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हिंदी में काम कराओ लाट साहब !


वकील और लेखम मनीराम शर्मा ने अदालती कामकाज में हिंदी की वकालत की है. उन्होंने हिंदी के इस्तेमाल का अनुरोध करते हुए एक पत्र लिखा है दिल्ली के उपराज्यपाल को. इसकी एक प्रति उन्होंने हमें भी भेजी है. ये रहा वो पत्र...-संपादक

महामहिम लेफ्टिनेंट गवर्नर महोदय, .
दिल्ली सरकार,                                                                                                                    .
नई दिल्ली .
महोदय,
दिल्ली राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों में हिन्दी भाषा का उपयोग और राजभाषा अनुपालन
नम्र निवेदन है कि राजभाषा पर संसदीय समिति ने दिनांक 28.11.1958 को अनुशंसा की थी कि सुप्रीम कोर्ट में कार्यवाहियों की भाषा हिंदी होनी चाहिए| जनगणना के आंकड़ों के अनुसार देश में 43% लोग हिंदी भाषी हैं जबकि अन्ग्रेजी भाषी लोग मात्र0.021% ही हैं| दिल्ली राज्य की प्रथम राज भाषा भी हिंदी ही है| स्वतंत्रता के 64 वर्ष बाद भी राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों  में कार्यवाहियां ऐसी भाषा में संपन्न की जा रही हैं जो 1% से भी कम लोगों द्वारा बोली जाती है| इस कारण राज्य के अधीनस्थ न्यायालयों  के निर्णयों से अधिकांश जनता में अनभिज्ञता व गोपनीयता, और पारदर्शिता का अभाव रहता है| जनतंत्र में जनता ही सर्वोपरि स्थान रखती है| सर्वविदित है कि लोक कल्याणकारी जनतंत्र में समस्त कानून जनता की सुविधा के लिए बनाये जाते हैं न कि उनके सेवकों की सुविधा के लिए|
सिविल प्रक्रिया संहिता,1908 की धारा 137 व दंड प्रक्रिया संहिता,1973 की धारा 272 में राज्य सरकार को न्यायालयों में कार्यवाही की भाषा निर्धारित करने का अधिकार है| राजस्थान उच्च न्यायालय में भी पहले से ही हिंदी भाषा में कार्य की अनुमति है और बिहार, उत्तरप्रदेश आदि हिंदी भाषी राज्यों में अधीनस्थ न्यायालयों  में हिंदी भाषा में कार्य हो रहा है| राजभाषा अधिनियम के अंतर्गत भी दिल्ली  क्षेत्र में वर्गीकृत है| अत: दिल्ली के अधीनस्थ न्यायालयों में भी हिंदी भाषा में कार्य प्रारम्भ किया जाना अब समसामयिक आवश्यकता है|
अतेव आपसे नम्र निवेदन है कि दिल्ली के अधीनस्थ न्यायालयों में हिंदी भाषा के प्रयोग हेतु कृपया तत्संबंधित कानूनों की अपेक्षानुसार अग्रिम कार्यवाही करें और राज भाषा हिंदी को चिरप्रतीक्षित  स्थान प्रदान करें| आपकी इस अनुकंपा के लिए मात्र मैं ही नहीं अपितु समस्त हिंदी भाषी लोग आपके बड़े आभारी रहेंगे| .
धन्यवाद,
दिनांक: 27/05/ 2012 भवदीय

मनीराम शर्मा
एडवोकेट
रोडवेज डिपो के पीछे
सरदारशहर 
ईमेलmaniramsharma@gmail.com
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