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Tuesday, 3 January 2012

अपनों से घिरती माया


अपनों से घिरती माया

चुनाव की दहलीज पर खड़ी बसपा नेत्री को सबसे ज्यादा परेशानी अपने ही लोगों से हो रही है। राजनीतिक खेमें से लेकर उनके परिवार तक परेशानियों का अम्बार इकट्ठा होता जा रहा है। विपक्षियों पर हमला करने की जगह बसपा नेत्री को अब अपनों से लड़ाई और उनसे ही बचाव की तरकीबें ढूंढनी पड़ रही हैं। जाहिर है यह मायावती को परेशान भी कर रहा है और हैरान भी। पिछले विधानसभा सत्र से ठीक पहले उनके सबसे करीबी रहे बाबू सिंह कुशवाहा के खत में पूरी सरकार की कंपकपी चढ़ा दी थी। सभी लोगों का मानना था कि दिल्ली सरकार अब सीबीआई के जरिए माया को घेरने के लिए बाबू सिंह कुशवाहा को सरकारी गवाह बनायेगी। बाबू सिंह कुशवाहा से कुछ बड़े कांगे्रसियों की मुलाकात ये संकेत भी दे रही थी। उस समय पहली बार कड़वा घूंट पीकर मायावती को उन लोगों को पार्टी में वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी थी जिन्हें वे शान के साथ पार्टी से निकाल चुकी थीं। ऐसा उन्हें मजबूरी में इसलिए करना पड़ा था क्योंकि विपक्ष ने सदन में उनकी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का ऐलान कर रखा था। ऐसे में संख्या बल बढ़ाने के लिए जरूरी थी कि उन रूठे लोगों को भी साथ ले लिया जाए जिन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया जा चुका है। ये बात दीगर है कि सदन में यह प्रस्ताव रखा ही नहीं जा सका। बाबू सिंह कुशवाहा के बाद बसपा सरकार में प्रभावशाली विधान परिषद सदस्य राम चंदर प्रधान के खिलाफ सीबीआई ने घेराबंदी तेज कर दी है। अब सबसे ज्यादा हमला उनके सबसे करीबी और डेढ़ दर्जन विभाग संभाल रहे काबीना मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी पर किया जा रहा है। किसी भी तरह सीबीआई पैसों के लेन-देन को लेकर माया सरकार के सबसे खास सिपहसालारों की घेराबंदी करना चाहती है। जिससे चुनाव से पूर्व मायावती को उनके ही घर में घेरा जा सके। मायावती का यह दुर्भाग्य है कि जब उन पर हमला होता है तो उनके अलावा दूसरी कतार में ऐसा कोई नेता नहीं है जो इस हमले का जवाब उतनी ही दमदारी से दे सके। ऐसे में माया को अपने सिपहसालारों पर हुए हमले का जवाब देने के लिए खुद ही मैदान में उतरना पड़ता है। अब भाजपा नेता किरीट सोमैया ने मुख्यमंत्री मायावती के परिजनों की सम्पत्ति का खुलासा करके उनकी मुसीबतें और बढ़ दी हैं। मुख्यमंत्री के अनुज आनंद के खिलाफ दस्तावेज जारी करके धोखाधड़ी की शिकायत प्रवर्तन निदेशालय से लेकर बाकी सभी सरकारी एजेंसियों से करने की बात कहकर बसपा नेत्री की धड़कने बढ़ दी हैं। ये सारे हमले बसपा नेत्री को खुद ही झेलने हैं और पलट कर खुद ही हमला करना है। सिर्फ राजनीतिक गलियारे और अपने परिवार पर हो रहे हमलों की मार ही बसपा नेत्री को नहीं झेलनी है इसके अलावा बुरी तरह से राजनीतिक बिसात बिछा रहे उनके अपने करीबी नौकरशाह भी मुसीबत नहीं बने हुए हैं। सरकार बनने के बाद से अब तक माया दरबार के योद्धाओं में गुटबंदी इस हद तक बढ़ गयी है कि उसका कोई भी निदान ढूंढा नहीं जा सका है। पंचम तल पर तैनात अफसर एक-दूसरे को नीचा दिखाने का कोई मौका हाथ से छोडऩा नहीं चाहते। सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री के करीबी एक बड़े आईएएस अफसर के महत्वपूर्ण दस्तावेज भी सीबीआई को उपलब्ध करा दिये गये हैं। चुनाव से पहले इस अफसर की घेराबंदी करके उससे भी कुछ बड़े राज उगलवाने की तैयारी की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि अभी तक एनआरएचएम में राज कर रहे तेज-तर्रार आईएएस अफसर प्रदीप शुक्ला सिर्फ मंदिरों, पुजारियों और तांत्रिकों के चक्कर ही नहीं लगा रहे उन्होंने साफ तौर से पंचम तल के बड़े अफसर से कह दिया है कि अगर उन पर हाथ डाला गया तो वे अकेले ही इस मामले में गुनाहगार नहीं बनेंगे बल्कि ‘सब’ बता देंगे। जाहिर है कि अगर ऐसे किसी भी बड़े नौकरशाह की घेराबंदी हो गयी तो आराम से पता चल जायेगा कि अरबों रुपए की सम्पत्ति कहां से वसूल की जाती थी और कहां तक जाती थी। चुनाव की दहलीज पर खड़ी मायावती के लिए यह बेहद परेशानी भरी बात है। इस समय वे विपक्ष पर हमला करना चाहती थीं मगर उन्हें इसकी जगह सुरक्षात्मक रवैया अपनाने को बाध्य होना पड़ रहा है। इससे वे और उनकी टीम खासी परेशान है
Sabhar:- Weekandtimes.com

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