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पत्रकारिता के लिए अपने परिवार को दांव पे लगा दिया

संजीव शर्मा-


मुझे आज भी वो दिन अच्छी तरह याद है , मैं एक न्यूज़ एजेन्सी मैं काम करता था , मेरी प्यास ,भूख , नींद सब खबर ही थी , पुलिस वालो से मेरी शुरू से ही नहीं बनती थी , हाँ इंटेलिजेंस ब्यूरो के कुछ लोगो से दोस्ती थी , मुझे उनसे खबर मिली थी कि हिमाचल मैं कुछ महिला दलाल हिमाचली बालाओं को खरीदने आ रही है , यह खबर इंटेलिजेंस ब्यूरो को उनके उस खबरी ने दे थी , जो खुद उन महिलाओं के लिए कुछ दिन तक काम करता आ रहा था , उन महिलाओं ने उसे कुछ पैसे भी दिए थे मकसद था , हिमाचल प्रदेश कि उन कम उम्र कि लड़कियों को हुस्न के बाज़ार मैं उतारना जिन्होंने कभी सेक्स नहीं किया हो , वो महिला दलाल मुँह मांगे पैसे देने के लिए तेयार थी , मुझे आशिक अली नाम के इन्फोर्मेर ने साफ़ कहा - सर मैंने खुद उन महिलाओं से पैसे लिए है लेकिन अब मेरा ज़मीर जाग चूका है क्यूँ कि मैं खुद किसी का भाई हूँ और पिता भी - हो सकता है कि कल वो महिलाएं मेरी बेटी को भी इस पेशे मैं उतारे इस लिए सर मैं उन्हें सलाखों के अन्दर पहुँचाना चाहता हूँ ,

मुझे उस इन्फोर्मेर कि बात मैं दम नज़र आने लगा था यह सच हैं , मैंने अपने न्यूज़ डेस्क को इन्फोर्म कर दिया था, पहले न्यूज़ प्रोड्यूसर टाल मटोल करने लगे लेकिन मैं भी नहीं माना यहाँ तक कि मेरी बहस तक हुई मुझे कुछ नज़र नहीं आ रहा था , मैं किसी भी हालत मैं उन महिला दलालों को बेनकाब करना चाहता था , लेकिन आसान यह काम भी नहीं था , हार के मुझे न्यूज़ शूट के लिए इजाज़त मिल ही गयी मैंने सबसे पहले उन दलालों के फ़ोन नंबर का पता लगाया , एक दिन आशिक अली ने मेरी बात उन दलालों से यह कहकर करवाई कि मैं हिमाचल का सबसे बड़ा दलाल हूँ , पहले उन महिलाओं ने मुझ से ठीक तरिके से बात नहीं कि , लेकिन कुछ दिनों के बाद उनका फ़ोन आया और उन्होंने कहा कितना माल हैं तुम्हारे पास मुझे यह समझते हुआ देर नहीं लगी कि माल का मतलब क्या है ? मैंने कहा हर तरह का माल मौजूद है बस बोली लगाओ यहाँ आकर , उन्होंने कहा कि हम जल्द आएंगे यहाँ मेरी परेशानी बड़ते जा रही थी क्यूँकि अब लड़किया कहाँ से लाता और फिर वो हुआ जो मैं चाहता भी था , और नहीं भी ...........

मुझे एक दिन फिर दलालों का देहरादून से फ़ोन आया मुझ से कहा गया कि माल तैयार रखना घटिया माल नहीं चलेगा फ्रेश कि जरुरत है ,,,, ये बोल सुनकर मेरे खून में आग लग गयी , मन खुद को भी कोसता था कि क्या ? मैं इन महिलाओं को बेनकाब कर पाउँगा ?

