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वरिष्‍ठ पत्रकार यूसुफ अंसारी का पीस पार्टी से इस्‍तीफा



वरिष्‍ठ पत्रकार एवं पीस पार्टी के वरिष्‍ठ सदस्‍य यूसुफ अंसारी ने इस्‍तीफा दे दिया है. पार्टी में दूसरे नम्‍बर की हैसियत रखने वाले यूसुफ पार्टी के अंदर की गतिविधियों से नाराज थे. पीस पार्टी का जाना पहचाना चेहना माने जाने वाले यूसुफ कई सामाजिक संगठनों से भी जुड़े हुए हैं. लम्‍बे समय तक जी न्‍यूज को अपनी सेवा देने वाले यूसुफ लगभग दो साल पहले जी न्‍यूज से इस्‍तीफा देकर चैनल वन के हेड बन गए थे.
यूसुफ ने अपनी वेबसाइट पर लिखा है कि वो कार्यकर्ताओं के अपमान एवं पैसों की लूट से घुटन महसूस कर रहे थे. उन्‍होंने पीस पार्टी के अध्‍यक्ष को लिखे गए पत्र को भी अपने ब्‍लाग पर डाला है. यूसुफ के साथ पार्टी के राष्ट्रीय सचिव रहे शमीम अंसारी, प्रदेश महासचिव रेहान अंसारी एडवोकेट, मोहम्मद इब्राहीम, मध्य उत्तर प्रदेश के महासचिव रहे अरुण मौर्य, पश्चिम उत्तर प्रदॆश के महासचिव रहे ज़ाहिद ताज, इश्तियाक़ मोहम्मद, अनीस क़ुरैशी के साथ संगठन के सैकड़ों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. यूसुफ का पत्र.

सेवा में,                                                              दिनांकः 18.04.2012

जनाब डॉ. अय्यूब साहब अस्सलामु अलैयकुम,

पिछले साल हुए आपके एक्सीडेंट के बाद 20 जून 2011 को मैं (यूसुफ़ अंसारी) और शमीम अंसारी आपसे मिलने बड़हलगंज गए थे। तब आपसे पीस पार्टी के मिशन, विज़न, नीतियों, कार्यक्रम और चुनावी एजेंडे पर काफ़ी देर चर्चा हुई थी। चर्चा के बाद आपने हमें पार्टी में शामिल होने का न्योता दिया था। उस वक़्त आपने कहा था कि हमारी पार्टी का दायरा दिनों दिन बढ़ रहा है। इसे संभालने के लिए हमें आपकी ज़रूरत है। आपकी पेशकश पर ग़ौर करते हुए हम 22 जुलाई 2011 को लखनऊ में पार्टी में शामिल हुए।

पार्टी में आपने मुझे राष्ट्रीय महासचिव और शमीम अंसारी साहब को राष्ट्रीय सचिव बनाया। हमने पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए पूरी लगन और सत्यनिष्ठा के साथ काम किया। आपके आदेशानुसार पहले मैंने लखनऊ मंडल में और बाद में पश्चिमी उत्तर प्रदेश पार्टी का संगठन खड़ा करने और पार्टी को मीडिया में कवरेज दिलाने के लिए जी तोड़ प्रयास किए। तमाम टीवी क्षेत्रीय और राष्ट्रीय टीवी चैनलों पर होने वाली चुनावी बहस में मैंने पार्टी के प्रतिनिधि के तौर पर शामिल होकर अहम मुद्दों पर पार्टी का नज़रिया जनता को सामने रखा। इससे पार्टी को उत्तर प्रदेश के बाहर राष्ट्रीय एवं अंतर-राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली।

शमीम अंसारी साहब ने पार्टी निर्देशों का पालन करते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कांठ, अमरोहा और बिलारी विधान सभा सीटों पर बतौर प्रभारी काम किया। इनमें से कांठ सीट पर हमें जीत हासिल हुई। अमरोहा और बिलारी सीट पर क्रमशः 26 हज़ार और 16 हज़ार से ज़्यादा वोट मिले।

