लखनऊ के दस नंबरी पत्रकार (चार) : मान्यताप्राप्त पत्रकार बनाने की फैक्ट्री का मालिक और हजरतगंज सौंदर्यीकरण में करोड़ों खाने वाला दलाल

लखनऊ : एक पत्रकार ने अपनी पत्‍नी को एक पूर्व मुख्‍यमंत्री से तीन लाख रूपये का अनुदान दिला दिया। और विज्ञापन तो यह साहब कांग्रेसी खेमा से पा ही जाते हैं। एक पत्रकार को 15 साल पहले 20 लाख रुपये की इमदाद दे डाली थी एक मुख्‍यमंत्री ने। एकतरफा शर्त थी कि यह रकम विज्ञापन से अदा की जाएगी। इसके बाद से राजनीति की डगर पकड़कर पत्रकार ने कई पार्टियों का पानी चख लिया, मगर दाल नहीं गली। एक साहब ने अपनी शादी के लिए लाखों का अनुदान हासिल किया और हनीमून के लिए स्‍टेट प्‍लेन का जुगाड़ कर लिया। खुद का कई-कई निजी मकान होने के बावजूद अनेक पत्रकार सरकारी मकान पर काबिज हैं। लेकिन यह तो बहुत कम है।

बसपा सरकार में सतीशचंद्र मिश्र ने हजरतगंज के सौंदर्यीकरण में कई सम्‍मानजनक वरिष्‍ठ पत्रकारों को मलाई चटवाई। खबरें आयीं कि 140 करोड़ रूपयों का वारा-न्‍यारा करा दिया गया था। लेकिन उप्र मान्‍यता प्राप्‍त संवाददाता समिति और उसके कारिंदों ने ऐसे विवादों पर ऐतराज तब ही किया, जब तक उनकी गोटियां फंसीं। जैसे ही गोटी छूटी, मुद्दा राम नाम सत हो गया। लेकिन हजरतगंज में 140 करोड़ की दलाली करने वाले पत्रकारों के नाम का खुलासा किसी भी पत्रकार ने नहीं किया।

एक साहब तो मान्‍यताप्राप्‍त पत्रकार बनाने की फैक्‍ट्री ही खोले बैठे हैं। बसपा सरकार में इन कुल-कलंक ने मायावती के ब्‍ल्‍यू-आईड कहे आला अफसरों के साथ मिल कर न जाने कितने लोगों की मान्‍यता करायी या खारिज करायी। वरिष्‍ठ पत्रकार के नाम पर एक नई श्रेणी बनवायी जो अब बिना कुछ किये, केवल सरकारी मदद और मकान हासिल करता रहे। जीवन भर। मुख्‍यमंत्री की प्रेस-कांफ्रेंस में उनका सवाल तो सुनिये: आदरणीय बहनजी। पिछले सरकार में इंजीनियरों की सुरक्षा के मुद्दे को पिछली सरकार ने तो अपनी माफियावाद के चलते लटकाया, लेकिन अब पूरा यकीन है कि आप इंजीनियरों का इंसाफ करेंगे।--- भरी कांफ्रेंस में कई पत्रकारों की आवाज गूंजती:- अबे यह सवाल है या अंग-चटाई। भड़ुआ है इस्‍स्‍स्‍साला।

कई पत्रकार तो ऐसे हैं जो पत्रकारिता में बरास्‍ता जनहित याचिका जमे हैं। इनके विरोधियों का कहना है कि पीआईएल के नाम पर पार्टियों से करोड़ों की रकम कमायी है। अब इसे क्‍या कहें कि ऐसे विरोधी लोग खुद ही बेईमानी के कठघरे में हैं। ताजा शिगूफा है कि यह सज्‍जन पीआईएल करने वाले पत्रकारों के खिलाफ अब खुद ही पीआईएल दायर करेंगे।

तो यह हैं लेखनी और माइक के नवाबों-बादशाहों की करतूतें। ऐसे बादशाह दूसरे पत्रकारों को तो दलाल करार देते हैं, लेकिन खुद कभी कॉफी-हाउस को बेच डालते हैं तो कभी मकान कब्‍जाने के लिए जुगत भिड़ाते हैं। पत्रकारिता हो या संसद। रास्‍ते कोई भी, कोई फर्क नहीं पड़ता। बस कमाई होती रहे। कभी समाचार एजेंसी को चबा कर हजम डालते हैं तो कभी पत्रकार से सरकारी अफसरी। मकान का अड़ंगा लगता है तो यह अपनी पत्रकारिता की पिपहरी बजाने लगते हैं। जानकार बताते हैं कि शराफत ओढ़े इस पत्रकार ने तबादलों की अपनी दूकान में जितना माल बेच डाला, बेमिसाल है। आजकल ये संपादकाचार्य हैं। संप्रदाय की छौंक लगाते ठस-बुद्धि वाले पत्रकार अपने पेशे को मौके-बेमौके अपवित्र करते रहते रहे हैं। इनमें से एक पत्रकार तो बीस साल पहले कारसेवा के दौरान जेल जा चुके हैं, जबकि अयोध्‍या विवाद पर हाईकोर्ट के हालिया फैसले पर यह एक बन्‍तू पत्रकार साहब अपना माइक-आईड छोड़कर भों-भों कर रोने लगे थे कि हाईकोर्ट का फैसला उनकी कौम के खिलाफ आया।

अरे धत्‍तेरे की। इनको तो शर्म तक नहीं आती। बेशर्मी का मुअम्‍मा बेशर्मी से ओढ़े हैं यह पत्रकार। कोई बात नहीं। कर लेते हैं इन लोगों की भी बात। नंबरी नहीं, इन्‍हें दस नंबरी पत्रकार कहिए। तो, एक के बार एक, शुरू करते हैं इनका काला चिट्ठा। पत्रकारिता के हम्‍माम में नंगे इन पत्रकारों की नंगई की आखिर बाकी लोगों को पता तो चले। करतूत के साथ, इनके नाम के साथ। यानी क्रमश:।

लेखक कुमार सौवीर लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार हैं. कई अखबारों व न्यूज चैनलों में महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं. इन दिनों आजाद पत्रकार के रूप में सक्रिय हैं. उनसे संपर्क 09415302520 के जरिए किया जा सकता है.

Sabhar- Bhadas4media.com

लखनऊ के दस नंबरी पत्रकार (चार) : मान्यताप्राप्त पत्रकार बनाने की फैक्ट्री का मालिक और हजरतगंज सौंदर्यीकरण में करोड़ों खाने वाला दलाल लखनऊ के दस नंबरी पत्रकार (चार) : मान्यताप्राप्त पत्रकार बनाने की फैक्ट्री का मालिक और हजरतगंज सौंदर्यीकरण में करोड़ों खाने वाला दलाल Reviewed by Sushil Gangwar on June 16, 2012 Rating: 5

No comments