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दो दिन से तरुण को बेच रहे हैं अर्नव... पर तेजपाल जैसी पत्रकारिता कब करेंगे गोस्वामी?

Nadim S. Akhter : टाइम्स नाऊ वाले अर्नव गोस्वामी की बहस में दो दिनों से तरुण तेजपाल बिक रहे हैं...उम्मीद करता हूं कि अर्नव का चैनल बहस से इतर तरुण तेजपाल जैसी पत्रकारिता-स्टिंग को भी तवज्जो देगा, ताकि देश का कुछ भला हो सके. पके-पकाए मुद्दे को लपक कर बहस करना आसान है, खोजी-स्टिंग पत्रकारिता करना मुश्किल. खास कर वो पत्रकारिता जो सरकार हिलाकर रख दे. टीवी के स्टूडियो से बाहर निकलिए और खबर ढूंढकर दिखाइए. फिर उस खबर को सामने लाने का माद्दा भी दिखाइए. तरुण तेजपाल पत्रकारिता में उत्थान से पतन की एक गाथा बन चुके हैं. कम से कम आप उनके उत्थान गाथा को ही अपना लें. भगवान राम ने भी मरने से पहले रावण के पास लक्ष्मण को भेजा था, ज्ञान लेने. यह जानते हुए कि रावण का पाप क्या था.
Nadim S. Akhter : हर चीज में भेड़चाल है. बड़ाई करने में भी और बुराई करने में भी. तरुण तेजपाल ने संगीन अपराध किया है, इसमें कोई दो राय नहीं लेकिन फेसबुक पर भाईलोग उसे ऐसे गरिया रहे हैं, जैसे वे एकदम दूध के धुले हैं. एकदम पाकसाफ. ठीक है कि आपने किसी का यौनशोषण नहीं किया होगा लेकिन जब नैतिकता की बात करते हैं तो उसकी परिभाषा व्यापक हो जाती है. हो सकता है आपने किसी की छुट्टी चुराई हो, किसी का पैसा मारा हो, किसी की मेहनत लूट ली हो, किसी का नाम खराब किया हो, किसी का दिल दुखाया हो या फिर किसी की मदद नहीं की हो. और ये सब अजनाने में नहीं, जानबूझकर किया हो. तो तरुण तेजपाल को गरियाने से पहले जरा अपने अंदर भी झांकिएगा. और मधुर भंडारकर की फिल्म -पेज 3- भी देख लीजिएगा. मीडिया में अंदर की दुनिया उतनी भी साफ-सुथरी नहीं है, जितना हल्ला मचा के आप लोग बता रहे हैं और जैसे तरुण तेजपाल ने अचानक इस तालाब को गंदा कर दिया हो. इससे पहले जैसे यह गंगा जैसी पवित्र थी, जो कलकल बहती थी (अब तो गंगा में भी भयानक प्रदूषण है).

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा ना मिलया कोय,
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा ना कोय.
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Nadim S. Akhter : अपराधी को सजा मिलनी ही चाहिए फिर चाहे वह पत्रकार हो, सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज साहब हों, उत्तरांचल के आला अफसर हों या फिर राजनेता. कोई नहीं बच सकता. यौन शोषण करने वाला ही अपराधी नहीं है, अगर आपकी आंखों के सामने किसी के साथ गलत हुआ और आप खामोश रहे, तो आप भी अपराधी हैं. नैतिक रूप से. इसलिए नैतिकता की बात करने से पहले जरा अपने अंदर झांक लीजिए.
तेजतर्रार पत्रकार नदीम एस. अख्तर के फेसबुक वॉल से.

साक्षात्कार डाट काम

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