ये संदेश भेजा है... '''यशवंत भाई


किसी साथी ने मुझे ये संदेश भेजा है... '''यशवंत भाई ..कनाट प्लेस में कस्तूरबा गाँधी मार्ग पे हिन्दुस्तान टाइम्स के ऑफिस बिल्डिंग ठीक सामने एक बुजुर्ग इन्सान एक टेंट लगा के बैठे रहते है , पिछले छे साल से मै देख रहा हू , उनके टेंट पे लगे बैनर से पता चलता है की सन 2004 से हिंदुस्तान टाइम्स के खिलाफ धरने पे बैठे है। लेकिन 2004 से 2013 तक का समय लगभग 9 साल का हो गया .. लेकिन कभी किसी पोर्टल या सोशल मीडिया या कही भी उनके इस अनशन का जिक्र नहीं मिला .. माजरा क्या है शायद आप को पता हो !!''

Vivek जी कल जाइए और इनसे मिलिए, विस्तार से बात करिए, एक रिपोर्ट बनाइए और भड़ास को भेजिए... आपकी ट्रेनिंग का पार्ट है यह...

कोई अन्य साथी भी जाना चाहे तो जरूर जाए.. क्योंकि पत्रकारिता करने या सरोकारी होने के लिए कोई ट्रेनिंग नहीं, ये आपके दिल-दिमाग के जुनून और साहस पर निर्भर करता है, वरना लोग डिग्री डिप्लोमा लेने के बावजूद न शुद्ध लिख पाते हैं और न अपनी पहल पर एक अच्छी रिपोर्ट लिख पाते हैं... और, ढेर सारे लोग डिग्री डिप्लोमा लेकर टीआरपी की अंधी दौड़ में या मालिक के हिसाब से खबर लिखने में जिंदगी गुजार देते हैं और आखिर में उन्हें पता चलता है कि उन्होंने पत्रकारिता नहीं बल्कि परिवार व खुद को पालने के लिए पेटकारिता की है...

इसलिए ऐसे मसले, मुद्दे जहां दिखें, वहीं बैठ जाओ, जूझ जाओ, पूछो, जानो और लिखो... शेयर करो, भेजो, मेल करो, फारवर्ड करो... यही फंडा है पत्रकारिता का....
Yashwant Singh Facebook wall . 
ये संदेश भेजा है... '''यशवंत भाई ये संदेश भेजा है... '''यशवंत भाई Reviewed by Sushil Gangwar on October 19, 2013 Rating: 5

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