लखनऊ के दस नंबरी पत्रकार (दो) : जब मंत्री ने शौकीन संपादक को बता दी उसकी औकात

लखनऊ : दलाली का हिस्‍सा न मिलने पर एक ने पत्रकार संघ और प्रेस क्‍लब को तबाह करने की साजिश कर दीं। खंडहर इमारत को किसी तरह टिकाने के लिए कई दलालों को तेल लगाया, संघ में घुसेड़ा। एक भांड़-पत्रकार ने बदले सियासी बिसात में धड़ाधड़ छपवा कर मुख्‍यमंत्री से विमोचन करवा दीं अपने सीएम को तेल-मर्दन के लिए लिखी अपनी चौंसठिया किताबें। बुझी दुकान फिर चल गयी। लेकिन दूसरे पत्रकार इतने किस्‍मतवाले कहां थे।

एक संपादक की ऐयाशी में खर्च हुई भारी रकम के सरकारी बकाया को सुलटाने के लिए मंत्री पर एक संपादक और उसके चिंटुओं-पिंटुओं ने अपने हर कोने का दम लगा दिया। रकम खासी बड़ी थी, सो मंत्री ने अपने हाथ खड़े कर दिये। बस, फिर क्‍या था। संपादक भड़क गये। इस मंत्री के खिलाफ अपने अखबार पर रोज छपवानी शुरू कर दीं खबरें संपादक और उसके चिंटू-पत्रकार ने। खासा गैरतमंद था सहकारिता विभाग का वह मंत्री, जिसने उस पत्रकार और उसके अखबार के संपादक को दारू-भोजन पर अपने घर बुलाया और बाद में जमकर पीटा। दारू की खाली बोतल इन पत्रकारों के हर संवेदनशील अंगों में पूरी ताकत से स्‍पर्श-प्रवेश करा दिया, कि दर्द महीनों तक रहा। इस फोटो-सेशन की कॉपी इन पत्रकारों को भी भिजवाई कि: देखो मैंने कर दिया तुम लोगों के साथ यह सब। अब हिम्‍मत हो तो छापो।

दलाली के लिए कुख्‍यात एक पत्रकार ने जैसे ही एक गार्ड को इस बात के लिए गरियाया और झंपडि़याया कि उसने उनका स्‍कूटर कैसे छुआ, सारे गार्ड ने एकजुट होकर सरेआम इन पत्रकार-शिरोमणि को बाकायदा गजक की तरह कूट दिया। अब उप्र मान्‍यताप्राप्‍त संवाददाता समिति की बीमा-पेंशन में करोड़ों का घालमेल कर रहे हैं। दो-दो सरकारी मकान इनके कब्‍जे में है। समिति के नेता और कर्णधार इस पर चुप हैं। बोले भी तो किस मुंह से। हर एक की पूंछ किसी न किसी दूसरे ने दबा भी तो रखी है ना। और अकेले वो ही क्‍यों, पिटने का शौक तो कई पत्रकारों को भी है। एक राष्‍ट्रीय अखबार के एक पत्रकार ने दारू में टुन्‍न होकर करीब डेढ साल पहले राज्‍य अतिथि गृह में हंगामा किया था। वेटरों का कहना है कि मुर्गा-दारू फ्री में चाहते थे वह पत्रकार। इस पर वहां के मैनेजर से हॉट-टॉक हो गया। पत्रकार ने भद्दी गालियां दीं, कहा: मैं पत्रकार हूं और बात न मानी तो हर अफसर को यहीं पर बुलाकर नंगा करूंगा।

एवज में मैनेजर और वेटरों ने सरेआम लात-जूतों से इस पत्रकार की जमकर मालिश की। बताते हैं कि अगले कई हफ्तों तक पत्रकार साहब के घर पिसी हल्‍दी की खपत कई गुना होती रही। पिटते पत्रकार के पिटे-लिथड़े आर्तनाद पर किसी अफसर ने कान ही नहीं दिया। वैसे यह पत्रकार पहले भी एक महिला कालेज में पीटे जा चुके हैं। उस समय उनका एक दूसरा साथी भी पिटा था, जो पिटाई के बाद पिट चुके हैं एक जोड़ीदार पत्रकार भी। अखबार अलग-अलग थे, लेकिन एक बेंच पर एकसाथ दारू गले में गटकाते हैं। हां हां, फ्री वाली। हजरतगंज चौराहे पर होली के दिन टुन्‍न होकर इस जुड़वा ने एक दारोगा को पीटा था। शिकायत ऊपर तक हुई तो एक का पराभव मौत तक पहुंच गया, जबकि अब दूसरा एक चैनल का हेड बना बैठा है। ताजा-ताजा खबर है कि एक बड़े पत्रकार की जमकर पिटाई हो गयी। कई बार पिटने के लिए मशहूर इस पत्रकार के साथ यह हादसा हजरतगंज चौराहे पर तब हुआ जब वे अपने साथियों के साथ शराब में टुन्‍न थे। कार में कई शराबी साथियों के साथ में गालियां खूब हो रही थीं। मोहल्‍लेवालों ने ऐतराज किया। बात बढने लगी तो पत्रकार की धुंआधार पिटाई कर दी गयी। कार भी कूंच दी गयी।

...जारी...

लेखक कुमार सौवीर लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं. कई अखबारों व न्यूज चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं. इन दिनों आजाद पत्रकार के रूप में सक्रिय हैं. उनसे संपर्क 09415302520 के जरिए किया जा सकता है.

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लखनऊ के दस नंबरी पत्रकार (दो) : जब मंत्री ने शौकीन संपादक को बता दी उसकी औकात लखनऊ के दस नंबरी पत्रकार (दो) : जब मंत्री ने शौकीन संपादक को बता दी उसकी औकात Reviewed by Sushil Gangwar on June 16, 2012 Rating: 5

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