लखनऊ के बड़े पत्रकार को भाजपा नेता ने बुरी तरह धुन दिया


लखनऊ : लखनऊ के एक बड़े पत्रकार को भाजपा के एक नेता ने बुरी तरह धुन दिया। राजधानी में सरकार के बड़े अफसरों और कद्दावर पत्रकारों से अटी-पड़ी कैसरबाग कालोनी में सरेआम हुई इस घटना की रिपोर्ट पुलिस में कर दी गयी है। लेकिन चार दिन बाद भी पुलिस ने हस्‍तक्षेप नहीं किया। इतना ही नहीं, पत्रकारों की सारी यूनियनें और पत्रकार-नेता भी इस हादसे पर पूरी तरह चुप्‍पी साधे हुए हैं।
यह हादसा इसी महीने की 20 तारीख सुबह करीब सात बजे हुई। दैनिक हिन्‍दुस्‍तान के अनिल के अंकुर नामक वरिष्‍ठ पत्रकार सुबह बैडमिंटन खेल कर लौट रहे थे। पुलिस में लिखी गयी रिपोर्ट के अनुसार अंकुर जैसे ही अपने फ्लैट की पोर्टिको के पास पहुंचे, आधा दर्जन लोगों ने उन्‍हें दबोचा और जमकर पीट दिया। रिपोर्ट के अनुसार इन हमलावरों को इस फ्लैट में पड़ोसी और भाजपा के नेता दयाशंकर सिंह ने बुलाया था। दयाशंकर सिंह लखनऊ विश्‍वविद्यालय छात्रसंघ में उपाध्‍यक्ष थे और भाजपा में मौजूदा प्रदेश मंत्री। इतना ही नहीं, दयाशंकर सिंह इस सरकारी कालोनी में काबिज मकान में पिछले दस बरस से कब्‍जा रखे हैं।

अंकुर के मुताबिक लात-घूसों से पीटने के बाद दयाशंकर सिंह ने अपनी पिस्‍टल अंकुर के चेहरे पर रखा और धमकी दी कि पूरे परिवार को जान से मार दिया जाएगा। अंकुर के बच्‍चे इस हादसे के बाद से ही सदमे में आ चुके हैं। इस घटना के बाद से ही अंकुर का परिवार और कालोनी वाले दहशत में हैं लेकिन हादसे के चार दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई करने की जरूरत ही नहीं समझी। अंकुर के मुताबिक कालोनी के गेट पर ही बनी पुलिस-चौकी के इंचार्ज ने साफ कह दिया कि जब तक जांच नहीं की जाएगी, किसी भी हमलावर पर कार्रवाई नहीं की जाएगी।

दयाशंकर सिंह ने बताया है कि अनिल के अंकुर पिछले एक साल से मेरे निजी और घरेलू मामलों में हस्‍तक्षेप कर रहे हैं। दयाशंकर का आरोप है कि अंकुर के चलते ही उनके घर भारी पारिवारिक और दाम्‍पत्‍य संकट आ गया था। इतना ही नहीं, अंकुर को इस मामले से बाहर रहने की हिदायत दी गयी, लेकिन अंकुर अपनी करतूतों से बाज नहीं आये। दयाशंकर का कहना है कि मेरे साले के पारिवारिक संबंध तोड़ने और उसके तलाक पर भी उनका हाथ था और मेरे तमाम विरोधों के बावजूद यह तलाक करा दिया गया। मेरे ससुराल वाले पूरा प्रपंच अंकुर के घर पर ही करते थे। यह सब सहन कैसे किया जा सकता है। मेरे ठेकेदार ससुर को ठेके दिलाने में भी अंकुर सहयोग करते थे। घटना के समय वे पीजीआई से लौटे थे और इसी बीच उनसे कहासुनी हो गयी। अंकुर के साथ मारपीट की वारदात से दयाशंकर सिंह पूरी तरह खारिज करते हैं और पुलिस में रिपोर्ट में लिखी गयी बातें मनगढंत हैं। दयाशंकर सिंह का कहना है कि अंकुर को समझाने के लिए उन्‍होंने ब्रजेश शुक्‍ला और सुभाष मिश्र नामक पत्रकारों से बात भी की थी।

