तो सारे मुंबईकर बिहारी हैं

.तो सारे मुंबईकर बिहारी हैं

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कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह ने शोध किया है कि बाल ठाकरे का परिवार महाराष्ट्र से नहीं बिहार का रहने वाला है। उन्होंने यह बात बाल ठाकरे के पिता प्रबोधनकार ठाकरे द्वारा लिखित किताब के हवाले से कही है। दरअसल, प्रबोधकार ठाकरे ने अपनी किताब में कायस्थों की उत्पत्ति से लेकर उनके भ्रमण का इतिहास लिखा है। चूंकि ठाकरे कायस्थ हैं, इसलिए दिग्विजय ने वहीं से बात को उठाते हुए उन्हें बिहारी मूल का बता दिया है।

ठाकरे ने अपने घराने के इतिहास के बारे में भी लिखा है, उसका जिक्र दिग्विजय करना नहीं चाहते क्योंकि उससे यह साबित होता है कि ठाकरे महाराष्ट्र के है। एक शिवसेना के सांसद ने कहा कि अगर पुरातन इतिहास की बात करें तो इतिहासकार तो कहते हैं कि सभी आर्य यूरोप से भारत आए। तो फिर दिग्विजय के भारतीय होने पर भी उंगली उठाई जा सकती है। अगर दिग्गी राजा 13वीं सदी की बात करके ठाकरे को बिहारी कह रहे हैं तो फिर राघवगढ़ का इतिहास भी खंगालना पडे़गा कि 13 वीं सदी में दिग्गीराजा के कौन से पूर्वज वहां राज कर रहे थे। अगर ऐसे सम्राट अशोक का इतिहास उठाकर देखें तो आज का मुंबई उनके साम्राज्य का हिस्सा था। इस नाते तो सारे मुंबईकर भी बिहारी हो सकते हैं। राजनीति में इतिहास को ज्यादा खंगालना ठीक नहीं होता है।

नेता सिब्बल, वकील सिब्बल: केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल कोलगेट में फंसे महाराष्ट्र के दर्डा परीवार के बचाब में उतरे। ‘लोकमत‘ नाम से अखबार का साम्राज्य चलाने वाले दर्डा परीवार ने भी अपने पिता जवाहर लाल दर्डा के नाम पर एक पावर प्रोजेक्ट का प्रपोजल देकर एक कोल ब्लॉक हथिया लिया और बाद में कंपनी ही बेच डाली। इसे लेकर सीबीआई जंाच चली और सीबीआई ने महाराष्ट्र मंत्रीमंडल मे शामिल कांग्रेस के मंत्री राजेंद्र दर्डा और उनके बड़े भाई व कांग्रेस के राज्य सभा सांसद विजय दर्डा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की। इस पर विपक्ष ने दोनों के इस्तीफे की मांग की। दर्डा बंधुओं के बचाव में उतरे कपिल सिब्बल बोले की सीबीआई द्वारा एफआईआर दर्ज करने से कोई मुजरिम करार नहीं होता, न ही दोषी माना जाना चाहिए। जब कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी और दर्डा बंधुओं को दोषी पाती है तो तब इस्तीफा देना होगा, अभी नहीं। हालांकि साथ में सिब्बल यह भी कह गए कि अगर दर्डा की जगह वह होते तो एफआईआर दर्ज होने बाद तुरंत इस्तीफा दे देते। सिब्बल को सुनने के बाद असमंजस में पड़े पत्रकारांे ने जब उनके करीबी से पूछा कि आपके नेता कहना क्या चाहते हैं तो जवाब आया- ‘पहली बात जोे सिब्बल ने कही कि एफआईआर दर्ज होने से कोई दोषी नहीं साबित होता, तब वह वकील कपिल सिब्बल बोल रहे थे, लेकिन अंत मंे जब उन्हांेने कहा कि वह उनकी जगह होते तो इस्तीफा दे देते, यह बात नेता कपिल सिब्बल बोल रहे थे।’ वाकई सिब्बल साहब के डबल रोल का जवाब नहीं।

