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Sunday, 1 January 2012

मधु कोड़ा ने लूटे 3300 करोड़


- शकील अख्तर ||
- इस पर कोड़ा को 1200 करोड़ टैक्स भरना होगा -
रांची : आयकर विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के पास 3300 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति होने का आकलन किया है. इस पर टैक्स की रकम करीब 1200 करोड़ रुपये होती है. उनके द्वारा विदेशों में किये गये निवेश की पूरी जानकारी मिलने के बाद अघोषित संपत्ति में वृद्धि होने का अनुमान है.मधु कोड़ा
आयकर की असेसमेंट शाखा ने अनुसंधान शाखा द्वारा छापेमारी में जुटाये गये दस्तावेज व विभिन्न व्यक्तियों से पूछताछ के आधार पर यह आकलन किया है. यह संपत्ति उनके नाम पर नहीं है. पर, इसे मधु कोड़ा का ही माना गया है.
कोई भी व्यक्ति अपनी नाजायज आमदनी से अपने अलावा करीबी लोगों के नाम संपत्ति अर्जित करता है. इसलिए इस मामले में माना गया है कि कोड़ा की सहमति के बिना बिनोद सिन्हा, संजय चौधरी या विकास सिन्हा सरीखे लोगों को कोई फ़ूटी कौड़ी नहीं देता. यानी कोड़ा ने अपनी नाजायज कमाई से दूसरों के नाम संपत्ति अर्जित की है. बिनोद सिन्हा द्वारा कमीशन की राशि लेने व लीज आदि के मामले निबटाने से संबंधित दस्तावेज को इस बात के सबूत के तौर पर पेश किया गया है कि कोड़ा ने अपने बदले दूसरों के नाम संपत्ति अर्जित की. इस पर मधु कोड़ा को करीब 1200 करोड़ रुपये टैक्स भरना होगा.
आयकर विभाग ने पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की अघोषित संपत्ति का असेसमेंट विभाग के संयुक्‍त आयुक्‍त संदीप राज के नेतृत्व में आयकर अधिनियम की धारा-153ए के तहत व अनुसंधान शाखा की ओर से की गयी छापेमारी में मिले दस्तावेज के आधार पर की है. कोड़ा ने यह अघोषित संपत्ति अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बिजली, खान और सड़क के क्षेत्रों में कमीशन लेकर अर्जित की है. इसमें कहा गया है कि नाजायज तरीके से कमाई गयी रकम को हवाला के माध्यम से विदेशों में भेजा जाता था.
इसके बाद यह रकम दुबई की केजीएन जेम्स एंड ज्वेलरी, सूर्यम जेम्स एंड ज्वेलरी, सिंगापुर की टिफ़ेनी गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड व हांगकांग की बेस्ट लिंक इंटरनेशनल के माध्यम से बालाजी इंटरनेशनल ट्रेड लिंक प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी के खाते में आती थी. इस तरह कोड़ा की ब्लैक मनी को ह्वाइट किया जाता था. इसके अलावा देश में विभिन्न कागजी कंपनियों में इंट्री के माध्यम से उसे ह्वाइट किया जाता था.
- कागज पर बेचा सोना -
जांच के दौरान बालाजी बुलियन बाजार ने सिर्फ़ चार माह में 10.78 टन सोना बेच कर 984.85 करोड़ कमाने का दावा किया. हालांकि वह इनकी बिक्री से संबंधित दस्तावेज पेश नहीं कर सका. बालाजी बुलियन बाजार ने मेसर्स बीबी एक्सपोर्ट को 10.94 करोड़ रुपये का सोना बेचने का दावा किया था. जांच में इसे गलत पाया गया. इसी तरह कुबेर टेक्सटाइल को सोने की छड़ बेचने का दावा भी गलत पाया गया.
मेसर्स गोवर्धन ट्रेडर्स नामक संस्था अपने पते पर मिली ही नहीं. इसी तरह नाकोडिया कॉमर्शियल, मेसर्स ए मल्टी ट्रेड प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स शाह एंड कंपनी, मेसर्स एडवांस फ़ाइन स्टॉक प्राइवेट लिमिटेड को सोना बेचने की बात भी पूरी तरह गलत साबित हुई.
- नकद 686.48 करोड़ जमा किये -
बालाजी बुलियन की ओर से यह दावा किया गया कि नोएडा में सोना बेच कर कमायी गयी इस रकम को मुंबई लाया गया और उसे यूनियन बैंक की झावेरी बाजार शाखा में जमा किया गया. जांच में पाया गया कि बालाजी बुलियन के मुंबई स्थित खाते में चार महीने (दिसंबर 2006, जनवरी 2007, मार्च 2007, मई 2007) में कुल 686.48 करोड़ रुपये नकद जमा किये गये.