लेकिन गत 8 अप्रैल 2012 को हुई पार्टी की बैठक में आपने जिस राष्ट्रीय कार्यकारिणी का ऐलान किया उस सूची में हमारे साथ-साथ उन तमाम लोगों के नाम ग़ायब हैं जिन्होंने अपना खून पसीना बहा कर रात-दिन एक करके पार्टी के लिए क़ुर्बानी दी। इससे लगता है अब आपको मन तन और धन से पार्टी को सींचने वाले लोगों की ज़रूरत नहीं रह गयी है। आपको धनबल और बाहुबलियों की ही ज़रूरत है। आप पार्टी को मनमाने ढंग से चला रहे हैं। आपके स्तर पर लगातार एक के बाद एक ग़ल्ती हो रही है लेकिन न तो अपनी ग़ल्तियों को सुधारने को तैयार हैं और न ही आप किसी की सुनने को ही तैयार हैं। आपकी कुछ ग़ल्तियों की तरफ मैं आपका ध्यान खींचना चाहूंगा।

कार्यकर्ताओं का अपमान : पार्टी में अपना वक़्त और अपना पैसा लगाकर काम करने वाले आम कार्यकर्ताओं को वाजिब सम्मान नहीं मिल रहा है। हर मौक़े पर आम कार्यकर्ताओं के सम्मान को ठेस पहुचाई जा रही है। खुद आपने कई मौक़ो पर कार्यकर्ताओं को सरेआम अपमानित किया है। 18 मार्च 2012 को सहकारिता भवन में हुई समीक्षा बैठक के दैरान आपने पार्टी के राष्ट्रीय सचिव इक़बाल भारती को सरेआम ज़लील किया। साथ ही कई और कार्यकर्ताओं को बोलते हुए बीच में ही रोक कर उन्हें अपमानित किया। आपके पश्चिमी उत्तर प्रदेश और दिल्ली दौरे के दौरान भी सार्वजनिक तौर पर कार्यकर्ताओं के अपमान का सिलसिला नहीं रुका। पार्टी में कार्यकर्ताओं को अपनी बात कहने के लिए कोई फोरम मुहैया नहीं है। पार्टी में नीतियों, कार्यकर्मों और एजेंडे पर स्वस्थ्य बहस की न कोई व्यवस्था है और न ही इसकी आगे कोई गुंजाइश ही नज़र आती है। इन बातों को लेकर पार्टी कार्यर्ताओं में रोष है।

मिशन से भटकाव : पीस पार्टी दलित, पिछड़े और मुसलमानों को इंसाफ दिलाने के मिशन और समाज के सबसे निचले तबक़े को उपर उठाने की नीति से पूरी तरह भटक चुकी है। चुनाव में पार्टी ने इन तबक़े के नेताओं को पूरी तरह नज़र अंदाज़ किया और बाहुबलियों एंव अपराधी क़िस्म के लोगों को तरजीह दी। इस बाबत मैंने आपको कई बार आगाह किया लेकिन आपने एक नहीं सुनी। उल्टे अख़बार को दिए बयान में आपने इन बाहुबलियों और आपराधी क़िस्म के लोगों को पीस पार्टी की ताक़त क़रार दिया। इससे आम जनता में आपके साथ-साथ पार्टी की भी छवि ख़राब हुई और हमें चुनाव में इसका ख़ामियाजा भुगतना पड़ा।

कथनी और करनी में फ़र्क़ : 23 जुलाई 2011 को आपने दारुल शफ़ा में आयोजित कार्यकर्ताओं की मासिक बैठक में कहा था- “पीस पार्टी परिवार वाद पर नहीं चलेगा। अगर मेरा बेटा भी चुनाव लड़ना चाहेगा तो उसे पहले आम कार्यकर्ता के रुप में कम से कम एक साल तक पार्टी का काम करना होगा।“ लेकिन दो महीने बाद ही अपने इस ऐलान से पलटते हुए आपने अपने बेटे इंजीनियर मोहम्मद इरफ़ान को मुबारकपुर सीट से उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस बाबत संसदीय बोर्ड मे आपने चर्चा तक नहीं की।

एक जनवरी 2012 को रवींद्रालय, लखनऊ में हुई उम्मीदवारों की ट्रेनिंग के दौरान आपने राष्ट्रीय अध्यक्ष और ज़िला अध्यक्ष के बीच के सारे पद समाप्त करने का ऐलान किया था। इस मौक़े पर आपने कहा था कि चुनाव के बाद जीतकर आने वाले या जिताकर लाने वालों को नए संगठन मे जगह दी जाएगी। लेकिन आपने किया इसके एकदम उलट।

1)      चुनाव में पांचवे स्थान पर रहकर अपनी ज़मानत गंवाने वाले अपने बेटे इंजीनियर मोहम्मद इरफ़ान को आपने पार्टी में अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।

