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लखनऊ के कुछ प्रेस फोटोग्राफरों के कैमरों के पीछे की काली करतूतें (देखें तस्वीर)


लखनऊ के प्रेस छायाकारों की कुछ काली करतूतों को प्रस्तुत किया जा रहा है. लखनऊ से प्रकाशित एक बड़े हिंदी दैनिक के छायाकार नंबर एक छायाकार कम दलाल ज्यादा हैं. शाम होते ही इनको दारू पीना जरूरी हो जाता है. बड़ी बड़ी लग्जरी गाड़ियों में दारू पिलाने वाले लोग इनके कार्यालय के आसपास टहलते रहते हैं. इनके कई ऐसे मित्र हैं जो इनके दारु का खर्चा वहन करते हैं. चलती गाड़ी में दारुबाजी इनकी रोज की दिनचर्या में है.
फोटो खींच कर समाचार पत्र में छापना फिर बिल्डरों से सौदा कर लेना इनकी फितरत है. इन करतूतों में इनका ही एक सहयोगी है जो एक बार एक बिल्डिंग की तस्वीर खींचने गया परन्तु वहां पकड़ कर इनकी पिटाई हुई. बाद में फोटो न छापने का सौदा हुआ. इनकी करतूत की सूचना पीड़ित ने सम्पादक को फोन कर दे दी. बाद में इनने उस बिल्डिंग मालिक से समझौता कर लिया जिसके एवज में कुछ रुपये व फ्लैट भी मिला.

एक अन्य छायाकार सज्जन की अय्याशी चरम सीमा पर है. दारुलशफा के फोटोपत्रकारों के एक कमरे में अय्याशी, जुआ, दारुबाजी, गाली गलौज आम बात है. आये दिन वर्चस्व की लड़ाई होती रहती है. वरिष्ठ छायाकार लोग अपने जूनियर छायाकारों के साथ जुआ खेलते हैं. वरिष्ठ छायाकार अपने पीछे चार-पांच जूनियर छायाकार रखते हैं, सौदेबाजी आदि के लिए. कई वरिष्ठ छायाकार तो किसी भी घटना पर मौके पर नहीं जाते हैं बल्कि जूनियर छायाकारों से काम लेते हैं. इसके चलते इनको अपने अपने संस्थानों से चेतावनी भी मिल चुकी है.
चौंकाने वाली बात ये है कि कुछ छायाकार शाम के समय यहाँ पर लड़की भी लाते हैं. इनकी तस्वीर भी खींची जाती है. कई तस्वीरें आपको भेज रहा हूं. इस घृणित काम में चपरासी तक शामिल है. इसकी उच्चस्तरीय जांच आवश्यक है. अब इन छायाकारों को एक बार फिर चुनाव लड़ने का भूत सवार है. इसको लेकर आजकल विभिन्न पार्टियों से धन उगाही अभी से शुरू हो गई है.
लखनऊ से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र व तस्वीरों पर आधारित. भड़ास के पास कई कालगर्ल लाने, सेक्स करने की तस्वीरें हैं पर नाम-पहचान छुपाने के मकसद से सिर्फ इसी एक तस्वीर का प्रकाशन किया जा रहा है जिसमें किसी भी पक्ष का चेहरा सामने नहीं है. इसके प्रकाशन का मकसद सिर्फ इतना भर बताना है कि दुनिया भर के लोगों व घटनाओं की फोटो खींचने वाले हे छायाकार बंधुओं, आप लोगों की भी तस्वीर खींचने वाले पैदा हो चुके हैं. इसलिए आइंदा से कुछ भी करें तो दस बार जरूर सोचें. और, कोशिश करें कि कुछ ऐसा न करें जिससे पत्रकारिता और फोटोजर्नलिज्म का दामन दागदार होग.
Sabhar- Bhadas4media.com

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