एक दिन फिर फ़ोन आया इस बार दलाल मेरे शहर से सिर्फ चंद किलो मीटर कि दूरी पर थे ,

इस बार फिर वही बोल मुझे कहा गया एक दिन के अन्दर एक दर्ज़न लड़की कि जरुरत है , मेरे पास कोई भी विकल्प नहीं था , उधर दूसरी तरफ न्यूज़ एजेन्सी का डंडा उन्हें किसी भी कीमत पर खबर कि जरुरत थी फिर चैनल के लिए स्ट्रिंगर कि औकात क्या होती है यह मेरे स्ट्रिंगर भाई भी सही तरिके से जानते है खबर ने भेजने का मतलब था कि रिपोर्टर ने पैसे निगल लिए है , वैसे मेरे लिए यह खबर स्वाभिमान कि लडाई भी थी क्यूंकि कि मैं साबित करना चाहता था कि किस तरह एक स्ट्रिंगर अपने सर पर मौत का कफ़न बांधकर जंग में उतरता है यह जानने के बावजूद भी की कब उसे दूध मैं मक्खी कि तरह निकाल कर फेंका जायेगा , मेरे सामने एक ही विकल्प था उन नाबालिग़ मासूम लड़किओं को बचा सकूँ जो हुस्न कि मंडी मैं नीलाम होने को तैयार बेठे थी , मैंने उन दलालों के आने से पहले फैक्ट्री मैं काम करने वाली कई महिलाओं से बात कि और कहा क्या वो मेरा साथ देगी लेकिन किसी ने भी मुझे भरोसा नहीं दिलाया मुझे हैरानी इस बात कि थी जिन महिलाओं से मैं मदद मांगना चाहता था वो कह रही थी कि आप हमारे साथ कुछ भी करें हमे मंज़ूर है लेकिन हम पुलिस के पचडे में नहीं पड़ना चाहते ,

इधर दूसरी तरफ महिला दलाल भी आने वाली थी सवाल यह था में उनके सामने किन लडकियों को पेश करता क्यूंकि समाज सूधारने का बीडा तो यहाँ पर मैंने ही उठाया था , लेकिन किसी ने मेरे मदद नहीं कि सही तो यह भी में यहाँ मदद मांग जरुर रहा था लेकिन मदद का मोहताज़ बिल्कुल नहीं था, में अच्छी तरह जानता हूँ कि खुदा भी उसकी मदद करता है जो खुद कि मदद करता है थक हार कर में अपने घर पहुंचा में काफी परेशान था दूसरी तरफ डेस्क से फ़ोन पर फ़ोन मुझ से जब मेरे घरवालो ने परेशानी का कारण पूछा तो आँखों से अश्क झलक आए में घर में फ़ुट फ़ुट कर रोया क्यूँ कि में कुछ नहीं कर पा रहा था , वहीँ अपनी समस्या अपने डेस्क को नहीं बता सकता था क्यूँ कि उन्हें समस्या नहीं बल्कि समाधान चाहिए था ,