2)      चौथे नंबर पर रहकर बुरी तरह हारने वाले प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अब्दुल मन्नान को फिर से इसी पद पर मनोनीत कर दिया।

3)      पार्टी फंड के नाम पर खुले आम पैसा बटोर कर पार्टी की छवि को गहरा बट्टा लगाने वाले एम जे खान को फिर से राष्ट्रीय महासचिव बनाकर पूरे देश में पार्टी का संगठन खड़ा करने की ज़िम्मेदारी सौंप दी।

4)      विषम परिस्थितियों में चुनाव जीतने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक मात्र विधायक अनीसुर्हमान सैफ़ी को आपने किसी भी ज़िम्मदारी के लायक़ नहीं समझा।

5)      आपने दूसरी पार्टियों के कई बड़े नेताओं को टिकट का भरोसा देकर पीस पार्टी में शामिल कराया लेकिन ऐन मौक़े पर उन्हें टिकट देने से साफ़ इनकार कर दिया। इससे आपकी और पार्टी की विश्वसनीयता एकदम ख़त्म हो गयी।

6)      पार्टी फंड और हैलीकॉप्टर की फीस इस शर्त पर जमा कराई गयी थी टिकट नहीं मिलने या हैलीकाप्टर नहीं उतरने पर ये रक़म वापिस की जाएगी। लेकिन ये वादा भी पूरा नहीं किया गया। कई लोगों आपके घर और पार्टी कार्यलय के चक्कर लगा-लगा कर थक चुके हैं। आपके यहां उन्हें अपमान के सिवा कुछ नहीं मिला।

जनता के पैसे का दुरुपयोग

आपके प्रचारकों ने पिछले चार साल लगातार ये प्रचार किया है कि डॉ. अय्यूब साहब अपनी खून पसीने की कमाई से करोड़ों रुपए लगाकर पार्टी चला रहे हैं। ये एकदम झूठा प्रचार है। सच तो ये है कि पार्टी आम कार्यकर्ताओं के खून पसीने के पैसे से चल रही है। चुनावों के दौरान टाइम्स ऑफ़ इंडिया अख़बार में छपे आपके इंटरव्यू के मुताबिक पार्टी के एक लाख से ज़्यादा सक्रिय कार्यकर्ता है। अब ज़रा हिसाब लगाइएः

सक्रिय कार्यकर्ता की फीस रुपए 1100/- है। इस हिसाब से पार्टी फंड में 11 करोड़ रुपए सिर्फ़ सक्रिय सदस्यता शुल्क के रूप में आए।

200 उम्मीदवारों नें पार्टी में टिकट की फॉर्मेलिटी पूरी करने के नाम पर बतौर फीस (नॉन रिफंडेबिल) दस हज़ार रुपए और एक लाख रुपए पार्टी फंड में दिए। इस मद में पार्टी फंड में 2 करोड़ बीस लाख रुपए आए।

टिकटों के बटवारें के समय वभिन्न सीटों पर आपने और राष्ट्रीय महासचिव एम जे ख़ान मानमाने तरीक़े से पार्टी फंड के नाम पर पांच लाख से लेकर 25 लाख रुपए तक उम्मीदवारों से वसूले। अगर पांच लाख के औसत से 100 उम्मीदवारों ने भी पार्टी फंड में चंदा दिया तो ये रक़म कम से कम 5 करोड़ रुपए बैठती है।

हैलीकॉप्टर से मीटिंग कराने के नाम पर उम्मीदवारों से एक मीटिंग का डेढ़ लाख रुपए वसूले गए। हैलीकॉप्टर से आपकी 100 से ज़्यादा मीटिंग हुईं। इस मद में पार्टी को मिली रक़म डेढ़ करोड़ रुपए बैठती है।

इस हिसाब से पार्टी को उत्तर प्रदेश चुनाव में कम से कम 20 करोड़ बीस लाख रुपए प्राप्त हुए।

हैलीकॉप्टर के किराए पर एक करोड़ रुपए ख़र्च हुए और इतनी ही रक़म साहित्य और प्रचार सामाग्री पर ख़र्च हुई। बाक़ी पैसे का कोई हिसाब किताब आपने पार्टी या राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सामने पेश नहीं किया। आप पार्टी कार्यकर्ताओं और प्रदेश की जनता को उससे उगाही गयी रक़म का हिसाब दें।

