बेटे को जिताने के लिए दांव पर लगे बाबूजी


By  - Sabhar:-visfot.com

बेटे को जिताने के लिए दांव पर लगे बाबूजी
जनपद की बहुचर्चित विधानसभा दरियाबाद सीट पर अब मामला काफी रोचक हो गया है। एक तरफ जहां केन्द्रीय इस्पात मंत्री अपने बेटे राकेश वर्मा को जिताने के लिए शाम-दाम-दंड-भेद वाली सारी नीति अपनाकर अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया है, वहीं दूसरी तरफ समाजवाद का झंडा गाड़ने वाले राजा राजीव और भाजपा के जुझारू नेता व घोषित प्रत्याशी सुन्दरलाल सबसे बड़े कांटे के रूप में इनके सामने ताल ठोक कर खड़े हैं। जबकि बसपा से विवेकानंद भी किसी भी तरह से किसी से कम नजर नहीं आ रहे हैं।
जनपद बाराबंकी की बहुचर्चित विधानसभा सीट दरियाबाद में इस बार रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा। इस सीट पर पिछले विधानसभा में एसकेडी से चुनाव लड़ने वाले केन्द्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा के पुत्र राकेश वर्मा इस बार कांग्रेस के झंडे के नीचे चुनाव लड़ने के लिए चुनावी समर मंे उतरे हैं। स्थानीय कांग्रेसी नेताओं के लाख विरोध के बावजूद बेनी ने अपने लड़के को टिकट दिलाने में सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने इस चुनाव की कमान खुद अपने हाथों में संभाल रखी है। इस बार दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र में विकास खंड बनीकोडर को भी जोड़ा गया है।
पिछले चार माह के अंदर बेनी बाबू ने अपनी ताकत का एहसास कराने की खातिर दर्जनों जनसभाएं की और गांव-गांव जाकर उन खास असरदार लोगों के घर चाय भी पी जिससे इनको यह लगता था कि असरदार लोग चुनाव के समय उनके साथ खड़े होंगे। इतना ही नहीं बेनी बाबू ने हर चौराहे और गलियों में बड़े बड़े बैनर पोस्टर लगवा करके अपना सब कुछ झोंक दिया था। जिससे क्षेत्र की जनता को यह लगे कि राकेश का चुनाव किसी मामले में कम नहीं होगा। लेकिन इतना सब कुछ करने के बावजूद भी वह चुनाव मैदान में नजर तो आ रहे हैं लेकिन अभी तक उन्होंने न तो समाजवादी गढ़ कहे जाने वाले दरियाबाद क्षेत्र के प्रमुख लोगों को तोड़ पाये हैं और न ही उनका ताम झाम इन लोगों को रिझाने में ही कामयाब हो सके हैं।
केन्द्रीय मंत्री वैसे मंचों पर यह दावा करते हैं कि प्रदेश में उनकी सरकार बननी तय है और वह मुख्यमंत्री पद के दावेदार भी हैं। लेकिन उनका यह दावा उन खास मतदाताओं पर पूरी तरह से बेअसर साबित हो रहा है जो गांव की झोपड़ियों में रहकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। इतना ही नहीं बेनी के आगे सबसे बड़े कांटे के रूप में सपा प्रत्याशी राजा राजीव कुमार सिंह, भाजपा के प्रत्याशी सुन्दरलाल दीक्षित और बसपा के प्रत्याशी विवेकानंद पाण्डेय नजर आ रहे हैं। इसके अलावा छोटे दलों में पीस पार्टी, लोकमंच, राष्ट्रीय क्रान्ति दल आदि के छोटे उम्मीदवार भी इनके रास्ते का रोड़ा बनने में कोई कोर कसर बाकी नहीं रख रहे हैं।
अभी तो चुनाव का काफी वक्त पड़ा है लेकिन जिस भौकाल से बेनी बाबू ने अपने लड़के को चुनाव मैदान में उतारने के बाद यह सोचा था कि दरियाबाद क्षेत्र में बाजी मार ले जायेंगे, वह सपना अभी उनका पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। कुल मिलाकर बेनी बाबू ने अपनी सारी ताकत जनपद के एक ही विधानसभा सीट पर लगा रखी है जिसका असर अन्य सीटों पर पड़ता नजर आ रहा है
बेटे को जिताने के लिए दांव पर लगे बाबूजी बेटे को जिताने के लिए दांव पर लगे बाबूजी Reviewed by Sushil Gangwar on January 04, 2012 Rating: 5

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