भड़ास पिता डॉ. रुपेश श्रीवास्तव का एक अवतार, हरफनमौला भडासी जो कभी मर नहीं सकता.



हरफनमौला डॉ. रुपेश श्रीवास्तव सिर्फ एक डाक्टर, या सिर्फ एक लड़ाका, या सिर्फ हाँ हमेशा हंसने वाला सब को हंसाने वाला इंसान नहीं था. भड़ास पिता एक वो संवेदना का नाम है जिसके हँसते मुश्कुराते चेहरे के पीछे केवल सरोकार होता था. सामाजिक जिम्मेदारी और दायित्व ऐसा की मुंबई में रहते हुए माफिया से दो दो हाथ करने वाला अगर को फक्कड़ फकीर था तो वो डॉ. रुपेश श्रीवास्तव था. 

अपने संवेदना को साकार करने के लिए ही लंतरानी मीडिया हॉउस ने बनाया एक लघु फिल्म "प्रश्न", मुख्य पात्र में डॉ. साहब ने किरदार के साथ जो प्रश्न उठाये हैं वो आज भी निरुत्तर हैं, किसी भी सफेदपोश की ना ही हिम्मत और ना ही औकात की प्रश्न का उत्तर दे सके. उत्तर के लिए जो संवेदना चाहिए वो संवेदनहीन समाज में है नहीं और भड़ास अपनी संवेदना के साथ प्रश्न को उठता रहेगा.




अदाकारी के रूप, हकीकत के पास 



अदाकारी के रूप, हकीकत के पास 




आज भले ही डॉ. साहब सदेह उपस्थित नहीं हैं, मगर भड़ास भड़ास का ये मंच जारी रहेगा, और जारी रखेगा अपने संथापक के आदर्श, सिद्धांत और कार्यों को.

भड़ास पिता डॉ. रुपेश श्रीवास्तव का एक अवतार, हरफनमौला भडासी जो कभी मर नहीं सकता. भड़ास पिता डॉ. रुपेश श्रीवास्तव का एक अवतार, हरफनमौला भडासी जो कभी मर नहीं सकता. Reviewed by Sushil Gangwar on May 12, 2012 Rating: 5

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