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स्वर्ग में बारिश का समय


बाईलाइन


एम जे अकबर


कभी एक विचार मेरे जेहन में आया था, लेकिन इसकी महत्ता आज अधिक प्रासंगिक लगती है. अगर आप जीवन में भाग्यशाली हैं, तो मौत के बाद मूर्ति में तब्दील हो जाते हैं. अगर आप अधिक भाग्यशाली हैं तो इस मूर्ति का आकार ज्यादा बड़ा हो जाता है. लेकिन यह मूर्ति वैसी अपूर्ण रचना जैसी नहीं लगती, जिसमें हीरो की मूछें पतली होती हैं और चिड़िया उसके माथे पर आराम के लिए रुकती और बातें करती दिखती है.
सेक्स टेप

ऐसा देश के महान लोगों का व्यापक पैमाने पर बिगड़ा स्वरूप लगता है. चाहे भारतीय संसद में गांधी की प्रतिमा हो या अमरीका में माउंट रशमोर में लिंकन की घूरती प्रतिमा. ऐसे महान लोगों के प्रति राय बनाने में जरा वक्त लगता है.

कोई व्यक्ति अपने अनुचर का हीरो नहीं होता है, क्योंकि वह आपके काफी करीब होता है. चूंकि हम सभी अंतिम समय तक उम्मीद में जीते हैं, वे भी जो मौजूदा स्थितियों से खुश नहीं होते हैं, ऐसे में हमें अनुमान लगाना चाहिए कि ऊपर भी एक महान कैबिनेट होगी, जिसकी अध्यक्षता गांधी या लिंकन करते होंगे. गांधी जरूर भारत के विखंडित सरकार को देखते होंगे और सोचते होंगे कि क्या उनके वारिस पागल हो गये हैं या सिर्फ बिकाऊ हैं.

महात्मा के मामले में उनकी यह सोच व्यक्तिगत नहीं हो सकती. उनके खून के वारिस लेखक, शिक्षाविद् हैं. जैसे- राजमोहन गांधी या नौकरशाह गोपाल की विश्वसनीयता संदेह के परे है और इनका राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. लेकिन, चूंकि गांधी राष्ट्रपिता हैं, ना कि किसी परिवार के पिता, ऐसे में उनकी विरासत का धीरे और सतत विनाश होना निश्चित ही चिंतित और उद्वेलित करता है.

अगर गांधी द्वारा तैयार किये स्वतंत्रता सेनानियों की फौज स्वर्ग में उनके साथ समय बिता रही होगी, तो उनमें निराशा का भाव अवश्य ही काफी व्यापक होगा. मेरा मानना है कि स्वर्ग तो स्वर्ग है, क्योंकि वहां कोई राजनीतिक दल नहीं होता है. ऐसे में गांधी के आसपास भारतीयों में सावरकर और श्यामा प्रसाद मुखर्जी भी होंगे.

क्या आप स्वर्ग में इनके बीच बोफोर्स रूपी जिन्न और पूर्व भाजपा अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण का कैमरे के सामने पैसे लेने वाले दृश्य पर होने वाली बहस की कल्पना कर सकते हैं? क्या इन घटनाक्रमों पर वे हंसते होंगे या फिर रोते होंगे? अचंभित करने वाली बात यह है कि भारत अब बंगारू जैसे घटनाक्रम वाले एक दशक पहले के समय वाला देश नहीं रह गया है, लेकिन सार्वजनिक जीवन को तबाह करने का जरिया निजी कैमरा बना हुआ है.

बंगारू लक्ष्मण हाथ ऊपर करते पकड़े गये, लेकिन ऐसा लगता है कि आज के राजनेता अपनी पैंट नीचे करते हुए पकड़े जाने के आदी हो गये हैं. कोई भी इस बात की कल्पना कर सकता है कि वे पैसे से ज्यादा सेक्स के प्रति सावधान होंगे. निजी जीवन में हस्तक्षेप न करने की संस्कृति शक्तिशाली लोगों को जकड़ चुकी है और ऐसा प्रतीत होता है कि वे इसके खतरे से परे हैं.

दिल्ली में अभी भ्रष्टाचार का मुद्दा हावी है, लेकिन एक टेप सामने आने के बाद यह अफवाहों के चंगुल में फंसा दिख रहा है. नैतिकता पर झूठे तर्क बेतुके हैं. हमारी उत्सुकता सेक्स में नहीं, बल्कि सार्वजनिक कर्तव्य से समझौता करने को लेकर है.

आकाश से देश का ऐसा रंगीन नजारा कैसा लगता होगा? मिल्टन के पैराडाइज लॉस्ट में शैतान अपने गुण का बखान इस तरह करता है- स्वर्ग को नरक में बदलना और नरक को स्वर्ग में.

महात्मा और उनके सहयोगी इस बात पर अचंभित दिख रहे होंगे कि दिल्ली के लिए आज कौन-सा हिस्सा महत्व का रह गया है.

आप क्या सोचते हैं, उन्हें भ्रष्टाचार या मूर्खता में से कौन सी चीज अधिक परेशान कर रही होगी? यह संभव है कि महान साम्राज्य और उभरते देश कभी-कभार के लालच से बचे रहे. यह तभी हो सकता है, जब लालच किसी संक्रमण के बजाय कभी-कभार का हिस्सा बना रहे. लेकिन मूर्खता खतरनाक हो सकती है.

मुझे लगता है कि आज सत्ताधारी दल के कुछ सुर्खियां बटोरने वाले लोग चोरी के बजाय मूर्खता की ओर ज्यादा झुके हुए हैं. यह संभव है कि इसमें कुछ पकड़े जायें, क्योंकि उन्होंने बुद्धि पर ताला लगा लिया है. इस संक्रमण को नियंत्रित करने का काम नेता का है. लेकिन हमारे नेता या तो असहाय हैं या उनसे मिले हुए हैं, जो स्वीकार योग्य नहीं है.

जनदबाव के कारण ही कभी-कभार जवाबदेही तय होती है. इस्तीफे पर किसी को हटाया नहीं जाता, केवल चुनावी संभावनाओं के डर से ऐसा होता है. दोषियों ने भी व्यवहार का एक असाधारण गुण हासिल कर लिया है, जैसे कि कुछ हुआ ही ना हो. दिल्ली शीशे का घर है. सभी कानाफूसी करते हैं, लेकिन कोई पत्थर नहीं फेंकता.

आपने कभी हंसती प्रतिमा नहीं देखी होगी. हंसी वीरता का प्रतीक नहीं होती. यहां तक की हंसते बुद्ध की प्रतिमा मजाक की तरह है. ऐसे मूर्तिकार जो महात्मा की दिव्य हंसी को पकड़ने की कोशिश करते हैं, वे उन्हें बिना दांत के प्रश्न-चिन्ह में तब्दील कर देते हैं. लेकिन आप हमेशा रोती हुई प्रतिमा को देख सकते हैं. नहाने के समय इस पर गौर करें. इन दिनों स्वर्ग में भारी बारिश हो रही होगी.

*लेखक ‘द संडे गार्जियन’ दिल्ली व 'इंडिया ऑन संडे' लंदन के संपादक और इंडिया टुडे, हेडलाइंस टुडे के एडिटोरियल डायरेक्टर हैं.

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