भाग जाती थीं लड़कियां, घर बिठा लीं


भागने पे आये तो कोई कहीं से भी भाग जाए. लेकिन पंजाब में तो बुरी हालत है. चंडीगढ़ से कुछ दूरी पर एक गाँव में तो जैसे कोई कहर आया हुआ है. छोटी छोटी छ: लड़कियां घरों से भाग गईं. स्कूल गईं थीं. लौटी ही नहीं. इन्हें अलग अलग जगहों से लड़कों के साथ पकड़ा गया.

माँ बाप ने अब इन सब को स्कूल से हटा लिया है. उन्हें भरोसा ही नहीं है कि स्कूल के लिए घरों से गईं तो वे जा के रुकेंगी कहाँ. बड़ी मुश्किल से हाथ आईं हैं. अब माता पिता जोखिम उठाने की स्थिति में नहीं हैं. कहते हैं अब आगे और नहीं पढ़ाएंगे. जैसे तैसे शादी कर देंगे इनकी. लड़कियां अभी नाबालिग हैं. लेकिन वे कहते हैं और कोई चारा नहीं है.

दरअसल बच्चियां वही कर रहीं हैं जैसा उन्होंने देखा, पाया है. छोटे क्या, बड़े भी अपनी पे उतरे हुए हैं. इसी गाँव की बात करें तो अकेले इस गाँव से पिछले कुछ अरसे में दो दर्जन से ज़्यादा औरतें भाग चुकी हैं. गाँव का माहौल अब उन्हें जंच नहीं रहा. गाँव वाले कहते हैं कि गाँव के मोड़ तक आया विकास अब उन का विनाश करने लगा है. आसपास उग आये प्रशिक्षण संस्थानों के लड़के गाँव की भोली भाली लड़कियों को भाने और पटाने लगे हैं. गाँव के सरपंच सरबजीत सिंह के कहते हैं,''समस्या है और वो बहुत गंभीर है. गाँव वालों की बैठक हुई है. कुछ कहना मुनासिब नहीं है.''

दरअसल चंडीगढ़ जैसे बड़े और खूबसूरत शहरों में और उन के आसपास अंधी आधुनिकता ने सांस्कृतिक, सामाजिक मूल्यों का नुक्सान बहुत किया है. एक आकलन के अनुसार रोज़ चंडीगढ़ शहर में तुरत धन के लालच में कम से कम एक हज़ार लड़कियां और महिलाएं आस पास के कस्बों, गाँवों से आती और शाम को अच्छा ख़ासा धनोपार्जन कर लौटती हैं. पुलिस को पता है. मगर वो भी कुछ करती नहीं. करती है तो उस पर मोरल पुलिसिंग के इलज़ाम लगते हैं. उस पर काफी नुक्सान दस कोस दूर हिमाचल के उस होटल उद्योग ने किया है जो बहुत सस्ता है और जहां कमरों की दो दो घंटे की बुकिंग आम बात है. वहां की पुलिस और तमाम व्यवस्था तो ऐसे ग्राहकों के लिए पलक पांवड़े बिछाए बैठी रहती है. क्योंकि पर्यटन हिमाचल की आय का प्रमुख स्रोत और पर्यटक उस में अतिथि देवो भव है.

पंजाब को छोड़िये. चंडीगढ़ जैसे शिक्षित, जागरूक और संभ्रांत कहे जाने वाले शहर की हालत ये है कि नाबालिग बच्चियां माँ बन रही हैं. कितने गर्भपात होते हैं इस का तो कोई अनुमान ही नहीं. वजह इस की किसी हद तक ये भी है कि आधुनिकता का अँधा और नंगापन बहुत है. स्कूटर बाइक पे बैठे पति पत्नी भी यूं चिपक के चलते हैं जैसे जंगल में विचर रहे हों. बच्चे भी वही कर रहे हैं. कैमरे में कैद करने वालों ने तो उन्हें रोज़ गार्डन, रॉक गार्डन और मोरनी के रास्ते पे भी बेशर्मी की हदें पार करते देखा है. सेक्स के लिए दोस्ती अब जैसे एक स्टेटस सिंबल बन गया है तो जो हो सकता है, होने लगा है. अब बच्चे बिन बढ़े और बेपढ़े ब्याहे जाएंगे.
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भाग जाती थीं लड़कियां, घर बिठा लीं भाग जाती थीं लड़कियां, घर बिठा लीं Reviewed by Sushil Gangwar on October 04, 2012 Rating: 5

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