मेरी बहन कि उम्र उस समय १६ साल थी उसने मुझे कहा भईया में उन महिला दलालों को बेनकाब करवाउंगी एक बात को उसने बड़े जोर से कहा कि भईया मेरे नाटक करने से अगर वो दलाल आपके जाल में फंस जाते है तो कम से कम बाकी नाबालिग़ लडकियों कि जान तो बच जायेगी , कम से हम किसी को हुस्न कि मंडी में जाने से तो वो बच जायेगी मुझे अपनी बहन कि बात पहले बुरी लगी लेकिन उसकी बात में उन लड़कियों के लिया दर्द भी छिपा था जिन्हें हुस्न कि मंडी के दरिन्दे फांस कर ले जाते है और बेच देते है , मेरी बहन मुझ से छोटी है लेकिन उसकी बात मेरी सोच से भी ऊँची थी , मैंने उसकी बात मान ली एक बार फिर मुझे दलालों का फ़ोन आया और बोला कि हमे लेने एक चौक पर आ जाओ मैंने अपनी गाडी उठाई और निकल पड़ा मिशन पर दो नेपाल मूल की महिला दलाल बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी , हम तीन लोग उन महिलाओं के पास गए मेरे दो और दोस्त थे वो लोग भी फर्जी दलाल बने थे हम बड़े प्यार से उन महिलाओं को अपने घर ले गए वहाँ पर मैंने पहले से ही स्पाई केम लगा हुआ था मैंने अपनी बहन से उन दोनों दलालों को मिला भी दिया मेरे सामने उन दलालों ने मेरे बहन से वो सवाल पूछे जो में बयाँ नहीं कर सकता में अन्दर ही अन्दर रो रहा था हार कर मैं में उन महिला दलालों के बीच से उठ गया क्यूँ के में वो सवाल बर्दाश्त नहीं कर सकता था वो पूछ रही थी मेरे बहन से ..... मेरे सिस्टर ने ऐसा जाल बिछाया कि वो दलाल फंस चुकी थी उन्होंने एक एक कर के अपने राज़ खोले और कहा बड़े बड़े बिल्डर्स और बड़े बड़े बाबू और कई बार तो नेता भी हम से लड़की कि डिमांड करते है हिमाचल के लड़किओं कि ज्यादा डिमांड है लेकिन हमे १५ साल से १८ साल तक कि जरुरत है जिनके दाम सही मिल जाते है हमारे पास एडवांस बुकिंग रहती है है हम हर महिला को १००० रूपए हर दिन देते है और जिनके साथ भी वो एक रात जाएगी उसका ६०० रूपए हर आदमी से अलग से मिलेंगे यहाँ यह भी कहा गया कि अभी भी एक दर्ज़न से ज्यादा लड़किया हमारे पेशे में जुडी है यह सारी बातें हमारे कैमरे में रिकॉर्ड हो रही थी चार घंटे के इस शूट में हुस्न के मंडी के कई सनसनी खेज राज खुल चुके थे , हम तीनो फर्जी दलालों में से एक मेरा दोस्त पुलिस को सारी बात बताने चला गया ताकि उन महिलाओं कि गिरफ्तारी हो सकती ,,, इधर दलाल हमारे जाल में फंस चुकी थी और अब दलालों ने एडवांस पेमेंट दे दी थी और वो मेरी सिस्टर को लेकर अपने साथ हिमाचल से देहरादून ले कर जा रहे थे लेकिन तभी मेरे घर से सिर्फ एक किलोमीटर दूरी पर पुलिस ने आरोपी दलाल महिलाओं को हिरासत में ले लिया क्यूँ की रिपोर्टर होने के साथ मेरी यह फ़र्ज़ भी था हम चाहते तो सिर्फ खबर दिखाते लेकिन हमने उन दलाल महिलाओं को जेल पहुंचा दिया इस तरह हमने सच को सामने रखा मुझे कभी कभी लगता है अपनी बहन को इस्तेमाल नहीं करना था लेकिन यह सच है आज तक कई नाबालिग़ अगर हमारा मिशन पूरा नहीं होता तो दर्ज़नों लडकियां आज भी जिस्म के बाज़ार में लूट रही होती आज मेरे बहन की शादी हो चुकी है और एक बच्ची कि माँ भी है यह खुलासा हिमाचल पत्रकारिता के इतिहास का पहला स्टिंग ऑपरेशन था अगले दिन हर न्यूज़ पेपर की खबर मैं पहले पन्ने पर हम थे शायद ही किसी रिपोर्टर ने कभी अपने पेशे के लिए अपने परिवार को दाव पर लगाया हो हमने भी सिर्फ इस लिए अपने कदम पीछे नहीं किया क्यूँ की मेरा पेशा ही मेरा जूनून था .......... मैंने कई खुलासे किये लेकिन एक चैनल के लिए स्टिंगर USE AND THROUGH से ज्यादा कुछ नहीं मैं आज उस चैनल मैं नहीं हूँ ..... मुझे भी मक्खी की तरह दूध से निकल कर फेंक दिया गया ...... सिर्फ इस लिए क्यूँ की मैं एक मिशन मैं फ़ैल हो गया ...... लेकिन आज मैं ताल ठोक कर कह सकता हूँ .... मैं असल जिंदगी में पास हूँ और रहूँगा क्यूंकि बेईमानी ...चाटुकारिता ...चापलूसी ....मेरी खून मैं नहीं हैं और जिस दिन आएगी उस दिन मीडिया को अलविदा कहूँगा ....आज मैं एक अच्छे चैनल मैं हूँ और पोस्ट मैं भी खुद से ज्यादा मुझे आपने टीम पर भरोसा है ..... बस उस खुदा ये ही दुआ है ..... ऊंचाई तक पहुँचाना जरूर लेकिन ज़मीन से दूर भी ना करना जो कुछ मेरे साथ मेरे चैनल ने उस दौरान किया मैं कभी अपने स्टिंगर के साथ न ऐसा न कर सकूँ ....


Sanjeev Sharma
CITY CHANNEL SHIMLA
092185 88199

Sabhar-journalistcommunity.com

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