कुशवाहा को लेकर भाजपा में जबरदस्त खेमेबन्दी



देवकी नन्दन मिश्र/एसएनबी----
भाजपा की मुश्किल कुशवाहा को रखे या दिखा दे बाहर का रास्ता
लखनऊ । भारतीय जनता में शामिल होने के चौबीस घंटे के भीतर एनआरएचएम घोटाले के मुख्य आरोपी पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा व उनके समर्थकों के घरों पर की गयी सीबीआई की छापेमारी के बाद भाजपा और मुश्किल में फंसती नजर आ रही है। कुशवाहा को पार्टी में रखा जाय या फिर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया जाय इस पर जबरदस्त मंथन चल रहा है। कुशवाहा को लेकर भाजपा नेतृत्व दो खेमों में बंट गया है। पता चला है कि कुशवाहा को भाजपा में लेने पर पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवानी ने पार्टी के बड़े नेताओं से कड़ा ऐतराज जताया है। भाजपा के जो नेता मंगलवार को कुशवाहा के साथ बैठकर उन्हें पाक साफ बता रहे थे आज इस मुद्दे पर जवाब देने के लिए मीडिया के सामने आये तो लेकिन सवालों का सटीक जवाब नहीं दे पाये। अलबत्ता सीबीआई के छापे के बावजूद कुशवाहा को पाक साफ बताते रहे।
कुशवाहा मामले में भाजपा नेताओं का इंटेलीजेंस कमजोर होने को लेकर भी जबरदस्त किरकिरी हो रही है। जिस कुशवाहा व उनके समर्थकों के घरों पर सीबीआई छापे की योजना बना रही थी और भाजपा के रणनीतिकारों को तनिक भी इसकी भनक नहीं लगी और उनके शामिल किये जाने पर मुहर लगा दी। २०१२ के चुनाव में येन केन प्रकारण यूपी की सत्ता पर काबिज होने का ख्वाब देख रही भाजपा को रणनीतिकारों ने समझाया था कि कुशवाहा के शामिल होने से प्रदेश का चार फीसदी कुशवाहा वोट भाजपा की तरफ हो सकता है लेकिन शायद इस बिन्दु पर किसी ने गौर नहीं किया कि कुशवाहा कभी भी अपनी बिरादरी के नेता के रुप में नहीं जाने गये। कभी कोई चुनाव बाबू सिंह कुशवाहा ने नहीं जीता। कुशवाहा पहले तो सुश्री मायावती के पीए के तौर पर काम करते थे और बाद में उन्हें एमएलसी बना दिया गया। मायावती के किचन कैबिनेट का होने की वजह से सरकार में उनका प्रभुत्व था और महत्वपूर्ण विभागों में उनकी दखल थी। परिवार कल्याण मंत्रालय में हजारों करोड़ के एनआरएचएम घोटाले के साथ ही उनकी यूपी के खनन घोटालों में भी हाथ होने की जांच चल रही है। मायावती व कुशवाहा के भ्रष्टाचार के खिलाफ एक माह से मुहिम चला रही भाजपा ने कुशवाहा को गले लगाते समय यह कत्तई नहीं सोचा था कि सिर मुड़ाते ही ओले पड़ने वाले हैं। भाजपा में उनके शामिल होने के २४ घंटे के भीतर सीबीआई की उनकी यहां रेड पड़ सकती है। सीबीआई सूत्रों की मानें तो कुशवाहा की इस मामले में जल्द ही गिरफ्तारी भी हो सकती है। ऐसे में भाजपा उन्हें बांदा से टिकट दिया जाय या नहीं इसे लेकर आज दिल्ली में जबरदस्त मंथन हुआ। कई नेताओं ने तर्क दिये कि कुशवाहा घुसे तो मीडिया के सामने लेकिन उन्हें सामने लाने की बजाय साइड में ही रखा जाय। मतलब उन्हें विधान सभा का चुनाव न लड़ाया जाय। कुछ नेताओं ने तो कहा कि अभी गनीमत है और कुशवाहा को बाहर का रास्ता दिखाकर इस गलती के लिए जनता से माफी मांग ली जाय। जबकि इससे इतर भी कुछ नेताओं का सोचना है। उनका कहना है कि अब जब कुशवाहा को शामिल कर लिया गया है तब उन्हें टिकट देकर चुनाव भी लड़ाया जाय। अगर उनकी गिरफ्तारी होती है तो भी जेल से वह चुनाव लड़ें और भाजपा उनके साथ खड़ी रहे। ऐसे में कुशवाहा बिरादरी में उन्हें लेकर सिम्पैथी हो सकती है और बिरादरी का वोट भाजपा के खेमे में गिर सकता है।
हालाांकि भाजपा का नीचले स्तर के कार्यकर्ताओं का कहना है कि भाजपा को चार फीसद कुशवाहा के वोट मिलेंगे तो नहीं लेकिन पढे लिखे वर्ग के जो चार फीसद मिलने वाले थे वह कट जरुर सकते हैं। दरअसल बसपा से निकाले जाने के बाद से कुशवाहा भूमिगत हो गये थे और अपनी नई राजनीतिक जमीन की तलाश में जुटे थे। सीबीआई ने कुशवाहा को बुलाकर एनआरएचएम घोटाले में पूछताछ भी कर चुकी है। बसपा से हटने के बाद सीबीआई से बचने के लिए कुशवाहा ने कांग्रेस में घुसने के लिए कई प्रयास किये लेकिन राहुल गांधी ने उन्हें पार्टी में लेने से मना कर दिया था। कांग्रेस ने जब उन्हें नहीं लिया तब उसके बाद कुशवाहा ने समाजवादी पार्टी से राजनीतिक संरक्षण की गुहार की लेकिन जब वहां भी बात नहीं बनी तब उन्होंने भाजपा का रुख किया
कुशवाहा को लेकर भाजपा में जबरदस्त खेमेबन्दी कुशवाहा को लेकर भाजपा में जबरदस्त खेमेबन्दी Reviewed by Sushil Gangwar on January 05, 2012 Rating: 5

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