अगर यह रकम 1000-1000 नोट के रूप में जमा करायी गयी, तो इसका वजन 8237.82 किलो ग्राम होता है. 500-500 के नोट के रूप में जमा करायी गयी हो, तो उसका वजन 13730 किलो ग्राम हुआ होगा. मुंबई में जमा कराने के लिए लाये गये 686.48 करोड़ (1000-1000 के नोट) का किराया 6.49 लाख होता. 500-500 के नोटों की स्थिति में 11.99 लाख रुपये होता है. बालाजी की ओर से नोट लाने के लिए किराया देने का कोई सबूत नहीं पेश किया जा सका. इस तरह इस बैंक में जमा राशि अघोषित संपत्ति है.
- दुबई में 804.72 करोड़ निवेश का प्रस्ताव बनाया था -
कोड़ा की नाजायज संपत्ति को जायज बनाने के लिए सोने की खरीद-बिक्री सिर्फ कागजों पर की गयी. जांच में यह भी पाया गया कि कोड़ा की नाजायज कमाई को हवाला के माध्यम से दुबई, इंडोनेशिया, लाइबेरिया सहित अन्य देशों में भेजा गया और विभिन्न प्रकार के व्यापार में निवेश किया गया. सिर्फ दुबई में कोड़ा की कमाई में से 804.72 करोड़ निवेश करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था. इसके आलोक में दुबई में अब तक 379.63 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है.
- चुनाव पर किये खर्च -
कोड़ा की नाजायज कमाई में से ही उनके चुनाव प्रचार पर खर्च किया गया है. चुनाव कार्य से जुड़े व कोड़ा के करीबी लोगों ने पूछताछ के दौरान इसे स्वीकार किया है. साथ ही उससे संबंधित साक्ष्य भी मौजूद हैं.
माइनिंग के मामले में बिनोद सिन्हा के हस्तक्षेप का अंदाज छापामारी में मिले दस्तावेज से पता चलता है. दस्तावेज में वर्णित तथ्यों के अनुसार एआर माइनिंग विवाद निबटाने के लिए जेएल गोयल बिनोद सिन्हा से मिले थे. इसके बाद एआर माइनिंग के शंभु बोस को आयरन ओर से खनन की अनुमति दी गयी. बोस ने आठ करोड़ रुपये मूल्य का 36689.955 मीट्रिक टन आयरन ओर निकाल कर बिनोद सिन्हा की कंपनी शिवांस स्टील को दी. इसके बदले बिनोद ने गोयल को फ़ूटी कौड़ी भी नहीं दी.
- कोड़ा की नाजायज कमाई का तरीका -
रिपोर्ट के मुताबिक, मधु कोड़ा खान मंत्री की हैसियत से काम करते हुए माइनिंग लीज की अनुशंसा के लिए दो लाख रुपये प्रति हेक्टेयर या 10 रुपये प्रति टन की दर से कमीशन लेते थे. ऊर्जा मंत्री की हैसियत से काम करते हुए प्रोजेक्ट कॉस्ट का 2.5 प्रतिशत और पथ निर्माण मंत्री की हैसियत से काम कारते हुए सड़कों के निर्माण में तीन प्रतिशत की दर से कमीशन लिया करते थे. कमीशन के लिए बातचीत बिनोद सिन्हा व संजय चौधरी के माध्यम से की जाती थी.
बिनोद सिन्हा कोड़ा से जुड़े विभागों में छाया मंत्री की तरह काम करता था. उद्योगपतियों, ठेकेदारों से लेन-देन का मामला तय होने के बाद वह रात को मधु कोड़ा से मुख्यमंत्री आवास में मिलता था. इसके बाद उसकी ओर से तय किये गये कार्यो को अंतिम रूप दिया जाता था. कोड़ा की नाजायज कमाई और उसे निवेश करने में बिनोद सिन्हा, संजय चौधरी व अन्य की महत्वपूर्ण भूमिका है. कमीशन की रकम नकद या चेक से ली जाती थी.
इस रकम को इंट्री ऑपरेटरों के सहारे विभिन्न कंपनियों में शेयर ऐप्लकेशन मनी के रूप में निवेश किया जाता था. नाजायज कमाई का एक हिस्सा हवाला के माध्यम से विदेशों में भेज कर निवेश किया जाता था. नाजायज कमाई में से ही कोड़ा के चुनाव प्रचार आदि पर खर्च किया जाता था.
