राष्‍ट्रीय सहारा के पत्रकार छाप रहे पेड न्‍यूज, पैसा डाल रहे अपनी जेब में


गोरखपुर से प्रकाशित होने वाले राष्‍ट्रीय सहारा के जिला और तहसील के ब्‍यूरो प्रभारियों ने चुनाव आयोग और अपनी कंपनी को चूना लगाने का हथकंडा अपना लिया है. वे नेताओं से नकदी लेकर वार्ता, जनसंपर्क, विशेष बातचीत के माध्‍यम से चुनावी वैतरणी में खूब गोता लगा रहे हैं. राष्‍ट्रीय सहारा के पत्रकार नेताओं से पैसा लेकर पेड न्‍यूज छाप रहे हैं. नेताओं से मिले पैसे कंपनी को भी नहीं दे रहे हैं.
'जिताने की अपील', 'अमुक ने किया दर्जनों गांवों का दौरा', 'जनसंपर्क कर मांगा सहयोग', 'अमुक के पक्ष में लामबंद', 'अमुक की प्रेसवार्ता', तथा 'अमुक से सहारा की विशेष बातचीत' आदि तमाम शीर्षकों से खबरें छाप कर दलाल टाइप के कुछ पत्रकार अपना काला धंधा शुरू कर दिए हैं. गोरखपुर से निकलने वाले अन्‍य अखबार इस प्रकार की खबरों से परहेज कर रहे हैं. चुनाव आचार संहिता लागू हो गई है, लेकिन दलालों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा है. यह जरूर है कि सिटी के एडिशन में इस प्रकार की खबरों पर अंकुश लगा है, लेकिन जिलों में तो बहती गंगा में हाथ धोने के लिए सब आतुर हैं.
जिला और तहसील के ब्‍यूरो प्रभारियों ने चुनाव की घोषणा के दिन से ही अपनी दुकानदारी खोल ली है. ब्‍यूरो प्रभारी और पत्रकार यदि नेताओं या प्रत्‍याशियों से मिले पैसे कंपनी में जमा करते तो अखबार को लाभ होता, लेकिन वे अपनी जेब गरम कर कंपनी को ही चूना लगा रहे हैं. इसका एक कारण यह भी है कि जबसे राष्‍ट्रीय सहारा के प्रकाशन की शुरुआत हुई है तब से वही लोग प्रभारी हैं. अन्‍य अखबारों में जिला व तहसील के ब्‍यूरो प्रभारियों को बदला जाता है, इससे उनमें भय बना रहता है. राष्‍ट्रीय सहारा में कोई भय नहीं है इसलिए लूट जारी है.
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित
Bhadas4media.com
राष्‍ट्रीय सहारा के पत्रकार छाप रहे पेड न्‍यूज, पैसा डाल रहे अपनी जेब में राष्‍ट्रीय सहारा के पत्रकार छाप रहे पेड न्‍यूज, पैसा डाल रहे अपनी जेब में Reviewed by Sushil Gangwar on December 27, 2011 Rating: 5

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