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आलोक तोमर ट्रस्ट गठित होगा


डी दयाल
जानेमाने पत्रकार स्वर्गीय आलोक तोमर की याद में एक ट्रस्ट का गठन किया जाएगा जो भावी पत्रकारों को फैलोशिप प्रदान करेगा और जरूरतमंद मीडिया कर्मियों को इलाज से लेकर हर तरह से मदद करेगा. यह घोषणा वरिष्ठ पत्रकार दीपक चौरसिया ने की. 20 मार्च को आलोकजी के पहली पुण्यतिथि मनी. होली के दिन वे चले गए थे. उनकी स्मृति में आयोजित 'यादों में आलोक' में कांसटीट्यूशन क्लब का सभागार वरिष्ठ पत्रकारों और मीडिया से इतर समाज के अन्य वर्गों के आलोक -प्रेमियों से खचाखच भरा हुआ था. मंच पर और सभागार में आलोकजी की बड़ी सी तस्वीर पर सबने पुष्प अर्पित किये और उनको प्रणाम किया. सादगी और श्रद्धा से लबरेज इस कार्यक्रम में सबकी आंखें पुरनम थी और स्मृतियों में आलोक बसे हुए थे. सभी नामी वक्ताओं ने उनके रास्ते पर चलने का संकल्प दुहराया.
स्वर्गीय आलोकजी की पत्नी सुप्रिया रॉय एवं परिजनों की मौजूदगी में संपन्न भावभीने कार्यक्रम में वरिष्ठ सम्पादक सर्वश्री श्रवण गर्ग, राहुल देव,संतोष भारतीय, पुण्य प्रसून वाजपेयी, पत्रकार सांसद प्रभात झा , राजेश बादल सहित दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डा. अशोक वालिया इत्यादि ने संबोधन दिया. आलोक के मित्र केन्द्रीय मंत्री पत्रकार राजीव शुक्ला भी पहुंचे.
इस अवसर पर दिल्ली और देश के कई हिस्सों से आए अनेक पत्रकार भी सभागार में उपस्थित थे.
'यादों में आलोक' के तहत आलोकजी की प्रथम पुण्य तिथि पर उनको भावभीनी श्रद्धांजलि दे कर सबने अपने-अपने भावुक मन से उनको याद किया.
श्रवण गर्ग ने कहा -आलोक लोगों के दिलों में बसते हैं. उन्होंने खबर को कभी मरने नही दिया.
राहुलजी कहा -आलोक ने कभी समझौते नही किये. अपनी पहचान कलम से बनाई. बुराई के खिलाफ उनकी जंग जारी रही. वे लक्ष्य से कभी नही भटके.
संतोष भारतीय ने कहा -वे हमेशा कहते थे जीवित रहते तो मिला नही जाता मरने के बाद श्रद्धांजली दी जाती है इसलिए यह जरूरी है हम सब हमेशा मिलते रहें. संवाद बना रहे और नए पुराने सभी साथी इकट्ठा हों. पत्रकारिता में भाईचारा बना रहे.
पुण्य प्रसून वाजपेयी ने कहा की अज देश में जो हालत हैं उसमे आलोक बहुत याद आते हैं. जनसरोकार की जो पत्रकारिता उन्होंने की वो आज भेई सामयिक है. बुरे वक्त में भी वे भटके नही. उन्होंने समझौते नही किए. जो लिखा साहस से लिखा. आज वे लेखन की वजह से अमर हैं.
प्रभात झा ने कहा आलोकजी ने ख़बरों को जिया. खबर के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते थे. बेदिल दिल्ली में भी उन्होंने अपनी जगह बना ली. वे सबसे घुल मिल जाते थे. यह उनकी खासियत थी.
राजेश बादल ने कहा वे मिलनसार स्वभाव के थे और सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनके तेवर वाली पत्रकारिता जारी रहे. कार्यक्रम में दीपक चौरसिया और डा. हरीश भल्ला का सक्रिय सहयोग रहा.सुप्रियाजी ने सभी अतिथियों का आभार माना.
Sabhar- datelineindia.com

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