- कोड़ा के सहयोगी -
* बिनोद सिन्हा : चाइबासा का छोटा व्यापारी था. कृषि से जुड़ी सामग्री की खरीद-बिक्री करता था. मधु कोड़ा को वह कॉलेज के जमाने से ही जानता था. कोड़ा के मंत्री व मुख्यमंत्री बनने के बाद बिनोद का नाम चर्चा में आया. उसने कोड़ा की अघोषित कमाई को देश और विदेशों में निवेश करने में मदद की. उसने जमशेदपुर, रांची, मुंबई, पुणे, नासिक, कोलकाता के अलावा इंडोनेशिया, दुबई, सिंगापुर, हांगकांग, लाइबेरिया, अंगोला, स्वीडेन, कीनिया, सियेरा लियोन सहित अन्य स्थानों पर निवेश करने में देशी-विदेशी लोगों की मदद ली. वह कोड़ा की चुनावी और वित्तीय गतिविधियों को भी नियंत्रित करता था.
* संजय चौधरी : संजय चौधरी भी जमशेदपुर का छोटा व्यापारी था. बिनोद सिन्हा के संपर्क में आने के बाद उसने दुबई, बैंकाक, सिंगापुर आदि जगहों पर किये गये निवेश को नियंत्रित किया और वहां शुरू किये गये व्यापार की देख-रेख करने लगा. वह बिनोद सिन्हा द्वारा बनायी गयी कई कंपनियों का निदेशक है. दुबई, बैंकाक सहित अन्य जगहों पर उसके नाम कई बैंक खाते हैं. वह बालाजी बुलियन एंड कमोडिटीज नामक कंपनी में भी निदेशक है.
* विकास सिन्हा : विकास सिन्हा कोड़ा के करीबी बिनोद सिन्हा का छोटा भाई है. वह शिवांस स्टील, एम्मार एलायज, इंडिया मोटर एंड ट्रैक्टर, समृद्धि स्पंज सहित बिनोद सिन्हा द्वारा बनायी गयी अन्य कंपनियों के निदेशकों में से एक है. वह इन कंपनियों की वित्तीय गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए एसके नरेडी, विजय जोशी आदि की मदद लेता था.
* मनोज पुनमिया : मुंबई का हवाला कारोबारी है. उसने कोड़ा की नाजायज कमाई को कागजी कंपनियों के माध्यम से जायज करार देने में अहम भूमिका निभायी. वह कोफ़ेपोसा (कंजरवेशन ऑफ फॉरेन एक्सचेंज एंड प्रिवेंशन ऑफ स्मगलिंग एक्िटविटीज एक्ट) के तहत एक साल जेल में रह चुका है. बिनोद सिन्हा द्वारा खोली गयी कंपनियों में वह भी निदेशक है.
* अरविंद व्यास : मुंबई का व्यापारी है. बिनोद सिन्हा की कई कंपनियों का निदेशक है. मनोज पुनमिया का खास आदमी है. मनोज पुनमिया विदेशों में अपनी गतिविधियां अरविंद के माध्यम से नियंत्रित करता था.
* अनिल बस्तावड़े : पुणे का व्यापारी है. वह इंडोनेशिया और दुबई में अपनी व्यापारिक गतिविधियां संचालित करता है. दुबई में 250 करोड़ रुपये की लागत से रियल इस्टेट व्यापार संचालित करता है.
* विजय जोशी : कोलकाता का व्यापारी है. बिनोद सिन्हा द्वारा बनायी गयी कंपनी लकी प्रोजेक्ट, इंडो असाही ग्लास, क्रिऐटव फ़िसकल सर्विसेज का निदेशक है. इसने शेयर ऐप्लकेशन मनी के रूप में बिनोद सिन्हा को ब्लैक मनी को ह्वाइट करने में मदद की है.
- कोड़ा कांड में कब क्या हुआ -
राजेश शर्मा ने मंत्रियों द्वारा पद का दुरुपयोग कर धन अर्जित करने का आरोप लगाते हुए निगरानी कोर्ट में याचिका दाखिल की. अदालत ने निगरानी को मामले की जांच का आदेश दिया. निगरानी ने प्राथमिकी दर्ज की. प्रवर्तन निदेशालय ने भी इस सिलसिले में प्रिवेंशन आफ़ मनी लाउंड्रिंग एक्ट के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की.
दुर्गा उरांव ने जनहित याचिका(4700/2008) दायर की. इसमें पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा व कुछ अन्य मंत्रियों पर आय से अधिक 200 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित करने का आरोप लगाया. मामले की जांच सीबीआइ से कराने का अनुरोध किया. इस बीच आयकर विभाग की अनुसंधान शाखा ने अजीत श्रीवास्तव के नेतृत्व में 31 सितंबर 2009 को कोड़ा व उसके सहयोगियों के 72 ठिकानों पर छापामारी की. कोड़ा के कुछ अन्य सहयोगियों के ठिकानों पर दूसरी बार 16 फ़रवरी 2010 को छापामारी की.
