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आर एस एस के कार्यकर्ता आतंकवादी गतिविधियों में भाग लेते हैं

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आर एस एस के कार्यकर्ता आतंकवादी गतिविधियों में भाग लेते हैं
पोस्टेड ओन: 20 Feb, 2012 Junction Forum, जनरल डब्बा, टेक्नोलोजी टी टी, न्यूज़ बर्थ, पॉलिटिकल एक्सप्रेस, बिज़नेस कोच, मस्ती मालगाड़ी, मेट्रो लाइफ, लोकल टिकेट, सोशल इश्यू में
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आज से पांच वर्ष पूर्व पानीपत के पास समझौता एक्सप्रेस में बम विस्फोट हुआ था जिसमें 68 लोग मारे गए थे। इस केस में स्वामी असीमानंद, लोकेश शर्मा तथा देवेन्द्रगुप्ता कारागार में निरुद्ध हैं। राम जी व संदीप को भगोड़ा घोषित किया जा चुका है और इनके ऊपर दस-दस लाख का इनाम भी घोषित है।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने इंदौर निवासी कमल चौहान को गिरफ्तार किया है। कमल चौहान ने मीडिया के समक्ष कहा है कि मैंने जो किया वह अपनी मर्जी से किया राष्ट्रीय जांच एजेंसी का कहना कि समझौता एक्सप्रेस की जिस बोगी में बम विस्फोट हुआ था उस बोगी में दिल्ली में कमल चौहान ने बम प्लांट किया था। राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने पंचकुला की अतिरिक्त सत्र न्यायधीश कंचन माही की अदालत में पेश किया जहाँ पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी को पुलिस कस्टडी रिमांड मिल गया।
आरोपी कमल चौहान के पिता राधेश्याम ने कहा है कि कमल चौहान आर एस एस के माध्यम से समाज सेवा कर रहा था लेकिन इस तथ्य के विपरीत वह सुनील जोशी का नजदीकी था। सुनील जोशी का कई बम विस्फोटो में नाम आया था। बाद में सबूत मिटाने के लिये उसके ही साथियों ने उसकी हत्या कर दी थी। अलीगढ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में आर एस एस की विद्यार्थी शाखा स्थापित करने का काम करने के लिये कमल चौहान को ही जिम्मेदारी दी गयी थी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का कहना है कि कमल चौहान हमारा जिम्मेदार कार्यकर्ता नहीं था।
अब यह सवाल उठता है कि मक्का मस्जिद, मालेगांव, समझौता एक्सप्रेस, अजमेर शरीफ जैसे बम कांडों में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और उसके अनुसांगिक कार्यकर्ताओं के नाम बराबर आये हैं लेकिन उसके ऊपर आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने के बहुत सारे प्रमाण मिलने के बाद भी प्रतिबन्ध की बात नहीं की जा रही है। आज जरूरत इस बात की है कि देश की एक और अखंडता की हिफाजत के लिये मजबूत राष्ट्र के लिये ऐसे देशद्रोही संगठनो पर प्रतिबन्ध लगाया जाए अन्यथा इनकी नीतियाँ देश की गंगा-जमुनी संस्कृति को कमजोर करेंगी अभी कुछ दिन पूर्व इनके कार्यकर्ताओं ने पाकिस्तानी झंडा फहराकर हिंसा भड़काने की कोशिश की थी लेकिन जांच में यह तथ्य तुरंत प्रकाश में आ गया कि पाकिस्तानी झंडा अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्तियों ने नहीं फ़हराया था बल्कि दंगा करने के लिये तथा अल्पसंख्यकों को बदनाम करने के लिये आर एस एस के लोगों ने ही झंडा फ़हराया था।
-मुहम