पाकिस्तान से आए संदेशों का असर

अनिल दीक्षित




पूर्वोत्तर के बाद देश के तमाम हिस्सों में सांप्रदायिक सद्भाव को क्षति के प्रयासों में पाकिस्तान की भूमिका सिद्ध होने के बाद यह सोचने की जरूरत महसूस हो रही है कि चीन की तरह इंटरनेट और दूरसंचार के माध्यमों की भूमिका सीमित करने का तर्क कहीं सही तो नहीं है। इस विचार का विरोध करने वालों की संख्या अच्छी-खासी है और सरकारी पहल का प्रयास औंधे मुंह गिर चुका है लेकिन जब हम खुद अपनी सीमाएं तय नहीं कर लेते तब तक यह बात बार-बार उठना तय है। आश्चर्यजनक है कि कैसे हम अपने विवेक से यह तय नहीं कर पाते कि आया हुआ ईमेल या एसएमएस सही है या गलत?


क्यों हम रौ में बहकर प्रतिक्रिया करने लगते हैं और क्यों हमें अपने लिए क्या सही है और क्या गलत, यह पता नहीं चलता। केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह के यह कहने के बाद कि पूर्वोत्तर के लोगों के खिलाफ भारत में जो दहशत फैली है उसके पीछे पाकिस्तान का हाथ है, अचानक इंटरनेट को लेकर चचार्ओं का दौर शुरू हो गया है। बहस का मुद्दा मोबाइल फोन पर एसएमएस की सुविधा भी है, जिन पर सरकार ने पंद्हर दिन के लिए बंदिशें लगा दी हैं। कितना संगठित रूप से इस अपराध को जन्म दिया गया, एक ईमेल और कुछ एसएमएस भेजे गए कि असम में मुसलमान समुदाय पर हुई हिंसा की प्रतिक्रिया में भारत के अन्य राज्यों में रह रहे पूर्वोत्तर के लोगों पर जवाबी हमले किए जाएंगे और उसके बाद भगदड़ मच गई। लोगों में फैलाई जा रही तस्वीरों और वीडियो में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भूकंप और चक्रवात से मारे गए लोगों को म्यांमार की हिंसा के पीड़ितों के तौर पर दिखाकर गलत जानकारी दी गई।


एक संप्रदाय को इतना भ्रमित किया गया कि प्रतिक्रिया शुरू हो गई। असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने भी कहा कि राज्य में हाल ही में हुई हिंसा के पीछे विदेशी हाथ होने की उनकी आशंका की पुष्टि हो गई है। सिंह के अनुसार, ऐसी 76 वेबसाइट्स की पहचान कर ली गई है जिनका इस्तेमाल अफवाहें फैलाने के लिए किया गया है और इन्हें अब ब्लॉक कर दिया गया है। इनके अलावा 34 अन्य वेबसाइटों की पहचान कर ली गई है और सरकार उन्हें ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। दरअसल, इंटरनेट और मोबाइल फोन इतना आम हो गया है कि इसका नकारात्मक प्रयोग बड़ी बात नहीं रही। कुछ सालों पहले तक किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि इंटरनेट के माध्यम से पनप रही सोशल नेटवर्किंग साइट्स या ब्लॉग्स की देश-दुनिया में इतनी बड़ी भूमिका हो जाएगी। पाकिस्तान का बुरा हाल भी अब किसी से छिपा नहीं है। वहां आतंकी और कट्टरपंथियों का इतना खौफ बन गया है कि वो चाहें कुछ भी करते रहें, सरकार भी कुछ नहीं कर पाती। हाल ही में उजागर हुआ था कि पाकिस्तानी आतंकी संगठन जमात उद दावा ने धन एकत्र करने और दुष्प्रचार फैलाने के लिए इंटरनेट एवं सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट का इस्तेमाल बढ़ा दिया है। वर्ष 2008 में मुंबई हमले के बाद जमात की वेबसाइट और उसकी गतिविधियों पर अंकुश लगाया गया था। अब यह संगठन ट्विटर और फेसबुक पर सक्रिय हो गया है। जमात को लश्कर-ए-ताइबा का मुखौटा संगठन कहा जाता है। इसका सरगना कुख्यात आतंकी हाफिज सईद है। इसी साल 26 जुलाई को अपने ट्विटर एकाउंट और फेसबुक पेज पर पोस्ट किए गए संदेश में जमात ने अपने लिए अनुदान की अपील की थी। संदेश में संगठन ने कहा, आप दान के लिए हमें संपर्क कर सकते है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि हमारे प्रतिनिधि आप तक जकात और फितरा लेने के लिए पहुंचें। जमात उद दावा चंदा में एकत्र धन का इस्तेमाल खास करके भारत में हमलों के लिए करता रहा है। इस्लामाबाद, लाहौर और पाकिस्तान के दूसरे शहरों से खबरें हैं कि रमजान का पवित्र महीना शुरू होने के साथ ही जमात उद दावा ने धन एकत्र करने का काम तेज कर दिया था और बड़ी राशि एकत्र भी की। इसके साथ ही अंदरूनी हालात निरंतर बिगड़ते जा रहे हैं।


अमेरिकी कांग्रेस की एक समिति की रिपोर्ट से उजागर हुआ है कि पाकिस्तान के आतंकवाद निरोधी कदमों का कोई परिणाम नहीं निकल पा रहा। आतंकी उन इलाकों में पुन: काबिज हो गए हैं, जहां से सेना ने उन्हें खदेड़ दिया था। संघीय प्रशासित कबायली क्षेत्रों में सेना की कार्रवाई चल जरूर रही है लेकिन उसका असर माहौल पर नहीं पड़ पा रहा। यहां तक कि सेना पर आतंकी छिटपुट हमले करने से भी नहीं हिचक रहे। रिपोर्ट में पाकिस्तान की अशांति का जिक्र करते हुए उसके अफगानिस्तान पर पड़ रहे प्रभावों पर चिंता जताई गई है। राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कांग्रेस के समक्ष इस रिपोर्ट को जब प्रस्तुत किया तो सांसदों ने दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर पाकिस्तान को चेतावनी देने और मदद रोकने तक की हिमायत की। पाकिस्तान इस समय अल्पसंख्यक हिंदुओं के पलायन की खबरें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर फैलने से बौखलाया हुआ भी है। बौखलाहट का दूसरा बड़ा कारण सांबा सेक्टर के चचवाल इलाके में भारतीय क्षेत्र में खोदी गई सुरंग का समय रहते पता रहते लग जाना भी है। पाकिस्तान इस सुरंग के रास्ते आतंकवादियों को भारतीय क्षेत्र में धकेलने की कोशिश में था, लेकिन उसकी योजना जगजाहिर हो गई है।


ऐसे हालात में भारत को अपने सुरक्षा हितों पर लापरवाही का रवैया त्यागना होगा। आम भारतीय भी यदि संयम से हर मुद्दे पर अपना मत निर्धारित करने की आदत नहीं डालता तो इंटरनेट और मोबाइल फोन पर निगरानी के दिन आ सकते हैं।





(अनिल दीक्षित आगरा से छपने वाले पुष्प सवेरा अखबार में समाचार संपादक हैं. ये लेख उन के ब्लॉग से साभार.)
पाकिस्तान से आए संदेशों का असर पाकिस्तान से आए संदेशों का असर Reviewed by Sushil Gangwar on August 21, 2012 Rating: 5

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