आनलाइन माध्यम से हिंदी पट्टी के पत्रकार कमा सकते हैं ठीकठाक रकम, क्यों न एक वर्कशाप करें?

Yashwant Singh :  जब मैं भड़ास4मीडिया वेबसाइट शुरू कर रहा था तो मुझे इस बात का मलाल था कि मेरी फितरत, मेरी हरकतों, मेरी अराजकताओं, मेरी प्रवृत्तियों, मेरे सोचने-जीने के तौर-तरीकों को बेहद ना-पसंद करने वाले हिंदी पट्टी के लालाओं और इनके डरपोक किस्म के चमचे संपादकों ने मेरे लिए हिंदी अखबारों में कोई जगह न होने की अघोषित घोषणा कर दी थी और इसको लेकर आपस में अंदरखाने एकजुटता, एकगुटता भी बना ली थी. डरपोक व चमचा संपादक कभी किसी बहादुर व सरोकारी पत्रकार को बर्दाश्त नहीं कर सकता, क्योंकि उसे डर लगा रहता है कि पता नहीं कब यह सवाल खड़ा करने लगे, बहस करने लगे, अच्छा-बुरा समझाने लगे और क्या करें क्या ना करें की बात बताने लगे... 
 
हम हिंदी पट्टी वाले नौकरी जाने के बाद अचानक खुद को बेहद पस्त, दयनीय, शोकग्रस्त पाते हैं क्योंकि हम लोगों को जन्म से ही नौकरी करने के लिए जीना सिखाया गया... और नौकर न बन पाने की स्थिति में सबसे नाकारा घोषित किया गया.. खासकर सवर्ण घरों के युवाओं की स्थिति ज्यादा दुखद होती है क्योंकि उन्हें स्व-रोजगार करना किसी घटिया काम करने जैसा लगता है और नौकरी पाना-करना इनमें से ज्यादातर के वश की बात होती नहीं. पर थोड़े समझदार युवा जब नौकरी में जाते हैं और किन्हीं कारणों से छंटनी के शिकार या पैदल हो जाते हैं तो इनके आंख के आगे अंधेरा छाने लगता है... कि अब क्या करें... 
 
सीएनएन-आईबीएन व आईबीएन7 में सैकड़ों पत्रकारों की छंटनी के बाद अब दैनिक भास्कर दिल्ली आफिस से खबर है कि सैकड़ों लोगों को कार्यमुक्त करने की तैयारी है.. कइयों को लेटर थमा दिया गया है... भास्कर के दिल्ली एडिशन को मैनेजमेंट बंद कर रहा है.. मतलब ये कि सैकड़ों की संख्या में पत्रकार बेरोजगार होंगे और इन्हें खुद को नौकरी पाने के लिए यहां वहां जूझना घूमना पड़ेगा... जो पहले से ही सैकड़ों बेरोजगार हैं, उनके साथ नौकरी पाने के लिए होड़ में जुटना पड़ेगा... लेकिन मेरा सवाल इन बेरोजगारों से ये है कि इनमें से कितने लोग हैं जो अब अपना खुद का काम करना चाहते हैं और उस काम से उतना ही कमा लेना चाहते हैं जितना वह नौकर बनकर (कारपोरेट मीडिया घरानों में पत्रकार की नौकरी करना किसी नौकर जैसा ही होना है, जो अपने विवेक से नहीं बल्कि मालिक के आदेश इशारों व रहमोकरम पर निर्भर करता जीता है) कमा पाता है? 
 
मैं बहुत दिनों से सोच रहा हूं कि हिंदी पट्टी के युवाओं, खासकर मीडिया वालों को यह बताया जाए कि इस दौर में जब आनलाइन माध्यम तेजी से विकसित हो रहे हैं, मार्केट का खास तवज्जो इस ओर है तो वे कैसे यहां खुद की दुकान सजा सकते हैं, खुद का बिजनेस माडल डेवलप कर सकते हैं, खुद के परिश्रम से कमा सकते हैं? इसको लेकर एक वर्कशाप करने की योजना मेरे दिमाग में है. वर्कशाप में कंटेंट पर कम (क्योंकि पत्रकार की कंटेंट पर पकड़ पहले से ही होती है), बिजनेस जनरेट करने पर ज्यादा जोर रहेगा. इसके लिए कुछ एक्सपर्ट को भी बुलाया जाएगा... कैसे वेबसाइट बनाएं, कैसे गूगल एडसेंस को एक्टिविट कर पैसे पाएं, किन किन फील्ड में आनलाइन काम कर लाखों कमाएं... इन विषयों पर वर्कशाप की जरूरत है क्योंकि एक अकेला बेरोजगार पत्रकार अपनी तात्कालिक त्रासदी से उबर नहीं पाता तो भला इन विषयों पर क्या सोच पाएगा, क्या विचार कर पाएगा.. आप लोग सोचें और बताएं कि क्या वर्कशाप की दिशा में बढ़ा जाए या फिर साथियों की बलि पर सिर्फ शोक व्यक्त कर शांत रहा जाए...
 
