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Saturday, 26 May 2012

बढ़ी हुई महंगाई

आज-कल की  बढ़ी हुई  महंगाई से और अब पेट्रोल की बढ़ी कीमतों से सरकार चलाने वालो को और उनसे जुड़े नुमाइंदो को कोई फर्क नही पड़ता क्यूंकि उन्हें अपने जेब से पेट्रोल के पैसे नहीं देने पड़ते सरकारी खज़ाना उनका बोझ उठाती है और वो सिर्फ एसी की हवा लेते हुए सफ़र करते है.,और तो और अपना कद बताते हुए गाडियों के लम्बे काफिले  साथ ले के चलते है जिसमे के इधन का पैसा भी सरकारी खजाने से ही निकलता है..
इसके साथ  गौर करने वाली वाली ये भी बात है की सरकारी गाडियों में जो पेट्रोल और डीजल भराया जाता है उसमे हेरफेर भी पम्पकार्मियो और वाहन चालको के जुगलबंदी से होता है., इस बात को बहुत से लोग जानते भी होंगे और कुछ लोगो के सामने ऐसी बात कभी हुई भी होगी.,
इस बढ़ी हुई कीमत से उनकी आमदनी और बढ़ जाएगी जो सभी लोग इस कार्य को अंजाम देते है..
पता नहीं क्यों सरकार आँख मूंदकर सत्ता सुख लेती है.. क्यों सुध नहीं लेती आम आदमी के हालात की..
कितनी भयावाह मंजर बनाये जा रही है ये बढती महंगाई ये सत्ता में बैठे लोग जिसे नजर अंदाज़ कर रहे है.,
महेनताना और आय बढ़ नही रहा पर खर्च कई गुना बढ़ गया है देखते-देखते..
आम आदमी को अपनी आम जरुरत पूरी करने के लिए कितनी जदोजहद करनी पड रही है इस बात की शासन-प्रशासन बिलकुल गौर नहीं कर रहा..
आम आदमी अगर कही नौकरी कर रहा है तो उसकी तनख्वाह आज २००० से अधिकतम ६००० तक ही है..
मैं उनकी बात कर रहा हु जो ज्यादा पढ़े लिखे नहीं है और दुकानों में डिस्पेचिंग आदि का काम करते है.,
अब मेरी बात पे गौर करके अंदाज़ा लगाइए की ३२ रूपए लीटर की दूध.,
६० रूपए किलो की दलहन..२० रूपए किलो की चावल..
९० रूपए लीटर की खाने की तेल.. घर के सदस्यों की हिसाब से इनकी जरुरत..और इन सब के बाद रोज़ आने वाली साग-सब्जी..
जिसको लेने बाज़ार जाओ तो समझ में आता है की वाकई महंगाई आसमान छू रही है..
आलू १६ रूपए किलो.,टमाटर २० रूपए किलो.,
इसके बाद हर मौसमी सब्जीया भी ३० से ४० रूपए से कम नहीं मिल रहा..
हर तरफ जमाखोरों का आतंक जिसकी वजह से फसल लगाने वाले तो नही बिचोलिये ही चांदी काट रहे है.,
और इन सब में पिस रहा है माध्यम वर्गीय गरीब आम आदमी..
जो पेट की जरुरत पूरा करने में ही अपनी आय को ख़त्म कर देता है..
उसके बाद पहनना और रहना..रोटी कपडा और मकान इन तीन ज़रूरत में एक मैंने जो बहुत जरुरी है उसका विश्लेषण कर दिया.,
बाकी मकान अगर बाप-दादाओं का है तो ठीक नहीं तो २५००-३००० रूपए से कम में शहरी इलाको में रहने के लिए कमरा भूल जाओ.,
कपडा तो ख़ास मौके पे कभी ही लिए जाते है पर घर में अगर बच्चे है तो बाल इच्छाए को पूरा करना पालकों को मन-बेमन करना पड़ता है.,
अब इतनी बढ़ी हुई महंगाई के दौर में आम आदमी अपना परिवार किस तरह से चला रहा है इसपर सरकार को गौर अवश्य ही करना चाहिए..
नही तो आने वाले दिनों में इसका दुष्परिणाम हमे देखने को मिलेगा..
जब राजा प्रजा के हित का ख्याल नही करता सिर्फ अपने राज़ में मदमस्त हो जाता है.,
उसी वक़्त एक विद्रोह का सुर उठता है जो बवंडर का रूप ले के तबाही का मंजर दिखाता है..
अगर समय रहते इन पहुल्वो पे गौर कर इस महंगाई पे नियंत्रण कर आम आदमी को राहत नही दिलाई जाएगी तो आने वाला समय हमारे देश और लोकतंत्र के लिए
बहुत घातक सिद्ध होगा जो भारतीय इतिहास के लिए शर्मनाक होगा..
जय हिंद.,वन्दे मातरम्..



sudheer aazaad <aazaadinternational@gmail.com>

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