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Sunday, 11 August 2013

दुर्गा के बहाने दांव मुसलमानों पर


Page 1 jpgदुर्गा तो सिर्फ बहाना बन गईं। सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के लिए इस बात को साबित करने के लिए इससे ज्यादा और बेहतर मौका कोई दूसरा नहीं मिल सकता था कि वह मुस्लिमों के हितों की रक्षा करने वाले नेता हैं। जिस मामूली घटना पर विपक्ष उन्हें घेरने की रणनीति बना रहा था उसी मुद्ïदे को समाजवादी पार्टी ने मुस्लिमों के समर्थन में लाकर कांग्रेस और बसपा को बैकफुट पर करने की पूरी कोशिश की। समाजवादी पार्टी के नेता चाहते थे कि प्रदेश भर में इस बात का पूरी तरह से संदेश चला जाये कि जिस अफसर ने मस्जिद की दीवार तोड़ी कांग्रेस और बसपा उसके साथ खड़े हैं। यह बात दीगर है कि सपा मुखिया पूरी तरह से अपनी रणनीति में कामयाब नहीं हो पाये।
इस बात पर किसी को कोई शक नहीं है कि दुर्गा नागपाल का निलंबन सिर्फ खनन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करने के कारण हुआ है। मगर जिस तरह से मीडिया ने इन खबरों को उछाला उससे सपा के अंदर खलबली मच गयी। काफी माथा पच्ची करने के बाद भी सपा नेता इस मुसीबत से निकलने का कोई रास्ता तय नहीं कर पा रहे थे। तब आखिर में यही रणनीति अपनाई गयी कि दुर्गा के निलंबन को मस्जिद की दीवार से जोड़ दिया जाये जिससे यह साफ संदेश दिया जा सके कि अगर किसी अफसर ने मुस्लिमों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश की तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जायेगी। इससे समाजवादी पार्टी को मुस्लिमों में अपनी पैठ बढ़ाने का एक और बहाना मिल गया। सपा मुखिया ने इसी रणनीति को आगे बढऩे का फैसला किया। हालांकि इससे पहले सपा महासचिव राम गोपाल यादव निलंबित आईएएस के समर्थन में बयान भी दे चुके थे। मगर बाद में पूरे यादव परिवार ने दुर्गा नागपाल को दोषी मानते हुए अभियान छेड़ दिया कि रमजान के पाक महीने में मस्जिद की दीवार गिराने से माहौल खराब हो सकता था। इसलिए सरकार ने यह सही फै सला किया है। 
मगर जब कांग्रेस और बसपा ने देखा कि सपा की लाख कोशिशों के बावजूद इस बात पर मुस्लिम बहुत ज्यादा मुतमईन नहीं हैं कि यह सारा मामला सिर्फ मस्जिद की दीवार का है तो इन दोनों पार्टियों ने भी सरकार पर हमला बोल दिया। यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ïठी के बाद हड़कंप मच गया। सपा जान गई थी कि अगर यह विरोध नहीं थमा तो उसकी सरकार की बेहद किरकिरी हो जायेगी। लिहाजा सपा ने भी खाद्य सुरक्षा बिल को लेकर कांग्रेस से सौदेबाजी शुरू की। जिसके बाद ही कांग्रेस के तेवर थोड़े नर्म पड़े।
उधर दिल्ली में आईएएस एसोसिएशन के तेज तर्रार सचिव संजय भूस रेड्ïडी के नेतृत्व में सौ से अधिक आईएएस अफसरों ने प्रधानमंत्री कार्यालय में तैनात मंत्री नरायण सामी से मिलकर अपना विरोध दर्ज कराया। देश में यह अपने आप में पहला मामला है जिसमें सौ से अधिक अफसर किसी मामले को लेकर एक जुट हुए हों। आईएएस एसोसिएशन के इन तेवरों से यूपी सरकार में भी खलबली मच गयी।
तब मुख्यमंत्री भी अफसरों से बेहद नाराज हो गये। वह याद दिलाना नहीं भूले कि आईएएस एसोसिएशन उन्हीं के कारण आज यह बोल पा रही है। जाहिर है यह मामला सपा के गले की हड्ïडी बनता जा रहा है।
उधर भाजपा ने भी इस मामले को भुनाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। भाजपा को भी लगा कि अगर इस बात का जबरदस्त प्रचार कर दिया जाये कि अल्पसंख्यकों को लुभाने के लिए यह सरकार तुष्टिïकरण की नीति अपना रही है तो भाजपा का वोट बैंक बढ़ जायेगा। लिहाजा भाजपा ने भी इस मुद्ïदे पर अपना विरोध तेज कर दिया।
भाजपा नेताओं ने पूरे प्रदेश में दुर्गा नागपाल के समर्थन में रैलियां और मशाल जुलूस निकाले। सपा को भी यह बात मुनासिब लगती है कि भाजपा दुर्गा नागपाल को मस्जिद की दीवार गिराने से लेकर ही जोड़े। भाजपा जब इसका विरोध करेगी तो इसकी प्रतिक्रिया में मुस्लिम एकजुट होंगे और सपा को लगता है कि वह उसके पक्ष में ही लामबंद होंगे। दरअसल मोदी का नाम सामने आने के बाद समाजवादी पार्टी भयभीत है कि कहीं मोदी को रोकने के कारण मुसलमान कांग्रेस की तरफ न चला जाये। इसलिए सपा मुखिया सोची समझी रणनीति के तहत मुसलमानों को अपने पक्ष में रखने के लिए बयान दे रहें हैं। पहले उन्होंने कहा कि मस्जिद गिरने की जानकारी तत्कालीन राष्टï्रपति शंकर दयाल शर्मा को थी। फिर कहा कि वह बाबरी मस्जिद विध्वंस पर एक किताब लिखना चाहते थे मगर उनको रोक दिया गया। जाहिर है यह सारी बातें मुस्लिम मतदाताओं को लुभाने की रणनीति का ही एक हिस्सा हैं। दुर्गा नागपाल तो इसमें सबसे छोटा मोहरा हैं।
Weekandtimes.com

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