 
 
Kabeer Anand ye batayiye jo rangdari abhi kuchh din pehle aayi thi uski party ho gayi ya offer abhi bhi available hai ?
 
Yashwant Singh Kabeer Anand भाई, पार्टी लेने कोई आया ही नहीं, इसलिए सब सेफ है..  :)
 
Palash Biswas yaar, jakhm abhi hare hain.kaise kred rahe hoa yasjhwant pyaare? ..Apne blogon par laga raha hun taki sanad rahe.
 
चैतन्य चन्दन Achchha Idea hai.
 
Bhim Nagda Well achhi bat hai or uchhit samay par
 
Prashant Mishra shandar idea.
 
Syed Quasim ab chote akhbara shara hain jinko ye bade ignore karte the
 
पंकज कुमार झा बिजनेस के मामले में जब आपके खुद का भी अनुभव कोई अच्छा नहीं रहा है, हिन्दी की सबसे बड़ी साईट बना देने के बावजूद जब आप भड़ास का कोई ठीक-ठाक व्यावसायिक मॉडल (मेरी जानकारी अनुसार) विकसित नहीं कर पाए तो फिर नए-नवेले-नौसिखियों को इस दलदल में धकेल देने का ख़तरा क्यूँ मोल दिलाना चाह ते हैं उन्हें आप?
 
Yashwant Singh पंकज भाई... दो बातें कहूंगा.. मुझे यानि भड़ास को टर्नओवर नहीं बढ़ाना, इसलिए जितना चाहिए होता है, उतना आसानी से हर महीने मिलता है.. नहीं मिलता है तो आप सबों से मांग लते हैं, आनलाइन या आफलाइन अपील करके... लेकिन अगर रेवेन्यू के लिहाज से हम लोग काम करें तो अरबों का पोटेंशियल है भड़ास में.. लेकिन अपन की फितरत थोड़ी अलग है... उतना ही पाने की इच्छा है जितने में खा पी जी सकें... दूसरों को इसलिए बताना चाहता हूं ताकि वे बेकारी में डिप्रेशन में न चले जाएं.. वे अपना खुद का काम खड़ा करके जीवन सही तरीके से जी सकें... पांच साढ़े पांच साल के अनुभवों से आनलाइन माध्यम से पैसे बनाने के बारे में प्रोफेशनल समझ तो डेवलप हो ही गई है पंकज भाई.. तो ज्ञान को बांटने में क्या बुराई है.. जिसे कुबूल करना होगा, कुबूलेगा और जो नहीं समझ कर पाएगा वो नहीं करेगा...
 
Ankit Mathur Zyadaatar ChhatniShuda Patrakaaron ki vision, Management perspective se vanchit hoti hai, Aap bhi nikale gaye the, lekin aapke pass ek management funda, online funda, wo bhi unique funda tha, Isliye aap Gyan baant rahe hain! Har ChhatniShuda Patrakaar is prakaar ke udyam ke liye sahas (baad ki baat hai) Idea hi generate nahi kar sakta. Patrakaritaa ki aadhaarbhoot Parikalpana hi badal chuki hai aaj ke pariprekshya mein. Aapki safalta ke liye Badhaai, parantu har ChhatniShuda Vyakti Yashwant nahi ban sakta. (PS: I am not here to discourage your management session)
 
Yashwant Singh Ankit Mathur भाई, आप से सहमत, लेकिन मैं इतना कहूंगा कि संभावनाएं सबमें होती हैं, उसे कोई कितना डेवलप और एक्जीक्यूट कर पाता है, ये बड़ी बात है.. मेरे पास तो कोई मेंटर, गुरु या गाइड नहीं था.. पर अपने दम पर कर सका.. लेकिन अगर मेरे जैसा गाइड करने वाला कुछ साथियों को मिल जाए और वे साहस के साथ नए प्रयोग को कर सकें तो लिख कर दे रहा हूं कि वे अच्छा खासा काम खड़ा कर सकेंगे...
 
