मंडी में मीडिया ,चौथे खंभे का भ्रम


mandi me media समीक्षा : ‘मंडी में मीडिया’ किताब विनीत कुमार के गहन शोधों का नतीजा है. यह किताब लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जानेवाले मीडिया के भ्रम को दूर करता है. किताब में पेड न्यूज, पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग( आकाशवाणी और दूरदर्शन ), मीडिया की नैतिकता और सेल्फ रेगुलेशन जैसे गंभीर सवालों को उठाया गया है. लेखक पेड न्यूज के बारे में लिखते हैं, ‘जिस पेड न्यूज को अभूतपूर्व घटना की तरह आश्चर्य से देखा जा रहा है, मीडिया का पाप या दुष्कर्म बताया जा रहा है, वह उसके कारोबार का सामान्य ढर्रा है’. वे मीडिया की साख के बारे में कहते हैं कि मीडिया की साख अब समाज के बीच से पैदा और खत्म नहीं होती बल्कि यह काम भी मार्केटिंग और ब्रांड इमेज मेकओवर करने वाली कंपनियों के जिम्मे आ गया है.



बीते साल के अगस्त महीने में अन्ना के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के खिलाफ देश में एक आंदोलन शुरु हुआ. आंदोलन मीडिया की सुर्खियों में बना रहा. लेखक इस आंदोलन में ईजाद हुई टोपी के बारे में कहते हैं, ‘टोपी का इस्तेमाल हेलमेट न लगाने पर जुर्माने से बचने के लिए किया गया’. ‘ मैं अन्ना हूं’ की इस टोपी को मीडिया ने भी पहना और टीआरपी का सुपरहिट फार्मूला खोज निकाला. राडिया प्रकरण में मिट्टी में मिल चुकी साख, कैग की रिपोर्ट और राष्ट्रमंडल खेलों के लिए मिले गलत ठेकों को इस टोपी ने ढंक लिया.’ पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग अध्याय में लेखक यह बताते हैं कि इसे हमेशा सेफ मोड में रखा जाता है. वे इसकी वजह बताते हुए कहते हैं कि बुद्धिजीवी समाज और अकादमिक दुनिया से जुड़े लोग जो मीडिया खासकर टीवी को कूड़ा मान चुके हैं, उनके लिए पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग अंतिम शरणस्थली है. आपातकाल के दौरान पब्लिक ब्रॉडकास्टिंग को इंदिरा गांधी ने अपने पक्ष में किस तरह इस्तेमाल किया था, इसकी चर्चा भी किताब में की गई है. इंदिरा गांधी द्वारा ऑल इंडिया रेडियो का इस्तेमाल अपने हित में बुरी तरह से करने की वजह से आम लोग इसे ऑल इंदिरा रेडियो पुकारने लगे थे. कॉर्पोरेट के आगे नतमस्तक होते मीडिया की आलोचना करने के लिए लेखक ने हर संभव वाजिब तर्क जुटाए हैं. पर्याप्त आंकड़े भी जुटाए हैं. कुल मिलाकर यह किताब मीडिया के चरित्र को भीतर-बाहर समझने में मदद करती है. ( तहलका से साभार, समीक्षक - स्वतंत्र मिश्र, तहलका, 30 जून 2012 )


मंडी में मीडिया ,चौथे खंभे का भ्रम मंडी में मीडिया ,चौथे खंभे का भ्रम Reviewed by Sushil Gangwar on June 23, 2012 Rating: 5

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