दस-दस ताई और चाहिए: कोलगेट कांड को लेकर भारतीय जनता पार्टी के सांसदों ने संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन संसद पर धरना दिया। धरना समाप्त होने पर जब सांसद लौट रहे थे, तब किसी बात पर जोर से मुस्कुराते हुए इंदौर की सांसद सुमित्रा महाजन यानी ताई को देख लोक सभा में विप़क्ष के नेता अरुण जेटली बोले- क्या बात है ताई आप मुस्कुरा रही हैं? इस पर ताई का जवाब था- ‘कोई खास बात नहीं, मैं तो हमेशा ही मुस्कुराती हूं। आप अनंत कुमार से पूछ लीजिए? इस पर साथ चल रहे अनंत कुमार बोले- बात तो सही है, लेकिन ताई आज आपकी मुस्कुराहट डबल है। इस पर जेटली बोले- अनंत कुमार जी, अगर ताई जैसी दस ताई और हमारी पार्टी में होंगी तो हम कभी कहीं मात नहीं खाएंगे। क्योंकि इंदौर में चल रही घिनौनी राजनीति से लड़ते हुए भी वह मुस्कुराना जानती हैं। जेटली उस इंदौर की बात कर रहे थे, जहा भाजपा का आंतरिक कलह इस मोड़ पर पहुंचा कि हाल ही में आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने भाजपा के कार्यालय पर हमला बोल तोड़फोड़ की थी। जेटली बोले कि मुश्किल समय में मुस्कुराते रहना यह कोई आसान बात नहीं है। क्यों ताई सही बात है न? इस सवाल पर ताई ने कहा अब तो लगता है कि मध्य प्रदेश प्रभार अनंत कुमार की जगह पर अरुण को दिलवाना पडे़गा। इस पर वहां मौजूद सभी सांसदों ने जोर का से ठहाका लगाया।

दूरी बनाए रखो: संसद के मॉनसून सत्र के अंतिम कुछ दिनों में कोयला आवंटन के साथ-साथ सरकारी नौकरियों में पिछड़ों को आरक्षण के आधार पर प्रमोशन वाला मुद्दा भी काफी गरमा गया। इसे लेकर भी सदन कई बार बाधित हुआ। एक बार तो उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख दल समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के सांसदो में सदन में हाथापाई तक हुई। इस मसले पर जब समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव पत्रकारों से रूबरू हो रहे थे, तब पत्रकारों के सामने जाने के पहले उन्होंने अपने खास लोकसभा के सांसद और पार्टी के मुख्य सचेतक यानी चीफ विप शैलेंद्र कुमार से कहा कि आप इससे दूर रहो। पत्रकारों के सामने आने की जरूरत नहीं। हर समय नेताजी याने मुलायम के साथ उनकी परछाई बनके चलने वाले शैलेंद्र को जब उन्होने दुर रहने को कहा तो कइयों को बात समझ में नहीं आई। दरअसल, शैलेंद्र पिछड़ी जाति से हैं और मुलायम नहीं चाहते थे कि पत्रकार उसने कोई सवाल पूछ कर उन्हें परेशानी में डाले। इससे पहले जब कांग्रेस के पुनिया ने इस मामले पर संसद में बहस करवाने के लिए जो मांग की थी, उस पर अपना हस्ताक्षर दे कर शैलेंद्र पहले ही विवादो में आ चुके थे। यह बात अलग है कि उनका हस्ताक्षर पुनिया ने उन्हें सही जानकारी न देते हुए लिए थे।

देशमुख नहीं दशमुख: संसद का सत्र समाप्त हुआ। सेंट्रल हाल में भाजपा के नेता गोपीनाथ मुंडे अपना दुख व्यक्त करते हुए बोले- मैं महाराष्ट्र विधान सभा में सालों पहली लाइन में बैठा हूं। वहां मैं अपने भाषणों के लिए जाना जाता था। लेकिन लोकसभा में तो पहले पंक्ति में बैठे होने के बावजूद बोलने को नहीं मिलता, बडा दुख होता है। इस पर पास खडे़ एक सांसद बोले- बोलने के लिए यह माइना नहीं रखता कि आप कहां बैठे हैं। अब आप हमारे के डी देशमुख को देखो, वह बैठते तो पीछे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा शोर मचाते हैं। तब मुंडे ने कहा- वह देशमुख नहीं, दशमुख हैं। इसलिए उनकी बात छोड़ो- उनके चिल्लाने का मुकाबला कोई नहीं कर सकता।

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तो सारे मुंबईकर बिहारी हैं तो सारे मुंबईकर बिहारी हैं Reviewed by Sushil Gangwar on September 09, 2012 Rating: 5

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