''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक, का लगातार '' 34 वाँ'' अंक


''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक, का लगातार '' 34 वाँ'' अंक मई 2012, जो समाज में व्याप्त 'भ्रूण हत्या' जैसा अमानवीय और सोची समझी साजीश के तहत स्वयं अपने ही वंश का खात्मा कर रहे हैं, जो एक अभिशप्त हिंसारूढ़ भारतीय समाज लगभग पूर्णतः इसके आगोश में है, इसी विषय पर केन्द्रीत यह अंक पाठकों को समर्पित है , इस अंक के माध्यम से लोगों में सामाजिक, धार्मिक तथा व्यावहारिक तर्कपूर्ण व मार्मिक शब्दों का प्रयोग करते हुए, देश के सुप्रसिद्ध साहित्यकारों, कवियों एवं चिन्तकों के आलेख  सम्मिलीत किए गये हैं, मुझे विश्वास है कि देश के सभी सुधी पाठक अवश्य पसन्द करेंगे और इस पूण्यप्रद अभियान में ''हम सुधरेंगे जग सुधरेगा''  की तर्ज पर भ्रूण हत्या से विमुख हो स्वस्थ जीवन देते हुए स्वस्थ जीवन व्यतीत करेंगे।
-सम्पादक, पं.विनोद चौबे, कव्हर पेज फोटो- हेमन्त खुन्टे, पिथौरा, रायपुर(छ.ग.), आवरण कथा- माँ श्री नीलमचन्द सांखला (जिला न्यायाधीश) रायपुर।  प्रकाशन- भिलाई (छ.ग.)

''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक, का लगातार '' 34 वाँ'' अंक ''ज्योतिष का सूर्य'' राष्ट्रीय मासिक, का लगातार '' 34 वाँ'' अंक Reviewed by Sushil Gangwar on June 03, 2012 Rating: 5

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