बेटे के इलाज के लिए नवजात को 40 हजार में बेचा




Sold a newborn in 40 thousand for the treatment of son

विकलांग बेटे के इलाज के लिए एक दंपति ने अपने नवजात शिशु को 40 हजार में बेच दिया। यह सौदा प्रसव कराने वाली दाई ने अपने जानकार के मार्फत करवाया। बाद में खरीदार ने पूरे पैसे देने से इनकार किया तो मामला खुल गया। आरोप है कि खरीदने वालों ने नवजात को बेचने के लिए खरीदा था। पुलिस ने दाई और सब रजिस्ट्रार समेत सात लोगों के खिलाफ मानव तस्करी का केस दर्ज किया है।

लाइट डेकोरेशन का काम करने वाला अशोक पंजमना मूल रूप से फाजिल्का जिले के कटियांवाली गांव का वासी है, लेकिन वर्तमान में वह श्रीगंगानगर (राजस्थान) की सेतिया कॉलोनी में रह रहा है। उसने अबोहर की नानकनगरी निवासी सुनीता उर्फ संध्या नामक विधवा से शादी की। उन दोनों का एक पुत्र रौनक है। उसके दोनों पांव बेकार हैं। इसी बीच सुनीता दोबारा गर्भवती हुई। वह सेतिया कॉलोनी की दाई मधु से चेकअप करवा रही थी। दोनों की अच्छी जान पहचान हो गई।

गत 30 जुलाई को सुनीता ने बेटे को जन्म दिया। इसके बाद दाई की सलाह पर दंपति 40 हजार में नवजात को किसी और को गोद देने के लिए तैयार हो गए ताकि रौनक का इलाज करवाया जा सके। इस पर दाई मधु ने श्रीगंगानगर निवासी दंपति विनोद अग्रवाल और शकुंतला को बच्चा खरीदने के लिए तैयार कर लिया। इन दोनों की केवल दो बेटियां ही हैं।

तीन अगस्त को सुनीता ने बच्चा गोद दे दिया और बदले में 20 हजार ले लिए। सात अगस्त को तहसील कार्यालय में गोदनामा पंजीकृत करवाया गया, जिस पर सब रजिस्ट्रार ने अपनी मोहर लगाकर हस्ताक्षर किए। गोदनामे पर खरीद-फरोख्त करने वाले दंपति के अलावा गवाह के रूप में लक्ष्मीकांत पुत्र मूलचंद अग्रवाल निवासी अशोकनगर और दाई मधु नागपाल के भी हस्ताक्षर हुए।

पुलिस ने अशोक पंजमना के बयानों पर हिंदू एडाप्शन एंड मैरिज एक्ट की धारा 27, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा 33 और भादंसं की धारा 342 के तहत बच्चा खरीदने वाले विनोद अग्रवाल, उसकी पत्नी शकुंतला, विनोद के साले अशोक अग्रवाल, सहयोगी विक्की सरदार, एडवोकेट चिमनलाल, दाई मधु और सब रजिस्ट्रार के खिलाफ मामला दर्ज किया है। वहीं बच्चा बेचने वाले दंपति के खिलाफ अभी मामला दर्ज नहीं हुआ है।

ऐसे हुआ मामले का भंडाफोड़
इस मामले का भंडाफोड़ तब हो गया जब अशोक पंजमना को बाकी 20 हजार रुपये नहीं मिले। इतना ही नहीं गोदनामे के लिए उससे लिए गए आईडी प्रूफ के मूल कागजात भी विनोद अग्रवाल ने देने से मना कर दिए। कानूनन सात वर्ष से कम आयु के बच्चे का इस तरह से गोदनामा नहीं हो सकता, इसी कारण सब रजिस्ट्रार पर भी केस दर्ज किया गया है। अशोक ने पत्रकारों को बताया कि बाद में उसे यह भी पता चला कि इस बच्चे को आगे फिरोजपुर के किसी दंपति को महंगे दामों में बेचे जाने की कोशिश की जा रही थी।

sabhar- amarujala.com

बेटे के इलाज के लिए नवजात को 40 हजार में बेचा बेटे के इलाज के लिए नवजात को 40 हजार में बेचा Reviewed by Sushil Gangwar on August 11, 2012 Rating: 5

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