तुम शराफ़त का नक़ाब हटा क्यों नहीं देते

तुम शराफ़त का नक़ाब हटा क्यों नहीं देते ...?
तुम मेरी वफाओं का सिला क्यों नहीं देते ...?

जिस्म की चाहत में इश्क कर बैठा है कोई,
कब तक छुपा पाओगे बता क्यों नहीं देते ..?

मेरा भेजा प्यार तुम तक पहुँचता ही नहीं,
तुम जिस्म की दीवार हटा क्यों नहीं देते ...?

मुझे डर है इश्क तुझे शराफ़त ना सिखा दे,
तुम इश्क को मेरे घर का पता क्यों नहीं देते ...?

इश्क के नसीब में आनी है हिज्र की शाम,
तुम रस्म-ओ-रिवाज निभा क्यों नहीं देते ...?

इन मंसूबों से तो नहीं खिल पाएगी "गुँचा",
तुम इश्क की मय उसे पिला क्यों नहीं देते ...?

Tum sharafat ka naqab hata kyon nahi dete ...?
Tum meri vafaon ka sila kyon nahi dete ...?

Jism ki chahat me ishq kar baitha hai koi,
Kab tak chhupa paoge bata kyon nahi dete ...?

Mera bheja pyar tum tak pahunchta hi nahi,
Tum jism ki deewar hata kyon nahi dete ...?

Mujhe dar hai ishq tujhe sharafat naa sikha de,
Tum ishq ko mere ghar ka pata kyon nahi dete ...?

Ishq ke naseeb me aani hai hizr ki shaam,
Tum rasm-o-riwaz nibha kyon nahi dete ...?

In mansoobo se to nahi khil paayegee "Guncha",
Tum ishq ki may use pila kyon nahi dete ...?

Written by Neelam Nagpal Madiratta
तुम शराफ़त का नक़ाब हटा क्यों नहीं देते तुम शराफ़त का नक़ाब हटा क्यों नहीं देते Reviewed by Sushil Gangwar on May 20, 2013 Rating: 5

No comments