स्वयं का परिचय झूठ का पुलिंदा

“पीस पार्टी और उसका नेतृत्व” नाम से छपी पुस्तिका में आपका परिचय अनगिनत झूठ का पुलिंदा है। मसलन पेज न. 2 पर लिखा है कि डॉ अय्यूब नें पिछले 25 वर्षों में डेढ़ लाख से ज़्यादा मेजर(बड़े) और 50 हज़ार से ज़्यादा माइनर(छोटे) ऑपरेशन किए हैं। इसे एक विश्व रिकार्ड बताया गया है। मंचो पर कहा जाता है कि इसके लिए आपका नाम दो बार गिनीज़ बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में छपा है। ये एकदम झूठा प्रचार है। गिनीज़ बुक में आपका नाम कहीं नहीं है। तर्क की कसौटी पर भी ये दावा खरा नहीं उतरता। 25 साल में 9125 दिन होते हैं। अगर ये माना जाए कि बड़े और छोटे ऑपरेशन का औसत समय एक घंटा प्रति ऑपरेशन है तो इस हिसाब से बग़ैर एक दिन भी छुट्टी किए आपके एक दिन में 22 ऑपरेशन होते हैं। इल लिहाज़ से आपके पिछले 25 साल में आपके हर रोज़ 22 घंटे ऑपरेशन थियेटर में बीतने चाहिए। जो कि किसी भी तरह संभव नहीं है।

पीस पार्टी में सिर्फ़ आपका फरमान चलता है। आपका फरमान फतवे के समान है। इसके सही या ग़लत होने पर किसी तरह के सलाह मशविरे और बहस की कोई गुंजाइश नहीं है। ऐसे में मुझे पीस पार्टी का कोई भविष्य नज़र नहीं आता है। पार्टी बग़ैर किसी मिशन और विज़न के चल रही है। पार्टी की नीतियों और कामकाज की शैली पर बुरी तर नाकाम हो चुकी नेश्नल लोकतांत्रिक पार्टी की छाप साफ दिखाई देती है। नेश्नल लोकतांत्रिक पार्टी में रहे लोग ही इसे ठीक उसी तरह चला रहे है जैसे उन्होंने नेलोपा को चलाया था। लिहाज़ा पीस पार्टी का अंजाम भी नेलोपा जैसा ही होता नज़र आ रहा है।

चुनाव से पहले तैयार की गयी रणनीति और संसदीय बोर्ड की बैठक में लिए गए कई अहम फ़ैसलों को आपने बलाए ताक़ रख कर हर मामले में सिर्फ़ अपनी मर्ज़ी चलाई। आपके इसी हिटलर शाही रवैये के चलते पार्टी का बंटाधार हुआ। अगर सही रणनीति के मुताबिक़ चुनाव लड़े जाते तो हम कम से कम 40 सीटें जीतते। पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश में आपने खुद पार्टी के टिकट बेचे और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एम जे खान के ज़रिए टिकटों की बोली लगवाई। इससे आम जन मानस में पार्टी की छवि खराब हुई और इसका ख़ामियाज़ा हमे चुनावों में भुगतना पड़ा। बाद मे यही ग़लती दिल्ली के एमसीडी चुनाव में दोहराई गयी।

आपकी ग़लत नीतियों की वजह से ही पार्टी में कभी नवरत्न की हैसियत रखने वाले तमाम पूर्व IAS और IPS अधिरियों ने भी पार्टी छोड़ दी है। इमनें उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रधान सचिव एस पी आर्य, रमाशंकर सिंह, पूर्व डीजीपी यशपाल सिंह पूर्व एडीजीपी विजेंद्र सिंह, पूर्व आईजी आर पी सिंह समेत कई अन्य शामिल हैं।

ऐसे दमघोटूं हालात में हमारा पीस पार्टी में काम करना मुमकिन नहीं है। हमारी वफादारी देश के सबसे कमज़ोर तबक़े को आर्थिक, शैक्षिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से मज़बूत करने के मिशन के प्रति है। पीस पार्टी ने इस मिशन को पूरा करने का बीड़ा उठाया था तो हम उसके साथ आए थे। अब पीस पार्टी ने इस मिशन को छोड़ दिया है तो हम पीस पार्टी को छोड़ रहे हैं। आपको अपनी पार्टी और दौलत मुबारक। हमारे लिए कार्यकर्ताओं का सम्मान और हमारा मिशन सबसे ऊपर है। हम अपने मिशन की कामयाब करने के लिए जनता के बीच जा कर आख़िरी दम तक जद्दोजहद करेंगे।

ख़ुदा हाफ़िज़

यूसुफ़ अंसारी
Sabahr- Bhadas4media.com