..किरण बेदी ने कहा - बोलो पत्रकार प्‍यारे, कुछ तो बोलो, मुझे क्‍यों बुलाया है


पूर्व आईपीएस आफिसर और टीम अन्ना के सदस्य के रूप में सशक्त भूमिका निभाने के बाद किरण बेदी गुरुवार को अम्‍बाला में पत्रकारों के टीचर की भूमिका में भी दिखीं। जब पत्रकार संगठन के प्रमुख अपनी बात कहने में असमर्थ साबित हुए, तो किरण बेदी ने पहले तो पत्रकारों का हौंसला बढ़ाया और टिप्स भी दिए। यूनियन आफ जर्नलिस्ट के हरियाणा प्रदेश उपाध्यक्ष श्री प्रदीप गुलाटी मसीह को किरण बेदी ने पत्रकारों की मौजूदगी में खूब रटवाया कि वो कार्यक्रम के बारे में मीडिया को कैसे बताएं। यह रूचिकर एपिसोड कैसे चला मैं एक गवाह पत्रकार के तौर पर हाल ए बयां कर रहा हूं।
किरण बेदी यहां यूनियन आफ जर्नलिस्ट के तत्वावधान में कन्या बचाओ अभियान के एक कार्यक्रम में भागीदारी करने आईं थीं। कार्यक्रम में भागीदारी करने से पहले किरण बेदी यहां हरियाणा टूरिज्म के रेस्तरां किंगफिशर में पत्रकारवार्ता को संबोधित करने पहुंचीं। पत्रकारों के कैमरे तैनात होते ही किरण ने कहा कि मैं पहले बात करती ठीक नहीं लगती, जरूरी है कि कार्यक्रम के आयोजक पहले बताएं कि आखिर कार्यक्रम क्या है, आयोजकों ने उन्हें किस लिए बुलाया है।
किरण बेदी के साथ बैठे प्रदीप गुलाटी (बीच में)

बगल में बैठे कार्यक्रम कोआर्डिनेटर व यूनियन आफ जर्नलिस्ट के हरियाणा प्रदेश उपाध्यक्ष प्रदीप गुलाटी मसीह बोले..मैडम बस हमने क्या कहना है, आप ही बोलिए। बेदी ने इस पर कहा कि कायदा यही है कि आप मीडिया को बताएं कि मामला क्या है? अब बेचारे मसीह साहब बात कहने में असमर्थ, जोर लगाकर भी कह न पाएं। दरअसल वो मूल रूप से सिर्फ फोटोग्राफर ही हैं, बतौर रिपोर्टर उनका कैरियर रहा नहीं। ये बात अलग है कि वो पत्रकार संगठन के उपाध्यक्ष हैं। 
किरण बेदी के जोर देने पर गुलाटी बोलना शुरू करते हैं, लेकिन कार्यक्रम की रूपरेखा और अपना परिचय दिए बिना कहीं और ही शुरू हो गए। किरण बेदी ने तुरंत कैमरे वालों को कहा कट.. कट..  कट, रोको भाई गलत संदेश चला जाएगा। किरण ने कहा कि हद हो गई आप तो खुद पत्रकार हैं, आप पहले तरीके से बताएं कि आखिर कार्यक्रम क्या है, मैं यहां आई क्यों हूं? फिर भी जनाब का हौंसला न बने। फिर किरण बेदी ने प्रदेश उपाध्यक्ष साहब को गिन कर पांच लाइनें रंटवाई और बस ये लाइनें रट कर रन थ्रू ट्रेन की तरह गुलाटी ने कैमरे के सामने ये लाइनें बोल दीं। गुलाटी तो रन थ्रू लाइन बोलकर छुटकारा पा गए, लेकिन वहां मौजूद काफी लोगों के कारण पत्रकारिता की जो थू थू हुई, पूछिए नहीं। लोग खूब हंसे। लेकिन किरण बेदी जी बड़ी अच्छी हैं, उन्होंने कहा कोई बात नहीं, चलता है, इतना तो चलता है।
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.
Sabhar- Bhadas4media.com
..किरण बेदी ने कहा - बोलो पत्रकार प्‍यारे, कुछ तो बोलो, मुझे क्‍यों बुलाया है ..किरण बेदी ने कहा - बोलो पत्रकार प्‍यारे, कुछ तो बोलो, मुझे क्‍यों बुलाया है Reviewed by Sushil Gangwar on June 08, 2012 Rating: 5

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