छापामारी में प्रवर्तन निदेशालय भी शामिल रहा. आयकर के इतिहास में इससे पहले एक साथ इतनी जगहों पर छापामारी नहीं हुई थी. छापामारी में काफ़ी दस्तावेज जब्त किये गये. इससे नाजायज तरीके से पैसे कमाने और हवाला के माध्यम से विदेशों में निवेश करने का पता लगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए हाइकोर्ट ने चार अगस्त 2010 को इसके आपराधिक पहलू की जांच सीबीआइ से कराने का आदेश दिया.
* पूछताछ में किसने क्या स्वीकार किया *
- मधु कोड़ा ने बिनोद के साथ अपने संबंधों को स्वीकार किया. वह 1990 से उसे जानते थे.
- कोड़ा ने बिनोद सिन्हा के साथ बैंकॉक जाने व एक ही होटल में ठहरने और यात्रा का खर्च बिनोद सिन्हा द्वारा उठाने की बात स्वीकार की
- कोड़ा ने अपना निजी सचिव अरुण श्रीवास्तव को 18 सालों से जानने की बात स्वीकार की- अरुण कुमार श्रीवास्तव ने कोड़ा और बिनोद के संबंधों को स्वीकारा
- अरुण श्रीवास्तव ने माइनिंग लीज के आवेदकों से बिनोद सिन्हा द्वारा लेन-देन की बात करने के बाद उसकी मुलाकात कोड़ा से करवाने और लीज की अनुशंसा कराने की बात स्वीकार की
- तत्कालीन खान सचिव जयशंकर तिवारी ने लीज के मामलों में बिनोद सिन्हा के हस्तक्षेप की बात स्वीकार की. साथ ही बिनोद द्वारा आवेदकों से 10 रुपये प्रति टन की दर के कमीशन मांगने की बात मानी
- हवाला कारोबारी मनोज पुनमिया ने माना कि बिनोद सिन्हा ने उसकी मुलाकात कोड़ा से करवायी थी
- सीए एसके नरेडी ने कोड़ा, उनकी पत्नी, बिनोद सिन्हा और उसके पारिवारिक सदस्यों का रिटर्न दाखिल करने की बात स्वीकार की
-आइवीआरसीएल के मैनेजर डीके श्रीवास्तव ने माना कि बिनोद सिन्हा के आदेश पर ही टेंडर फ़ाइनल होता था
- डीके श्रीवास्तव ने बिनोद सिन्हा के माध्यम से मधु कोड़ा को 11.40 करोड़ कमीशन देने की बात स्वीकार की
- बिजली बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष वीएन पांडेय ने कोड़ा के चेंबर में बिनोद सिन्हा से मुलाकात होने की बात स्वीकार की
- इस मुलाकात में कोड़ा चुप रहे, जबकि बिनोद सिन्हा बोर्ड के अधिकारियों के तबादले पर उनसे सवाल करता रहा
- प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के तत्कालीन सदस्य सचिन आरएन सिन्हा ने अपनी प्रोन्नति के मामले में बिनोद सिन्हा से मिलने की बात मानी
- खान विभाग के तत्कालीन प्रशाखा पदाधिकारी बसंत भट्टाचार्य ने बिनोद सिन्हा के इशारे पर काम होने और माइनिंग लीज डील में पैसे लेने की बात मानी
- बसंत ने माइनिंग लीज डील में विभिन्न पार्टियों से वसूली गयी 118 करोड़ रुपये की जानकारी भी दी
- कोर स्टील के अधिकारियों ने माइनिंग लीज डील में बिनोद सिन्हा को चेक के माध्यम से 13 करोड़ रुपये देने की बात स्वीकार की
- बिनोद सिन्हा की कंपनी सत्यम मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के राजेश पटेल ने बिनोद के इशारे पर चुनाव में कोड़ा के पक्ष में लेख लिखने की बात स्वीकार की
- चाईबासा के संजय पोद्दार ने कोड़ा के चुनाव प्रचार से जुड़े लोगों को 6.28 करोड़ रुपये देने की बात स्वीकार की
- संजय पोद्दार ने यह भी माना कि बिनोद सिन्हा ने उसे कोड़ा के चुनाव प्रचार के वित्तीय पहलू की जिम्मेवारी सौंपी थी
- बिनोद सिन्हा चुनाव खर्च के लिए विभिन्न लोगों के माध्यम से उसके पास पैसे भेजता था
- चाईबासा के सुबोध दुबे ने माना कि लोकसभा चुनाव 2009 में मीडिया के लोगों के बीच दो लाख रुपये बांटा था
सौजन्य: प्रभात खबर

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