Ankit Mathur Dada, Guide ya Mentor ke role ko undermine nahi kar raha hoon, lekin jaisa ki aapne apni original post mein likha hai, ki zyadatar log Naukri karne ke liye is qadar taiyaar kar diye jaate hain ke wo vipreet se vipreet paristhiti mein bhi udyam ki taraf nahi sochte, lakh koi Mentor samjha de! 100 mein se koi 0.2 percent log milenge aapko!
 
Aadarsh Shukla achha vichar hai aage badhiye
 
Ankit Singhal Yashwant ji bhadas kis tym shuru hua tha
 
Nextlife Kanpur @yashwant ji.. Accha Idea hai.. Jaroor aage badhna chahiye..
 
Pt Anuj K. Shukla bahut sunadar vichar h. jai veer hanuman
 
Raju Das Manikpuri Acchi soch hai aapki, bhiya dubte ko tinke ka sahara bhi kafi hota hai par yaha to ubara ja raha hai khub sahyog milega subkamnaye aap ke sath.
 
Sandeep Verma यह बढ़िया कदम है .
 
Sanjay Sharma Gud Idea..
 
Jay Prakash Kar daliye bus jo hoga wo acha he hoga ,kuch na se kuch to melega agey badne ko
 
रहीसुद्दीन 'रिहान' Yashwant Singh भाई जी. मैं आपके वर्कशॉप वाले आईडिये पर सहमत हूं. गूगल एड से कमाई के बारे में काफी समय से सोच रहा हूं. आप वर्कशॉप को ऑर्गनाईज करने की तैयारी कीजिये. जैसी भी मदद चाहिये तैयार है.
 
Harsh Kumar gud thought
 
Rakesh Mishra Kanpur workshop ka kadam sarahniya hai.... mujhe iska hissa ban ke khushi hogi..... mai bhi isi disha me soch raha tha.
 
Anil Singh बिल्‍कुल भ्इया
 
Pramod Kaushik YASHWANTJI HUM TO LALAON KI NAUKARI THOKAR PAR RAKHATE HAIN OR APANI SHARTON PE ZINDAGI JEETE HAIN......NA KISI KI BUTTERING KA SAHOOR NA KISI KI GULAMI KARANE KI AKAL HUME...FIR BHI MAST ZINDAGI JEE RAHE HAIN FHAKKAD WALI.
 
Harish Singh sau pratishat sach hai boss, ham khud bhukt bhogi hai, par himmat nahi haare hai
 
Mahandra Singh Rathore bilkul sahi. safgoi ke liye yashwant ji badhai ho. aap vesse bhi kahri kahri likhne ke liye jante bhi jate hain. kya kisi chamche sampadak ki koi prtikirya aai.
 
Papia Pandey yaswant ji apke anubhav bahut kuch mere anubhav se milte julte hai...
 
Bhupendra Singh Sir ji, aapka udaaharan sabke saamne hai...waise is tarah ka workshop zarur karavaaiye..keval berozgaar huye media ke saathiyon ke liye hi nahin, balki tv channels aur akhbaaron me ghut-ghut ke kaam kar rahe saathiyon ke liye bhi media ki naukari ke itar sochne aur khud ka kuchh karne ke baaren me jaankaari paane ka yah ek achcha avsar hoga... Ab waqt aa gayaa hai ki patrakaarita se jude log patrakaarita ke saath-saath technology, buisness management aur market ki puri jaankaari len taaki ye apna khud ka kaam shuru kar maalikon aur chamcha sampadakon ki gulami se nijaat paa saken...
 
Bhavendra Prakash bilkul sahi rasta h sir in lalao ko int ka javab patthar se dene ka
 
Vijay Raaj Singh यशवंत जी दिन और जगह मुकर्रर करिये..
 
Prakash K Ray You must have this workshop. I am ready to help in whatever manner I can.

भड़ास4मीडिया के एडिटर यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.

आनलाइन माध्यम से हिंदी पट्टी के पत्रकार कमा सकते हैं ठीकठाक रकम, क्यों न एक वर्कशाप करें? आनलाइन माध्यम से हिंदी पट्टी के पत्रकार कमा सकते हैं ठीकठाक रकम, क्यों न एक वर्कशाप करें? Reviewed by Sushil Gangwar on August 27, 2013 Rating: 5

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