इस पूरे प्रकरण में कालोनी के निवासियों का नजरिया दयाशंकर सिंह के खिलाफ है। एक अध्‍यासी ने बताया कि दयाशंकर सिंह और उनकी पत्‍नी के बीच पिछले कुछ बरसों से मारपीट शुरू हो गयी थी। यह मार-पिटाई अक्‍सर बर्बरता की सीमा तक पार हो जाती थी। बताते हैं कि एक बार तो दयाशंकर सिंह ने अपनी पत्‍नी को लाठियों से पीट दिया और उस हादसे में उनकी पत्‍नी बेहोश हो गयी थीं। कालोनी के लोग दयाशंकर सिंह को नेता जानकर मामले में बोलते ही नहीं थे, लेकिन तब अंकुर ने ही हस्‍तक्षेप किया था। वैसे दयाशंकर सिंह की छवि शुरू से ही हथछुट छात्र-नेता सरीखी ही रही है। कई बार तो शादी जैसी पार्टियों में दयाशंकर सिंह ने कई लोगों को बुरी तरह पीटा था। कालोनी में रहने वाले एक पत्रकार ने बताया कि दयाशंकर सिंह मूलत: आपराधिक चरित्र का शख्‍स है। एक अन्‍य निवासी को आश्‍चर्य होता है कि दयाशंकर जैसे शख्‍स के साथ अंकुर की निकटता और घनिष्‍ठता कैसे हुई।

दरअसल, दयाशंकर सिंह और अंकुर के बीच कभी बेहद प्रगाढता थी। कुछ साल पहले एलटी शिक्षकों की भर्ती के परीक्षापत्र को लीक कराने का आरोप जब दयाशंकर सिंह पर आया था तो अंकुर ने ही दयाशंकर को बचाने के लिए हरचंद कोशिशें की थीं। इस घटोले में करोड़ों रुपयों की लूट हुई थी और भाजपा समेत कई दलों के नेताओं का हाथ शामिल था। पुलिस ने तब उत्‍तर प्रदेश समेत कई प्रदेशों से बड़ी गिरफ्तारी की थी। जानकार बताते हैं कि अंकुर ने तब दयाशंकर सिंह से अपनी मित्रता निभाते हुए हवाईअड्डे तक उसे छिपा कर पहुंचाया था। मुख्‍य राजनीति में दयाशंकर सिंह को ढंग से पटरी पर लाने के लिए भी अंकुर ने कोई कसर नहीं छोड़ी थी। अंकुर की पत्‍नी और दयाशंकर सिंह की पत्‍नी गहरी सहेलियां हैं। लेकिन हाल ही में जब दयाशंकर सिंह के निजी घरेलू रिश्‍तों में खटास-खमीर उठा, तो दयाशंकर के साथ दोस्‍ती अंकुर की दोस्‍ती भस्‍मीभूत हो गयी। दुश्‍मनी दो महीना पहले तब भड़क गयी जब आपसी मारपीट की घटना के बाद दयाशंकर सिंह की पत्‍नी अपने दो बच्‍चों के साथ मायके चली गयीं।

अंकुर बताते हैं कि दयाशंकर सिंह इस कालोनी में पिछले दस-ग्‍यारह बरसों से अवैध रूप से काबिज हैं। पहले इस कालोनी में दयाशंकर सिंह के कब्‍जे में दो मकान थे, लेकिन एक विवाद के बाद दयाशंकर सिंह ने एक मकान को खाली कर दिया था। लेकिन हैरत की बात है कि सरकारी मकान पर अवैध रूप से 11 बरसों से काबिज दयाशंकर सिंह को इस भवन को खाली कराने की जरूरत राज्‍य सम्‍पत्ति विभाग ने नहीं समझी। उधर पुलिस चौकी इंचार्ज का कहना है कि सर्वोच्‍च न्‍यायालय के निर्देशों के मुताबिक जब तक किसी मामले की जांच पुलिस नहीं करती है, तब तक किसी भी वांछित आरोपित पर कार्रवाई करा पाना पुलिस के लिए सम्‍भव नहीं है।
यूपी के वरिष्ठ पत्रकार कुमार सौवीर की रिपोर्ट. कुमार सौवीर से संपर्कkumarsauvir@yahoo.com और 09415302520 के जरिए किया जा सकता है.

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