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Wednesday, 30 May 2012

‘कुत्ता’ गाली क्यों है ? और अगर ये गाली है तो उस पर प्रथम अधिकार किस का है?


-शैलेश गुप्ता-
अक्सर मेरे मन में ये विचार आता है कि आखिर कुत्ते को मानव के समाज में एक गाली क्यों मानी गई ? जबकि कुत्ता एक पालतू जानवर है और वफादार भी… विचार करने पर कुछ बात समझ आई सोचा आप सभी से साझा करूं …..
कुत्ता वफादार है लेकिन सिर्फ मालिक के प्रति… जो उसे पालता है भोजन देता है चाहे वो मालिक कोई हत्यारा, चोर डाकू या दरिंदा ही क्यों न हो.
कुत्ते में वफादारी तो होती है लेकिन विवेक नहीं… अगर मालिक हत्यारा है और उस के घर पर कोई साधू भी आ जाये तो कुत्ता उस साधू को भौंकेगा.
कुत्ते की मालकिन देशी हो या विदेशी इस बात का कुत्ते को कोई फर्क नहीं पड़ता चाहे देश को बर्बाद ही क्यों न कर रही हो लेकिन कुत्ता अपनी उस मालकिन के तलवे ही चाटेगा.
कुत्ता मालिक के हर आदेश को बिना सोचे समझे मान लेता है सही गलत का फैसला करने का विवेक होता नहीं उस में कुत्ते में स्वार्थ होता है उस की रोटी कोई छीन न ले उस डर से वो किसी को भो भोकेगा. वह अपने घर पर या मोहल्ले में कभी दुसरे कुत्ते की सत्ता स्वीकार नहीं कर सकता.
अब इसे किसी विशेष राजनैतिक पार्टी के परिप्रेक्ष्य में विचार करें… जहां लोग सिर्फ मालिक की भक्ति करते है जिन से उन्हें भोजन और घोटाला और भ्रष्टाचार करने मिलता है इसलिए वो अपने मालिक की गद्दारी को भी नहीं देख पाते.
जहां के लोगो में अच्छे बुरे और देश भक्ति या धर्म का विवेक नहीं सिर्फ अपनी मालकिन के प्रति वफ़ादारी ही उन के जीवन का प्रथम और अंतिम लक्ष्य है
जहा उन की मालकिन विदेशी है और इस देश का कभी भला कर नहीं सकी खहो लेकिन उन का निजी स्वार्थ इतना बद गया है कि उन्हें देश भक्ति जैसे चीज़ समझ ही नहीं आती और बस अपनी मालकिन के तलवे ही चाटते रहते है.
जहां मालकिन का हर आदेश कार्यकर्ता और मंत्री पत्थर की लकीर मान कर मानते है ……चाहे वो आदेश देश के अहित में ही क्यों न हो .
जहां अपने निजी स्वार्थ और मालकिन के फायदे के लिए मंत्री देश के किसी साधू महात्मा पर भी बिना विवेक के भोकते है चाहे वो साधू महात्मा अनशन करे या देश भक्ति का कोई कार्य उन को काटने दौड़ना उन पर डंडे बरसाना इन का काम है
अब आप स्वयं सोचे की क्या यह सत्य नहीं कि… अगर कुत्ता एक गाली है तो उस कुत्ता रूपी गाली का प्रथम अधिकारी सिर्फ एक विशेष राजनैतिक पार्टी के लोग है..?
( रायपुर के रहने वाले  शैलेश गुप्ता पेशे से व्यवसायी हैं, लेकिन ब्लॉगिंग और लेखन में एक अर्से से सक्रिय हैं। फेसबुक पर उनके पेज कही सुनी और शैलेश उवाच खासे लोकप्रिय हैं। इनका ब्लॉग  http://manmukuru.blogspot.in भी कई बार चर्चा के केंद्र में रहा है।

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