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Thursday, 7 November 2013

बच्चों काे पसंद आएगी ‘कृष 3’-राकेश रोशन



-अजय ब्रह्मात्मज
- ‘कृष 3’ आने में थोड़ी ज्यादा देर हो गई? क्या वजह रही?
0 ‘कृष 3’ की स्क्रिप्ट बहुत पहले लिखी जा चुकी थी। मैं खुश नहीं था। उसे ड्रॉप करने के बाद नई स्क्रिप्ट शुरू हुई। उसका भी 70 प्रतिशत काम हो गया तो वह भी नहीं जंचा। ऐसा लग रहा था कि हम जबरदस्ती कोई कहानी बुन रहे हैं। बहाव नहीं आ रहा था। भारत के सुपरहीरो फिल्म में गानों की गुंजाइश रहनी चाहिए। इमोशन और फैमिली ड्रामा भी पिरोना चाहिए। मुझे पहले फैमिली और बच्चों को पसंद आने लायक कहानी चुननी थी। उसके बाद ही सुपरहीरो और सुपरविलेन लाना था। फिर लगा कि चार साल हो गए। अब तो ‘कृष 3’ नहीं बन पाएगी। आखिरकार तीन महीने में कहानी लिखी गई, जो पसंद आई। 2010 के मध्य से 2011 के दिसंबर तक हमने प्री-प्रोडक्शन किया।
- प्री-प्रोडक्शन में इतना वक्त देना जरूरी था क्या?
0 उसके बगैर फिल्म बन ही नहीं सकती थी। हम ने सब कुछ पहले सोच-विचार कर फायनल कर लिया। पूरी फिल्म को रफ एनीमेशन में तैयार करवाया। कह लें कि एनीमेटेड स्टोरी बोर्ड तैयार हुआ। अपने बजट में रखने के लिए  सब कुछ परफेक्ट करना जरूरी था। मेरे पास हालीवुड की तरह 300 मिलियन डॉलर तो है नहीं। स्ट्रांग कहानी और कंटेंट को फिल्माने के लिए सही स्ट्रक्चर जरूरी था। कृष इस फिल्म में मनुष्यों से नहीं लड़ता। उसकी लड़ाई मानवरों (म्यूटैंट््स) से होती है। वे मानवर तैयार करने पड़े। इतनी तैयारियों मे बाद भी मैं डरा हुआ था। रितिक से भी मैंने कहा कि इसे बंद करते हैं। उसने मुझे प्रेरित किया। जब विवेक का मैंने पहला शॉट ले लिया तो कंफीडेंस आया। 6 महीने में शूटिंग खत्म कर वीएफएक्स के पास भेज दिया गया।
- पोस्ट-प्रोडक्शन भी तो टफ रहा होगा? वीएफएक्स का इतना काम है?
0 शूटिंग खत्म होने के बाद मुझे पोस्ट प्रोडक्शन में लगना पड़ा। स्टूडियो में जाकर वीएफएक्स टीम के साथ बैठना पड़ा। सात-आठ करेक्शन के बाद अपनी कल्पना पर्दे पर उतरती थी। कल्पना को कम्युनिकेट करना मुश्किल काम होता है। मैंने फैसला लिया था कि विदेश नहीं जाऊंगा। मेरी राय में अपने देश के टेक्नीशियन काबिल हैं। हालीवुड की फिल्मों का वीएफएक्स काम भी भारत में होता है। हमारी समस्या है कि हम अपने टेक्नीशियन पर भरोसा नहीं करते और पर्याप्त समय नहीं देते। काम थोपने की हमारी चाहत और आदत भी बन गई है।
- ‘कृष 3’ जैसी फिल्म के लिए तकनीकी और साइंटिफिक जानकारी भी जरूरत पड़ी होगी?
0 टेकनीक और साइंस से ज्यादा कॉमन सेंस की जरूरत पड़ती है। बस थोड़ा सा दिमाग लगाना पड़ता है। ज्यादातर लोग वही बनाते और दिखाते हैं,जो वे देख चुके हैं। उसमें नवीनता नहीं रहती।
- आप पर भी तो 100 करोड़ क्लब का दबाव होगा? इस ट्रेंड के बारे में क्या कहेंगे्र
0 यह अच्छा नहीं है। 100 करोड़ तो बी क्लास फिल्मों का टारगेट है। भारत जैसे देश में ए क्लास फिल्म को ढाई सौ करोड़ का कारोबार करना चाहिए। इतने थिएटर और दर्शक हैं। ‘3 इडियट’ ने कम थिएटर के जमाने में उतना बिजनेस किया। वह ए क्लास फिल्म थी। मैं किसी दबाव में नहीं हूं। अभी एक दिन का अच्छा बिजनेस हो तो 40 करोड़ कलेक्ट हो सकता है। मैं तो आश्वस्त हूं। यूट््यूब पर ट्रेलर देखने वालों की संख्या को संकेत मानें तो पूरी उम्मीद बनी है।
- फिल्म के किरदारों के बारे में कुछ बताएं?
0 रोहित और कृष के बीच काफी सीन है। बाप-बेटे की कहानी चलेगी। कृष कहीं टिक कर नौकरी नहीं कर पाता। जब भी उसे कहीं से आवाज आती है तो वह बचाने निकल पड़ता है। बीवी भी उससे नाराज रहती है। वास्तव में यह एक परिवार की कहानी है। इस परिवार में सुपरविलेन आता है। उसके बाद कहानी खुलती जाती है।
- सुपरविलेन के लिए विवेक ओबेराय को कैसे राजी किया?
0 वह रोल इतना अच्छा है कि रितिक खुद करना चाहता था। मैंने उसे डांटा कि रोहित, कृष्ण और सुपरविलेन तीनों तुम ही करोगे तो मैं शूटिंग कितने दिनों में करूंगा? स्क्रिप्ट लिखे जाने के बाद विवेक ओबेराय और कंगना रनोट ही हमारे दिमाग में थे। विवेक बहुत अच्छे एक्टर हैं। उन्हें सही पिक्चर नहीं मिल रही है। वे कैरेक्टर रोल में जंचते हैं। कंगना रनोट में खास स्टायल है। वह रूप बदलने में माहिर है।
- रितिक के बारे में क्या कहेंगे?
0 वह मेरा बेटा जरूर है, लेकिन बहुत ही पावरफुल एक्टर है। वह हर रोल में जंच जाता है। ‘गुजारिश’ का बीमार लगता है तो ‘कृष 3’ का हीरो भी लगता है। ‘कोई ़ ़ ़ मिल गया’ में बच्चे के रूप में भी जंचा था। ‘जोधा अकबर’ में वह बादशाह भी लगा। इतनी वैरायटी उसके समकालीनों में किसी और में नहीं दिखती। ‘कृष 3’ में बाप-बेटे का सीन देखिएगा। आप चकित रह जाएंगे।
sabhar Chavannichap.blogspot.com

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