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मीडिया वालों की वजह से मर गई शिवाली !

लोगों की जान ही लेनी हो तो मुथी-उर-रहमान सिद्दीकी, डेकन हेराल्ड का रिपोर्टर या हूजी जैसे किसी आतंकवादी संघठन का सदस्य होने की ज़रूरत नहीं है. किसी अख़बार या चैनल का स्ट्रिंगर होना ही काफी है.ऐसे ही कुछ तथाकथित पत्रकारों ने लुधियाना में एक लड़की की जान ले ली.


हुआ ये कि एसडी कालेज में बी.ए. की छात्रा शिवाली एक लड़के के साथ कार में थी कि उनकी कार एक दूसरी कार से टकरा गई. पुलिस का नाका पास ही था. थानेदारनी बलविंदर कौर आई और उस ने दोनों से बाहर आने को कहा. दोनों बाहर आये तो उस ने लड़के के कहा कि वो सड़क के बीचोंबीच उठक बैठक करे.

दोनों ने कहा कि गलती सरासर दूसरी कार वाले की, उठक बैठक वो क्यों करे? बलविंदर कौर के अंदर की थानेदारनी बाहर आ गई. उस ने मीडिया वालों को बुला लिया. वे आये और लगे दोनों ले फोटो खींचने जैसे वे कोई आतंकवादी हों. दोनों ने फोटो लेने से मना किया. शिवाली ने तो ये भी कहा कि फोटो अगर उस के खींचे तो वो आत्महत्या कर लेगी. उस का कहना था कि आप
चालान करो, जो करो लेकिन फोटो अखबारों में क्यों छपवाओगे? लेकिन न थानेदारनी मानी, न मीडिया वाले. बल्कि मीडिया वालों ने कहा कि फोटो वे खींचने आए हैं तो छापेंगे ही. मकसद शायद ये था कि लड़की की लड़के साथ होने की फोटो खींचने, छपने और उस से होने वाली बदनामी के डर से दोनों उठक बैठक करने लगेंगे.


फोटो खिंच गए. शिवाली पास ही से गुजरने वाली रेल लाइन की तरफ चल दी.
तब भी किसी का दिल नहीं पसीजा. उसे किसी ने नहीं रोका. उस ने रेलगाड़ी के नीचे आ के जान दे दी.

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