठेका ले रखा है।  
 
रोहतक से दीपक खोखर की रिपोर्ट. संपर्क: 09991680040
Sabhar- bhadas4media.com
पत्रकारों को भीख मांगते देख मुझे तो शर्म आने लगी पत्रकारों को भीख मांगते देख मुझे तो शर्म आने लगी Reviewed by Sushil Gangwar on December 06, 2013 Rating: 5

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